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मुश्किल:धान है जिले की संजीवनी, अब महंगी होगी खेती क्योंकि खाद की कीमत डेढ़ गुना बढ़ी

जांजगीरएक महीने पहले
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  • डीएपी 1800, एनपीके 1747, पोटाश 1000, सुपर फॉस्फेट की कीमत हो गई 375 रुपए बोरी
  • खाद पर सरकार का कोरोना टैक्स: लगभग 5 लाख एकड़ से अधिक में होती है खेती

पिछले चौदह माह से कोरोना की विभीषिका से जूझ रहे किसानों पर इस बार खाद की महंगाई की मार पड़ी है। धान की फसल के लिए जरूरी खाद डीएपी, पोटाश, एनपीके की कीमत पिछले साल की तुलना में डेढ़ गुना इस साल बढ़ा दी गई है। यूरिया की कीमत पहले की तरह स्थिर है, वहीं सुपर फास्फेट खाद की कीमत में 35 से 40 रुपए प्रति बोरी की बढ़ोतरी कर दी गई है।

धान जिले की प्रमुख फसल है। धान के उत्पादन और बिक्री में हमारा जिला प्रदेश में टॉप पर रहता है। इस जिले की पहचान भी है। धान के अलावा कोई दूसरी फसल सभी किसान नहीं ले पाते हैं। वे किसान जिनके पास साधन व व्यवस्था है, वे ही रबी में दूसरी फसल ले पाते हैं। रबी में भी अधिकांश किसान धान का ही उत्पादन करते हैं। धान ही इस जिले के किसानों के लिए संजीवनी के समान है। जिले में पिछले साल लगभग पौने दो लाख किसानों ने लगभग 5 लाख एकड़ एरिया में धान की फसल ली थी। इस फसल के हो जाने के बाद जिले के गरीब मजदूर पलायन कर जाते हैं। इस बार इसी फसल का उत्पादन करने वाले किसानों पर महंगाई की मार बढ़ गई है। धान की फसल में यूरिया, पोटाश व डीएपी खाद का उपयोग अधिक होता है। सरकार ने पोटाश, डीएपी, एपीके खाद की कीमत में पिछले साल की तुलना में इस वर्ष डेढ़ गुना की बढ़ोतरी कर दी है। यूरिया के दाम में बढ़ोतरी नहीं हुई है। वहीं सुपर फास्फेट की कीमत में 35 से 40 रुपए बोरी कीमत बढ़ा दी गई है। इसे लेकर जिले के किसान चिंतित हैं।

समितियों के अलावा दुकानों में भी होती है बिक्री
रासायनिक खाद की बिक्री सहकारी समितियों के अलावा प्रायवेट दुकानों से भी होती है। जिले में सहकारी गोदाम से कितनी बिक्री हुई इसका रिकॉर्ड तो डीएमओ के पास है। इस रिकॉर्ड के अनुसार सर्वाधिक मांग यूरिया और डीएपी खाद की होती है। पिछले साल सहकारी समितियों के माध्यम से 28143 मीट्रिक टन यूरिया और 11698 मीट्रिक टन डीएपी खाद की बिक्री हुई थी। इस वर्ष भी इन्हीं दोनों खादों की मांग अधिक की गई है।

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