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गड़बड़ी की आशंका:हाइवे का ऐसा घटिया निर्माण: सक्ती से मसनिया तक 8 किलोमीटर लंबी सड़क पर आ गई हैं 15 से ज्यादा दरारें

जांजगीर2 दिन पहले
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  • 834 करोड़ रुपए के एनएच पर जगह-जगह पड़ने लगी दरारें, अधिकारियों का कुतर्क: दरारें दुरूस्त होने पर ही लेंगे हैंडओवर

बिलासपुर से रेंगालपाली तक 834 करोड़ रुपए की लागत से बन रही हाइवे पर अभी से दरारें पड़ने लगी है। गुरुवार को दैनिक भास्कर की टीम ने सक्ती से मसानिया कला तक सड़क की पड़ताल की। टीम को 8 किलोमीटर लंबी इस सड़क पर 15 से ज्यादा जगहों पर छोटी-बड़ी दरारें मिली। नए सिरे से सड़क खोद कर काम न करना पड़े, इसलिए कुछ दरारों पर ठेकेदार ने कांक्रीट और डामर की परत तक चढ़ा दी है।

टीम को सड़क पर प्रत्येक 6 से 8 सौ मीटर की दूरी पर एक दरार मिली। मसनियाकला से 3 किमी दूर सड़क के बीच दरार पड़ने से एक हिस्सा धंसने लगा है। सड़क पर सक्ती से करीब आधा किमी दूरी पर ठेकेदार ने दरारों को हल्की खुदाई कर कांक्रीट के टांके लगाए हैं, तो वहीं सड़क पर आगे पतली और रस्सी नुमा दरारों पर डामर की पढ़त चढ़ा दी गई है। हैरानी की बात यह है कि विभाग के इंजीनियरों द्वारा तैयार 834 करोड़ रुपए के इस्टीमेट और सतत मॉनिटरिंग के बावजूद पड़ने वाली इन दरारों को विभाग हल्के ढंग से ले रहा है। विभाग के अफसरों का कहना है कि सड़क अबतक हैंडओवर नहीं हुई, शेष काम पूरा होेने के बाद बारीकी से सड़क की जांच की जाएगी। जांच रिपोर्ट मापदंडों और एग्रीमेंट के अनुरूप होने पर ही हैंडओवर ली लाएगी। सड़क हैंडओवर लेेने के बाद अगले 3 से 5 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदार की होने की बात पर अफसर अपना बचाव कर रहे हैं।

पैकेज वन और थ्री के हिस्से में भी पड़ रही दरारें
इसी तरह बिलासपुर से बनारी, मसानिया कला से रेंगालपाली तक पैकेज वन और थ्री फेस पर भी कुछ जगहों पर सड़क पर दरारें दिखाई दे रही है। जिन्हें सड़क निर्माण के साथ-साथ विभाग के अफसर दुरूस्त कराने की बात कह रहे हैं। इन हिस्सों में अन्य कमियों को भी जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश ठेकेदारों को दिए गए हैं।

सड़क पर दिख रही है दरारें, जिम्मेदार विभाग के ईई निर्माण को बता रहे ठीक
पूरा काम बिलासपुर डिवीजन की निगरानी में हो रहा है। बिलासपुर से रेंगालपाली तक तीनों पैकेज की सड़क पर कांक्रीट बिछाने से पहले बेस पर वाटरिंग, रोलिंग और कम्पैक्शन जैसे मापदंडों की मॉनिटरिंग करने की जिम्मेदारी क्षेत्रवार एसडीओ और एसडीओ की रिपोर्ट आदि की मॉनिटरिंग डिवीजन के ईई वाईके सोनकर को करनी थी। जब दैनिक भास्कर की टीम ने एनएच पर कम समय में आई दरारों की वजह जानने के लिए ईई वाइके सोनकर को कॉल किया, तो उन्होंने सवाल सुनते ही ठीक है, कहकर कॉल कट कर दिया।

एक्सपर्ट व्यू: बेस पर कम्पैक्शन का काम ठीक तरह से नहीं किए जाने से आती है इस प्रकार की परेशानी
^ऐसी स्थिति बेस पर कम्पैक्शन का काम ठीक तरह से नहीं होने के कारण आती है। आबादी और पहाड़ी इलाकों को छोड़कर पूरी सड़क पर पानी निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होना भी एक बड़ा कारण है। दरअसल बारिश के दिनों में पानी सड़क के तह तक पहुंचता है, जिन हिस्सों में कम्पैक्सन कमजोर होता है, वहां नीचे नमी और ऊपर ट्रैफिक के लोड से सड़कें बैठने लगती है, कुछ हिस्सों में दरारें भी आ जाती है।''
जेके दास, रिटायर्ड सिविल इंजीनियर

सीधी बात; बीएन खुंटे, एसडीओ पैकेज वन बारिश के पानी के कारण हाइवे पर बनी दरारें
एनएच पर अभी परिवहन पूरी क्षमता के साथ शुरू भी नहीं हुआ और जगह-जगह दरारें पड़ने लगी?

- तीन पैकेज में काम हो रहा है, आप कहां कि बात कर रहे हैं।
सक्ती से मसनियाकला तक कई दरारें पड़ताल में मिली है, लालखदान और बनारी के बीच ऐसी ही स्थिति है?
- अभी सड़क हैंडओवर नहीं हुई है, जहां कमी है वहां ठेकेदार मरम्मत कर रहा है। पूरी सड़क दुरूस्त होने पर ही हैंडओवर लेंगे।
सामान्य टांके लगाने से क्या सड़क लंबे समय तक टिक सकेगी?
- जरूरी पड़ी तो ठेकेदार उन हिस्सों को खोदकर नए सिरे से बनाएगा, इसलिए परेशानी की बात नहीं है।
दक्ष इंजीनियरों ने एक पैकेज के लिए ढाई से तीन सौ करोड़ का प्रस्ताव बनाया फिर क्यों दरारें पड़ी?
- बारिश का पानी सड़क से बहकर नीचे चला जाता है, ऊपर लोड पड़ने पर ऐसी समस्या होती ही है, कुछ जगहों पर कम्पैक्शन भी वजह हो सकती है।

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