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लेटलटीफी:राशन में मेरी मर्जी तो शुरू नहीं हो सकी, लोगों को वार्डों से भी बाहर जाना पड़ रहा राशन लेने

जांजगीर20 दिन पहले
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सामान रखने के लिए जगह नहीं होने पर इस तरह रखा जाता है राशन सामान। - Dainik Bhaskar
सामान रखने के लिए जगह नहीं होने पर इस तरह रखा जाता है राशन सामान।
  • 6 महीने में भी नहीं हो पाया नगर की दुकानों का आवंटन, नगर में 25 वार्ड और दुकानें मात्र 8

लोगों को आसानी से राशन उपलब्ध कराने की लिए प्लान की गई सरकार की योजना मेरी मर्जी तो शुरू हो नहीं सकी, वहीं जिला मुख्यालय के लोगों को अभी भी राशन लेने के लिए अपने वार्डों से बाहर जाना पड़ता है, क्योंकि एक से अधिक दुकानों का संचालन अभी एक ही समूह के द्वारा किया जा रहा है। राशन कार्डों का युक्तियुक्तकरण के साथ ही अलग दुकानों का आवंटन अभी तक नहीं हो पाया है।

जिला मुख्यालय की आबादी 45 हजार से अधिक हो गई है। इतने बड़े शहर में राशन की सरकारी दुकानें केवल 8 ही हैं। इन्हीं आठ दुकानों से सभी वार्डों के लोगों को राशन का सामान उठाना पड़ता है। एक ही व्यक्ति/समूह द्वारा एक से अधिक राशन दुकानों का संचालन किया जा रहा है, इसलिए लोगों की भीड़ भी इन दुकानों में लगती है।

इससे राशन दुकान संचालकों को किसी प्रकार की हानि नहीं बल्कि फायदा ही है, क्योंकि वे मर्जी से ग्राहकों को राशन देते हैं। इसलिए कई बार दूसरे वार्ड में राशन लेने गए लोगों को खाली हाथ भी लौटना पड़ता है, क्योंकि भले ही नियम पूरे महीने भर राशन देने का हो, लेकिन कुछ दुकान संचालकों ने एक तारीख निर्धारित कर ली है, वे उसी समय तक ही राशन देते हैं। वहीं कुछ स्थानों पर राशन रखने तक की जगह नहीं होने पर बाहर ही ढंक कर रख दिया जाता है।

कुछ राजनीतिक दबाव भी -जिला मुख्यालय में दुकान लेने के लिए जिन समूहों ने आवेदन किया है, उन्होंने अपनी ओर से एप्रोच भी लगा दिया है। एक समूह के द्वारा चार- पांच दुकानों के लिए आवेदन किया गया है और सभी दुकानें चाह रहे हैं। सूत्रों के अनुसार अपने लोगों को दुकान दिलाने के लिए राजनीतिक दल के पदाधिकारी भी लगे हुए है। इसलिए भी आवंटन में किसे प्राथमिकता दें और किसे न दें ऐसी उलझन भी है।

प्रक्रिया पूरी होने के बाद शहर में होंगी 17 दुकानें

जिला मुख्यालय में राशन दुकानों को 8 से बढ़ाने की प्रक्रिया इस वर्ष के जनवरी से शुरू हुई है। इन दुकानों में 2000 से लेकर 2500 तक कार्डधारक हैं, जबकि नियमानुसार एक दुकान में कम से कम 500 कार्ड होने चाहिए हालांकि अधिकतम की सीमा निर्धारित नहीं है, फिर भी इतना अधिक कार्ड नहीं होना चाहिए यह तय है। इसलिए जिन दुकानों में अधिक कार्डधारक हैं, वहां के कार्डधारकों को अलग कर दुकानें संचालित की जाएगी। इस हिसाब से करीब 9 नई दुकानें बढ़ जाएंगी। एक वार्ड में एक दुकान होगी तब भी 18 वार्डों के लोगों को अपने वार्डों में राशन मिलेगा। हालांकि पूरी प्रक्रिया एक माह में पूरी होनी थी अधिकतम मार्च तक तो दुकानों का आवंटन हो जाना था।

दुकानों के न खुलने का लॉकडाउन भी एक कारण

दुकानों के विलंब होने के लिए कोरोना के कारण लगाया गया लॉकडाउन भी हो सकता है, लेकिन यह लॉकडाउन 13 अप्रैल से लगा था। इससे पहले पर्याप्त समय और पिछले एक माह से सब खुल गया है। इसके बाद भी राशन दुकानों का आवंटन नहीं हो पाया है।

इन वार्डों में प्रस्तावित है नई राशन दुकानें

वार्ड क्रमांक 1 के लिए श्याम कार्तिक वार्ड में, वार्ड क्रमांक 3 के लिए उसी सरदार वल्लभ भाई पटेल वार्ड में वार्ड क्रमांक 5 और 6 के लिए वार्ड क्रमांक 5 महाराजा अग्रसेन वार्ड में, वार्ड क्रमांक 11 और 12 के लिए शिवाजी वार्ड क्रमांक 11 में, 17,18 के लिए वार्ड क्रमांक 17 परशुराम वार्ड में, 20 के लिए उसी वार्ड में, 21,22 के लिए केरारोड वार्ड क्रमांक 21 में, 23,24 के लिए अमरैया वार्ड 23 में 25 के लिए उसी वार्ड में नई दुकानें प्रस्तावित हैं।

आवेदन की प्रक्रिया दूसरी बार की गई

राशन दुकानों के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया दूसरी बार की गई थी। दस्तावेजों के सत्यापन मेंं समय लगा। इसके अलावा लॉकडाउन में भी काम बंद था। जल्दी ही प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी।'' -अमृत कुजूर, खाद्य अधिकारी, जांजगीर-चांपा

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