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ईई:निर्माण की अनुमति ली, सीएमओ: परमिशन की कर रहे जांच

जांजगीर11 दिन पहले
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  • नहर, तालाब, कुएं की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सख्त निर्देश, पर शहर के बीच नहर की जमीन पर हो रहा अतिक्रमण

जल संसाधन के ईई एसएल यादव का दावा है कि उन्होंेने नहर की जमीन पर कब्जा नहीं किया है, बल्कि पालिका से अनुमति लेकर निर्माण कराया है, वहीं अनुमति के मामले में सीएमओ का कहना है कि नहर की जमीन पर निर्माण की अनुमति नगर पालिका से नहीं दी जा सकती। सीएमओ ने श्री यादव को दी गई भवन अनुज्ञा से संबंधित सारे रिकार्ड निकलवाने की बात कही है। विभाग के अफसर इस मामले में नोटिस की कार्रवाई से बच रहे हैं। उन्होंने विभागीय बैठकों में खुद को व्यस्त बताते हुए बुधवार से नोटिस देने की बात कही है। 22.4 किमी लंबी इस मुख्य नहर के दोनों तरफ करीब 240 से ज्यादा मकान है। इनमें से 50 प्रतिशत लोगों ने नहर की जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसमें मंदिर के नाम पर बने मकान और सामुदायिक भवन तक शामिल है। उक्त जमीन विभाग की है, यह बात सभी को पता है, बावजूद लोग नहर की जमीन पर अतिक्रमण करने में पीछे नहीं है। सबसे ज्यादा अतिक्रमण नहरिया बाबा रोड पर है। मुख्य नहर के साथ केरा रोड होकर गुजरने वाली माइनर नहर की जमीन पर लोगों ने कब्जा कर रखा है। बाउंड्री, दुकानें, शेड व पार्किंग लोगों ने बना लिया है। इन क्षेत्रों में न तो विभाग ने किसी तरह का नोटिस दिया है और न ही कार्रवाई की है। यही वजह है कि एक दूसरे को देखकर अतिरिक्त निर्माण करा रहे हैं।

जानिए नहर की कहां कितनी अतिरिक्त जमीन

  • बीटीआई चौक के नजदीक- 187 फीट कुल चौड़ाई
  • रेस्ट हाऊस के नजदीक- 187 फीट कुल चौड़ाई
  • पूर्व सांसद निवास नजदीक- 176 फीट कुल चौड़ाई
  • शिव मंदिर के नजदीक-220 फीट कुल चौड़ाई
  • पार्षद निवास के नजदीक- 190 फीट कुल चौड़ाई
  • तिरूअंनत विहार के नजदीक- 176 फीट कुल चौड़ाई

(स्त्रोत: यह जानकारी सिंचाई विभाग से मिली है)

जल स्त्रोतों के सरंक्षण के लिए सुप्रीमकोर्ट के यह निर्देश
पटवारी संघ के अध्यक्ष ज्योतिष कुमार सर्वे ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार कोई क्षेत्र या भूमि का टुकड़ा किसी जलस्रोत या तालाब, नहर, झील के लिए आरक्षित है तो उस जगह किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य की अनुमति बिना कलेक्टर की सहमति के नहीं दी जा सकती। और यदि ऐसी कोई अनुमति दी गई है तो उसे तत्काल प्रभाव से रद्द माना जाएगा। इन निर्देशों के उल्लघंन पर कुछ समय पहले शहर के एक पटवारी निलंबित भी हो चुके हैं। फिर भी गड़बड़ी जारी है।

हम अनुमति कैसे दे सकते हैं
"ये मेरे आने से पहले के निर्माण है। फिर भी पालिका तय नियमों के तहत ही अनुमति देती है, नहर की जमीन पर पालिका अनुमति ही नहीं दे सकती। सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश है कि जल स्त्रोतों को संरक्षित रखना है। विभाग चाहे तो संबंधित से अपनी जमीन खाली करा सकता है। यदि हमने नहर की जमीन पर अनुमति दी है, तो मैं उनके दस्तावेज और सारे रिकार्ड निकलवा कर चेक कराऊंगा।''
-मनोज सिंह, सीएमओ,जांजगीर

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