खराब हो रहा धान:समितियों में 55 हजार क्विंटल धान की शॉर्टेज, एफआईआर से बचाने प्रभारियों से करा रहे हैं धान की भरपाई

जांजगीर3 महीने पहले
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खरीदी के बाद उठाव नहीं होने से समितियों मंे धान का उठाव। - Dainik Bhaskar
खरीदी के बाद उठाव नहीं होने से समितियों मंे धान का उठाव।

पिछले साल समर्थन मूल्य पर खरीदे गए धान का निराकरण अभी तक न तो समितियों से हो सका है और न ही संग्रहण केंद्रों से। जिले की समितियों में अभी भी 33 हजार क्विंटल धान विभागीय अधिकारियों को रिकॉर्ड में दिख रहा है, लेकिन सच्चाई यह है कि किसी भी समिति में एक दाना धान शेष नहीं है। फिर भी जिला सहकारी केंद्रीय बैंक के अधिकारी इस कोशिश में लगे हुए हैं कि किसी भी तरह खरीदी केंद्र प्रभारियों से धान मिलर्स को दिलाएं व उसके बदले मिलर्स एफसीआई को चावल दे दे।

ऐसा करके अपने लोगों को एफआईआर की प्रक्रिया से बचाने का प्रयास किया जा रहा है। पिछले साल समर्थन मूल्य पर धान बेचने के लिए 1 लाख 88 हजार 173 किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इन किसानों ने 2 लाख 20 हजार 619.53 हेक्टेयर जमीन पर धान की फसल लगाई थी। जिले के 231 केंद्रों में 79 लाख 83 हजार 986 क्विंटल धान की खरीदी समर्थन मूल्य पर की गई थी। वैसे तो खरीदे गए धान का उठाव 72 घंटे मेें करने का दावा किया जाता है, किंतु इस वर्ष अभी तक धान का उठाव नहीं हो पाया है।

समितियों में धान का अंतिम मिलान का काम भी सितंबर में पूरा हो जाता है, किंतु इस बार यह काम भी नहीं हो सका है। उठाव नहीं होने के कारण खरीदी प्रभारियों ने या तो धान कहीं सुरक्षित जगह में रखवा दिया या फिर मिलर्स को बेच दिया। जिसकी वजह से समितियों में अभी भी 55 हजार क्विंटल धान का शॉर्टेज दिख रहा है। इसमें से अभी तक 22 हजार क्विंटल धान वापस करने के लिए समितियों से सहमति बनी है। फिर भी 33 हजार क्विंटल धान की समस्या बनी हुई है।

एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन हुआ शुरू
खरीफ विपणन वर्ष 2021-22 में समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का की खरीदी करने, खेती करने वाले किसानों को समर्थन मूल्य पर धान एवं मक्का विक्रय करने के लिए ‘‘एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराना आवश्यक होगा। इसमें किसानों के धारित भूमि एवं बोएं गए फसलों के रकबा सत्यापन के लिए भुइयां पोर्टल से लिंक किया गया है।

3 लाख क्विंटल संग्रहण केंद्रों मेंं हो रहा खराब
जिले के संग्रहण केंद्रों में रखे धान भी खराब हो रहे हैं। अभी सक्ती, डभरा, जांजगीर, अकलतरा के संग्रहण केंद्रों में करीब 3 लाख क्विंटल धान सड़ रहा है। खाद्य विभाग के अधिकारियों द्वारा मिलर्स पर धान का उठाव के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसके बावजूद समितियों से धान की उठाव में अब तक कोई तेजी नहीं आ पाई है।

उठाव के लिए ये हैं शर्ते
प्रतिवर्ष धान खरीदी के बाद उसे उठाव के लिए परिवहनकर्ता को टीओ (परिवहन आदेश) मिलने के बाद 72 घंटे के अंदर परिवहन करना अनिवार्य होता है, अन्यथा मार्कफेड को ये अधिकार रहता है कि किसी अन्य परिवहनकर्ता से परिवहन कराकर अंतर की राशि परिवहनकर्ता से वसूल कर सकेगा और संबंधित ट्रांसपोर्टर को अगामी वर्षों के लिए काली सूची में दर्ज किया जाएगा।

22 हजार क्विंटल की हो चुकी है भरपाई
जिले में अभी 55 हजार क्विंटल धान का शॉर्टेज दिख रहा है। खरीदी प्रभारियों से धान मिलर्स को दिलाया जा रहा है। इसके तहत 22 हजार क्विंटल धान का समायोजन हो गया है, शेष 33 हजार क्विंटल धान के लिए प्रयास किया जा रहा है। फिलहाल धान का निराकरण करना प्राथमिकता है, इसके बाद भी धान नहीं देने वालों पर एफआईआर कराने की प्रक्रिया की जाएगी।’’
-अश्वनी पांडेय, नोडल अधिकारी, जिला सहकारी केंद्रीय बैंक, जांजगीर

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