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सराहनीय पहल:मिट्‌टी में सफलता नहीं मिली तो छत पर पानी में की सब्जियों की जैविक खेती

जांजगीर2 महीने पहले
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लोकेंद्र सिंह ठाकुर | किसानों द्वारा किए जा रहे कीटनाशकों के छिड़काव से पैदावार में बढ़ोतरी हुई। इसका एक दुष्प्रभाव यह हुआ कि लोग कीटनाशक मिला हुआ ज़हरीला खाना खाने पर मज़बूर हो गए, लेकिन अब स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ती जा रही है। असुरक्षित खानपान की वजह स पिता को खो चुके ऐसे ही चांपा कोटाडबरी के शिक्षक मोहन कुमार जोगी ने पानी में जैविक खेती कर रहे हैं। उन्होंने इस तकनीक से अपने घर के छत पर लेट्यूज (कहू), टमाटर, पालक, करमता, बीन्स की खेती करने में सफलता पाई है।
तकनीक को वो अब ग्राम पंचायतों में महिला समूहों को भी सीखाना चाहते हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इस तकनीक से घर पर ही सब्जियों की जैविक खेती करें और बाहरी खानपान से दूर रहे।
इस काम में उनके बेटे 15 वर्षीय नित्यानंद जोगी और 10 वर्षीय अंकित जोगी हाथ बटाते हैं। उनके दोनों पुत्र ने मिलकर टेरेरियम तकनीक से बंद ग्लास के भीतर पौधे लगा रखे हैं। उन्होंने बताया कि इस खेती में 90 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है, इसके लिए खाद भी घर पर ही गाय के गोबर और बैक्टिरिया के फार्मेशन से तैयार किया जाता है। इसमें निंदाई कोड़ाई का कोई झंझट नहीं होता, सिर्फ समय-समय पर पानी में जैविक खाद न्यूट्रेंट के रूप में डालना होता है।

इजरायल में पानी में सब्जियों की खेती सबसे ज्यादा- इस खेती की शुरुआत नार्वे में हुई थी, इसके बाद यह एशिया के कुछ हिस्सों में फैला, लेकिन वर्तमान में सबसे उन्नत और बेहतर ढंग से जल कृषि इजरायल में की जा रही है। इजरायल में उपजाऊ भूमि कम है, इसलिए यहां जल कृषि वर्टिकल फार्म में किया जा जाता है।

कैंसर से हुई थी पिता की मौत
साल 2013 में मोहन कुमार जोगी के पिता मेघनाथ जोगी को गले का कैंसर हुआ था। उनके इलाज में उन्होंने 13 से 14 लाख रुपए खर्च किए। इसके बाद उन्होंने घर पर जैविक तरीके से सब्जियां लगाई, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। इसके बाद जल कृषि के बारे में उन्हें पता चला और फिर छत पर जल कृषि शुरू किया।
40 पौधों के लिए सौ रुपए तक खर्च
इस तकनीक में एक बॉक्स में 25 से 40 तक पौधे लगा सकते हैं। प्रत्येक बॉक्स के लिए अधिकतम सौ रुपए का खर्च है। छत पर लगाए गए पौधों के लिए उन्होंने बॉक्स के अलावा पाइप से वर्टिकल फार्म में भी खेती की है। इसमें टाइमर के जरिए दिन में दो बार एक-एक घंटे पानी की सप्लाई की जाती है।

यह तकनीक सभी के लिए फायदेमंद है
"यह तकनीक फायदेमंद है, लेकिन भारत में यह बहुत ज्यादा नहीं है। दिल्ली और पंजाब में जरूर कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे शुरू कर रहे हैं। इसे तकनीक से लोग घरों में सब्जी की पैदावार आसानी से कर सकते हैं।''
-डॉ. केएनएस बनाफर, डीन कृषि कॉलेज जांजगीर

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