पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

मदर्स डे आज:हे मां...तुम धन्य हो और मैं खुशकिस्मत, सामाजिक बुराई के खिलाफ इस लड़ाई में भी तुमने मुझे अपने साथ रखा

अकलतराएक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
  • छोटे बच्चों के साथ शराब के खिलाफ मां कर रहीं संघर्ष, क्योंकि उन्हीं बच्चों के भविष्य को बचाना है

सौरभ जैन | कापन में मातृ शक्ति ने यह बता दिया है कि यदि उनके विरोध में पुरुषों का हस्तक्षेप न हो तो वे सरकार व प्रशासन को हिलाकर रखने का माद्दा रखती हैं। ये मां अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर पिछले छह दिनों से आंदोलन कर रहीं हैं। सामाजिक बुराई शराब के खिलाफ इस लड़ाई में उनकी गोद में मासूम बच्चे भी सात घंटे दुकान बंद होने के समय तक रहते हैं। मासूम बच्चे यह जरूर सोचते होंगे कि हे मां तुम धन्य हो और मैं खुशकिस्मत, सामाजिक बुराई की इस लड़ाई में तुमने मुझे अपने साथ रखा।
जब घर में रहना जरूरी तब भी आंदोलन करने आ रहीं पुष्पा
पुष्पा वर्मा को 8 महीने का गर्भ है। मई में जब तापमान भी 35 डिग्री से ऊपर  पहुंच गया है और परिस्थितियां प्रतिकूल हो गई है। ऐसे समय में उन्हें घर में रहकर अपने और गर्भ में पहल रहे बच्चे के स्वास्थ्य की रखवाली करनी चाहिए लेकिन वह भी प्रतिदिन आकर सामाजिक बुराई के खिलाफ इस आंदोलन को अपना समर्थन दे रही है। पुष्पा वर्मा का कहना है कि वे गांव की महिलाओं के साथ है। जब तक शराब दुकान बंद नहीं हो जाती, तब तब वे धरना स्थल पर आती रहेंगी। शराब दुकान दुबारा खुलने नहीं दी जाएगी।  वो कहती हैं वर्तमान में समय घर में आराम करने का नहीं, गांव को नशा मुक्त करने के साथ-साथ गांव को अशांत माहौल से बचाने का है। इस बार अगर हम ढीले पड़े तो शराब के कारण हमारे बच्चों को भविष्य को सुरक्षित रखना कठिन हो जाएगा। 
 दो साल का बेटा महसूस करे शराब है गलत इसलिए साथ लाई: जमुना

जमुना कश्यप ने बताया कि उसका बेटा दो साल का है। अभी वह इतना समझदार नहीं है कि सही व गलत क्या है बता सके, पर उसे भी वह साथ लेकर आती हैं, क्योंकि बेटे को यह महसूस हो सके कि शराब गलत है, जब बड़ा होगा तो उसे एहसास रहेगा कि उसकी मां ने शराब के विरोध में आंदोलन किया था। बच्चे को भूख लगने पर वहीं पर खाना खिला देती है। प्रतिमा गौतम ने बताया कि डेढ़ वर्ष की अपनी बेटी को लेकर धरना प्रदर्शन स्थल में आ रही है। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक सात घंटे तक आंदोलन को अपना समर्थन दे रही है और जब तक आंदोलन जारी रहेगा वे प्रतिदिन आकर अपना समर्थन देंगी। चित्रलेखा कश्यप ने बताया कि वे अपने 2 साल की बेटी को लेकर आती है। गोद में बैठाकर आंदोलन स्थल में सुबह से लेकर शाम तक उपस्थित रहती है। गांव की रुपाली देवी महिलांगे अपने 2 साल के बेटे, लता पोछारी भी अपने 2 साल के बेटे के साथ पिछने 6  दिनों से आंदोलन में शामिल होकर समर्थन दे रही हैं।

खबरें और भी हैं...