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प्रदर्शन से मुद्दा गायब :दो खेमे में बंट गए सीएम और विस अध्यक्ष समर्थक, चौक पर सार्वजनिक हुई गुटबाजी

जांजगीर16 दिन पहले
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  • प्रदर्शन के दौरान भूल गए कोरोना के खतरे को
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जिले के बड़े नेता भले ही सार्वजनिक मंच से एकता का प्रदर्शन और दावा करें कि उनके बीच कहीं कोई वैमनस्य नहीं है और न ही पार्टी में कोई गुटबाजी है, किंतु सच्चाई यह है कि जिले के कांग्रेसी स्पष्ट रूप से तीन गुटों में बंटते जा रहे हैं। विस अध्यक्ष डॉ. महंत का गृह जिला होने के कारण उनके समर्थक पहले से हैं। सीएम भूपेश बघेल के भी समर्थक बड़ी संख्या में खड़े हो गए हैं। प्रदेश के एक और कद्दावर नेता के समर्थकों का भी तीसरा गुट बन रहा है पर अभी यह गुट परदे के अंदर ही है। कांग्रेस की गुटबाजी सोमवार को सामने आ ही गई। जब सीएम और विस अध्यक्ष के समर्थक आपस में ही उलझ गए और चौक में नेताओं के समर्थन में नारेबाजी करने लगे।
सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई बढ़ोतरी के विरोध में साइकिल रैली निकाली गई। रैली नैला से मुख्य मार्ग होते हुए कचहरी चौक पहुंची। रास्ते भर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का द्वेष सामने नहीं आया पर कचहरी चौक में लगे एक फ्लैक्स में नेताओं के फोटो को देखने के बाद सुगबुगाहट होने लगी। यह फ्लैक्स पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ ने बनवाया था। प्रदेश के बड़े नेताओं से लेकर कार्यकर्ताओं तक के फोटो थे। सीएम भूपेश बघेल, पीसीसी चीफ मोहन मरकाम, कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत, विधायक रामकुमार यादव के अलावा अन्य लोग के भी फोटो थे। नीचे में जिपं के पूर्व उपाध्यक्ष अजीत साहू के अलावा जिलाध्यक्ष चौलेश्वर चंद्राकर के फोटो लगे थे पर इसमें विस अध्यक्ष डॉ. महंत का फोटो नहीं होना महंत समर्थकों को नागवार गुजरा। महंत समर्थकों ने प्रभारी अर्जुन तिवारी से सवाल करना शुरू कर दिया। देखते ही देखते महंत समर्थक गुस्सा गए। 
विराेध बढ़ता गया और बात झूमाझटकी तक पहुंची
कचहरी चौक पर साइकिल रैली के बाद एसडीएम को ज्ञापन सौंपने का कार्यक्रम था। इससे पहले ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुट सार्वजनिक हो गया। यहां महंत समर्थकों ने अपने नेता का विरोध समझकर उनके समर्थन में नारेबाजी शुरू कर दी। एक तरफ से नारेबाजी होने पर सीएम के समर्थक युवा भी मुखर हो गए। दोनों ओर से अपने-अपने नेताओं के समर्थन में खूब नारेबाजी हुई और स्थित झूमाझटकी तक पहुंच गई। इसके बाद कुछ नेता सर्किट हाउस चले गए। 

संवैधानिक पद होने के कारण नहीं लगाया फोटो
जिला कांग्रेस कमेटी के संगठन से जुड़े नेताओं ने बताया कि विस अध्यक्ष का पद संवैधानिक है, इसलिए प्रोटोकाल के तहत उनका फोटो किसी धरना, प्रदर्शन, आंदोलन में नहीं लगाया जाना है, इसलिए नहीं लगा था।

कोविड-19 के नियमों का उल्लंघन, धारा 144 भी भूले
कांग्रेसी अपने नेताओं के समर्थन में ऐसे उग्र हो गए कि वे पार्टी की मर्यादा ही भूल गए। प्रदेश में सरकार बनने के बाद कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी पहले भी बैठकों में सार्वजनिक होती रही है, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ जब सड़क पर ही कांग्रेसी लड़ने लगे। इससे पार्टी की फजीहत हुई सो अलग। इस दौरान कांग्रेसियों ने कानून का भी खुलकर उल्लंघन किया। भले ही अनलॉक की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन अभी धारा 144 लागू है। इसके बाद भी इसका उल्लंघन करते हुए साइकिल रैली में लाउड स्पीकर लगाकर बजाते रहे तथा बड़ी संख्या में कचहरी चौक में इकट्‌ठा हो गए। 

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