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कोरोना का कहर:पहले 52 दिनों में एक भी केस नहीं, बाद के 81 दिन में 496 संक्रमित

जांजगीर2 महीने पहले
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  • लॉकडाउन में नियमों का पालन किया, अनलॉक होते ही छूट मिली तो बढ़े केस

कोरोना जानलेवा बीमारी हो सकती है, इसके बाद भी लाेग इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। प्रशासन या सरकार थोड़ी सी ढील देती है तो उसे अवसर में बदल देते हैं। बड़ी संख्या में लोग बाजार में निकलने लगते हैं। स्थिति यह है कोरोना शुरू होने के पहले 52 दिनों में हमारे जिले में एक भी पॉजिटिव मामला नहीं आया था। क्योंकि इस दौरान लोग कोरोना के नाम से डर जाते थे। इसके बाद के 81 दिनों में आए आंकड़े डराते हैं। 15 मई से 3 अगस्त तक जिले कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 500 के आसपास पहुंच गई है। मंगलवार को वार्ड नंबर 25 एक और संक्रमित मिला। कोरोना महामारी का पहला मामला जिले में 15 मई को आया। इस दिन अलग-अलग क्वारेंटाइन सेंटर से 5 प्रवासी मजदूर संक्रमित मिले थे। उसके बाद से 26 जून तक के 84 दिनों के कोरोनाकाल में एक मजदूर की कोरोना से मौत हुई। लॉकडाउन के शुरुआती दिनों में तो दहशत रही, लोग कोराेना के नाम से डरने लगे, इसलिए अप्रैल माह भर सतर्कता बरती गई। मई में सरकार ने थोड़ी रियायत दी तो इसी महीने से प्रवासी मजदूरों का जिले में आना शुरू हुआ। इस महीने में केवल 15 मजदूर कोरोना पॉजिटिव मिले। इस दौरान जिले में आने वाले प्रवासी मजदूरों काे क्वारेंटाइन में रखा गया। नियमित रूप से उनका सैंपल लेकर जांच कराई गई तो महीने भर में आंकड़ा 222 तक पहुंच गया। इसी माह में मजदूरों की क्वारेंटाइन अवधि पूरी होती गई और वे मुक्त किए गए।

हसौद में कम्युनिटी स्प्रेड जुलाई में 209 केस मिले
जुलाई माह में हसौद के एक कोरोना पॅजिटिव की मौत हो गई। जिस युवक की मौत हुई वह गांव में बहुतों के संपर्क में आया था। उसके संपर्क में आए मोहल्ले के लोग, मेडिकल संचालक, पान दुकान संचालक के अलावा किराना व्यापारी व आसपास के अन्य लोग भी संपर्क में थे। इसके कारण इस गांव में ही कोरोना पॉजिटिव मरीजों का आंकड़ा लगभग 120 से ऊपर हो गया है। इसके अलावा मुरलीडीह में एक वृद्ध की मौत इसी बीमारी से हुई, जिसके संपर्क आए उनके घरों के लगभग 15 से अधिक लोग संक्रमित पाए गए थे। इसी माह में संक्रमितों की संख्या 209 तक पहुंच गई।

लॉकडाउन में ढील मिली तो भूले सोशल डिस्टेंसिंग, अब हर वर्ग प्रभावित
केंद्र सरकार द्वारा लॉकडाउन में ढील देने के बाद प्रवासी श्रमिकों के अलावा दूसरे लोग सोशल डिस्टेंसिंग भूल गए। इस दौरान तो ऐसे- ऐसे लोग पॉजिटिव पाए गए, जिनकी कोई कल्पना नहीं कर सकता। कहीं व्यापारी पॉजिटिव मिले तो कहीं सरकारी नौकरीपेशा लोग उसकी चपेट में आ गए। इसका प्रमुख कारण यह माना जा रहा है कि लोग सोशल डिस्टेंसिंग को ही भूल गए हैं और बिना मस्क के ही बाजार में खरीदारी करने के लिए पहुंचे। कोरोनाकाल में भी लोगों ने परिजनों के यहां आना-जाना बंद नहीं किया। नतीजा यह निकला कि एक संक्रमित ने कईयों को बीमार किया।

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