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कोरोना:समय पर नहीं करा रहे हैं टेस्ट इसलिए हो रही कोरोना से मौत, जिले में अब तक 30 की मौत

जांजगीर7 दिन पहले
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  • डॉक्टर बोले: सतर्क रहने की जरूरत, जांच में अधिक देरी करने पर शरीर को नुकसान पहुंचाता है वायरस

जिले में कोरोना से मरने वालों की संख्या जिले के ही अस्पताल में 31 हो गई है, वहीं दूसरे जिले के अस्पतालों में हुई मौत को भी मिला लें तो यह आंकड़ा चालीस तक पहुंच जाती है। इसका एक बड़ा कारण लोगों की लापरवाही को भी माना जा रहा है, क्योंकि लोगों के मन में यह डर या भ्रम भी बैठ गया है कि यदि सर्दी, बुखार में टेस्ट कराएंगे और पॉजिटिव आ गए तो अस्पताल जाना पड़ेगा। इसी डर व भ्रम के कारण समय पर टेस्ट नहीं करा रहे हैं।

जल्दी टेस्ट कराना ही सही
केस 1.
बलौदा की एक बुजुर्ग महिला को शुगर की बीमारी थी। उन्हें बुखार भी आ रहा था,तब टेस्ट कराने के बजाय लोकल डॉक्टर से उसका इलाज करा रहे थे। फिर डॉक्टर ने उसका टेस्ट कराने कहा तो न केवल वह बुजुर्ग महिला पॉजिटिव पाई गई, बल्कि उसकी बहु काे भी वायरस अपनी पकड़ में ले चुका था। दोनों को रात में भर्ती किया गया। रात में ही बुजुर्ग महिला की मौत हो गई, चूंकि उसकी बहू को किसी प्रकार का लक्षण नहीं था, लेकिन रेंडम जांच में उसे पॉजिटिव बताया गया तो इलाज के बाद वे स्वस्थ भी हो गई है।

केस 2. बलौदा ब्लॉक के ही जावलपुर की एक 35 साल की युवती को प्लास्टिक एनिमिया की बीमारी थी। उसका इलाज जिला अस्पताल में चल रहा था। उसकी तबीयत अधिक बिगड़ने पर उसे कोविड अस्पताल जांच कराने के लिए लाया गया। फीवर क्लीनिक में टेस्ट से पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी। बाद में उसकी रिपोर्ट भी एंटीजन टेस्ट में पॉजिटिव आई।

केस 3. खोखरा के एक अधेड़ को घर में पांच- सात दिनों से सर्दी, खांसी, बुखार आने के बाद भी रखा गया था। तबीयत अधिक खराब होने पर उसे टेस्ट के लिए फीवर क्लीनिक लाया गया। रिपोर्ट पॉजिटिव आई। इन पांच से सात दिनों में बीमारी बढ़ चुकी थी। भर्ती जिस दिन किया गया उसी रात उसकी मौत हो गई।

जिले में सैंपलों की जांच इन माध्यमों से हो रही
आरटीपीसीआर टेस्ट: इसमें वायरस के आरएनए की जांच की जाती है। आरएनए वायरस का जेनेटिक मटीरियल है। इसके जांच करने का तरीका अलग होता है। इसमें नाक एवं गले से स्वाब लिया जाता है। ये टेस्ट लैब में ही किए जाते हैं। रिजल्ट आने में 12 से 16 घंटे का समय लगता है। लेकिन जिले में यह टेस्ट नहीं हो रहा, क्योंकि लैब नहीं है, इसलिए सैंपल लेकर रायगढ़ या रायपुर भेजा जाता है। वहां से रिपोर्ट आने में बहुत समय लग रहा है।
एंटीजन रैपिड टेस्ट: प्राथमिक जांच का आसान तरीका है। नाक से स्वाब लेते हंै। वायरस में पाए जाने वाले एंटीजन का पता चलता है। इसका रिजल्ट आने में 20 मिनट लगता है। अगर टेस्ट पॉजिटिव है तो इसकी विश्वसनीयता 100% है। कुछ मामलों में यह निगेटिव रह सकता है।
ट्रू-नाट मशीन टेस्ट: न्यूक्लिक एम्प्लीफाइड टेस्ट किया जाता है। जांच के लिए नाक या गले से स्वाब लिया जाता है। इसमें वायरस के न्यूक्लिक मटीरियल को ब्रेक कर डीएनए व आरएनए जांचा जाता है।

डरें नहीं टेस्ट कराएं, विलंब से आने पर शरीर में ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है: डॉ. जगत
"कोरोना का टेस्ट कराने से लोग डर रहे हैं, यह ठीक नहीं है। जितनी जल्दी टेस्ट कराएंगे उतनी जल्दी बीमारी की जानकारी होगी, तो समय पर इलाज भी शुरू हो सकता है। देरी करने पर बीमारी फैल जाती है, फिर वह कई अंगों को प्रभावित कर सकती है। बीमारी बढ़ने पर ऑक्सीजन लेवल कम हो जाती है। शुगर व अन्य बीमारी वालों की इम्युनिटी भी कमजोर होती है, इसलिए पहले टेस्ट कराएं तब इलाज से स्वस्थ हो सकते हैं।''
-डॉ. अनिल जगत, एमडी एवं नोडल अधिकारी कोविड

सर्दी समझ घर में रहना मरीज व परिवार के लिए खतरा: डॉ. पंडा
"आम लोगाें को सर्दी,खांसी या बुखार के लक्षण आने पर डाक्टर के पास जाने या कोरोना की जांच कराने से नही डरना चाहिए। सामान्य सर्दी ,खांसी अपने आप ठीक हो जाएगी, ऐसा सोच कर इलाज नहीं कराने से वे अपने अलावा अपने परिजनों की जान खतरे में डालते हैं। यदि लक्षण आने के तीन दिनों के अंदर कोरोना जांच करवा के दवाइयां ली जाएं तो मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। इसलिए जांच कराने से बिल्कुल नही डरना चाहिए ।''

-डॉ. आरके पांडा, पल्मोनरी मेडिसिन विशेषज्ञ, डॉ.बीआर अंबेडकर स्मृति अस्पताल

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