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कोरोना इफेक्ट:नगर में कहींं नहीं बिठाई गई मूर्ति, घाटे के डर से कलर भी नहीं किया, दो मूर्तियां ही बिकी

राहौद5 दिन पहले
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  • उम्मीद थी नवरात्र में बिकेंगी मूर्ति, ऑर्डर नहीं मिले तो प्रतिमाओं में चूना लगाकर छोड़ा

पूर्णेंदु तिवारी | शारदीय नवरात्र में ही मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर सार्वजनिक पूजा जिले में की जाती है, गणेश पूजा में भी मूर्ति तो बनाई पर बिकी नहीं। उम्मीद थी कि शारदीय नवरात्र तक कोरोना से उबर जाएंगे। परिस्थितियां बदल जाएंगी तो शायद व्यापार हो जाएगा। इसी आशा के साथ मूर्तियों को आकार देना शुरू भी किया मूर्तिकारों ने पर कोरोना दूर नहीं हुआ। समय से पहले इसके लिए गाइड लाइन जारी नहीं हुई, इसलिए दुर्गा स्थापित करने वाली समितियों के पदाधिकारियों ने भी अप्रत्याशित रूप से मूर्ति बनवाने रूचि नहीं ली। फिर भी नगर के मूर्तिकारों ने मूर्तियों को गढ़ा तो जरूर पर ऑर्डर नहीं मिलने के कारण उसमें रंग रोगन व सजावट किया ही नहीं। केवल दो मूर्तियां ही बिकी इसलिए बाकी मूर्तियों को चूना लगाकर अथवा आकार देकर ही छोड़ दिया।
कोरोना महामारी के चलते ज्यादातर लोग आर्थिक समस्या समस्याओं से जूझ रहे हैं। देश-प्रदेश के मूर्तिकार भी उनमें शामिल हैं। इस साल कोरोना से बचाव के लिए गणेश पंडाल न लगाने की प्रशासनिक मंजूरी नहीं थी, जिसके कारण मूर्तिकारों को नुकसान झेलना पड़ा। उम्मीद थी कि मां दुर्गा मूर्तिकारों को आर्थिक संकट से उबारेंगी। क्षेत्र में नवरात्रि का पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। नवरात्रि का पर्व नजदीक आते ही मूर्तिकार मां दुर्गा की प्रतिमा के निर्माण कार्य में जुट गए। माता की मूर्ति बनाई गई। पर इस बार काेरोना की वजह से शासन के बनाए नियम पर लोगों को कोरोना से मूर्ति स्थापना पर ध्यान नहीं दिया। मूर्तिकार मदन लाल देवांगन , गणपति लाल देवांगन ने बताया कि वे हर वर्ष माता की मूर्तियां बनाते हैं। भगवान गणेश की मूर्तियों के निर्माण के साथ ही मां दुर्गा की मूर्तियों का निर्माण भी शुरू हो गया था। गणेशजी की मूर्ति कुछ हद तक बिक गई, क्योंकि लोगो ने घरों में मूर्ति स्थापना की थी जिससे खर्च चल गया। उनका कहना है उम्मीद थी कि समय के साथ काेरोना का प्रभाव कम हो जाएगा इसलिए मूर्ति निर्माण किया। लेकिन मांग नहीं होने के कारण साज सज्जा पर खर्च करने की हिम्मत नहीं हुई। इसलिए खाली मूर्ति का निर्माण कर रखा है।

इस साल डिमांड ही नहीं
मूर्तिकार मदन लाल देवांगन , गणपति लाल देवांगन के अनुसार 25 वर्षों से मूर्ति निर्माण का कार्य कर रहे हैं परंतु अभी तक ऐसा नहीं होता था कि मूर्ति न बिक, लेकिन इस साल डिमांड ही नहीं है, केवल दो मूर्तियां ही इस वर्ष बिकी है। इस वर्ष के हालात को देखते हुए 6 से 5 फीट के मूर्ति का निर्माण किया इसमें मात्र 20 मूर्ति ही बनाई थी। जिसमें केवल दो मूर्ति ही बिक पाई।
पारंपरिक व्यवसाय भी बंद, नहीं मिल रहा धागा
मूर्तिकार देवांगन बंधुओं ने बताया कि वे लोग कपड़े बुनने का काम भी करते हैं। यह पारंपरिक काम भी 4 माह से अधिक समय से बंद है। मार्च माह में लॉकडाउन से अभी तक धागा नहीं आया है, जिसकी वजह से काम बंद है। 6लोगों का परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा है । खेती का काम भी नहीं है, मूर्ति निर्माण के काम में 4 माह से अधिक समय लगता है।

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