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परेशानी:अब तक तय नहीं हुई मेडिकल वेस्ट उठाने की दर, इसलिए रोज नहीं उठता कोविड कचरा

जांजगीरएक महीने पहले
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कोविड 19 को लगभग सात माह हो रहे हैं, लेकिन इन सात महीनों में कोविड अस्पतालों व कोविड केयर सेंटर्स से निकलने वाले मेडिकल कचरा, मरीजों के खाए डिस्पोजल, उपयोग किए गए पीपीई किट, गॉगल्स व अन्य मेडिकल कचरा का नियमित उठाव जिले से नहीं हो पा रहा है, क्योंकि सरकार अभी इन मेडिकल वेस्ट को उठाने के लिए दर ही नहीं तय कर पाई है, इसलिए नियमित कोई कंपनी नहीं है जो इसका उठाव करे। जिले से मेडिकल कचरा का उठाव मौखिक बात के आधार पर हो रहा है, वह भी जिस दिन उठाने वाले की मर्जी हो उस दिन वह गाड़ी भेज देता है, तब अन्यथा कचरा अस्पतालों के आसपास ही बिखरा रहता है। जिले में एक एक्सक्लूसिव कोविड अस्पताल के अलावा 9 अन्य कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं। इन कोविड सेंटर्स में ही मरीजों का इलाज पहले हो रहा था, जिसके कारण 1058 बेड भी कम हो रहे थे। मरीजों की संख्या सभी सेंटर्स में अधिक थी तब मेडिकल कचरा और अधिक निकलता था। तब भी कचरा का निराकरण रोज नहीं हो पाता था। अब होम आइसोलेशन की सुविधा मिलने पर 20 अक्टूबर की स्थिति में मात्र 291 बेड में ही मरीज इलाज करा रहे हैं, जिसके कारण767 बेड खाली है। इस वजह से मेडिकल कचरा कम निकल रहा है। तीन सेंटर्स को छोड़कर बाकी सात सेंटर्स में मरीज हैं, भले ही कम ही हैं, लेकिन यहां जाकर इलाज करने वाली टीम को पीपीई किट, गॉगल्स पहनना अनिवार्य ही है। एक बार यूज करने के बाद उसे छोड़ना पड़ता है, गॉगल्स बस का रियूज किया जा सकता है। उपयोग के बाद पीपीई किट को जहां तहां फेंका जा रहा है। लेकिन नियमित उठाव नहीं हो रहा है।

सीधी बात
डॉ.एसआर बंजारे, सीएमएचओ

सवाल - जिले के कोविड केयर सेंटर के मेडिकल वेस्ट का निपटान कैसे किया जा रहा है
- मेडिकल कचरा उठाने के लिए बिलासपुर से गाड़ी आती है।
सवाल -नियमित रूप से उठाव नहीं होने के कारण कचरा बिखरा रहता है
- वहां से गाड़ी अल्टरनेट आती है, हमने इन्वारोकेयर को कोविड केयर सेंटर की सूची दे दी है, जब गाड़ी आती है, हमें सूचित किया जाता है, फिर मेडिकल वेस्ट का उठाव होता है।
सवाल -नियमित रूप से उठाव क्यों नहीं हो रहा है, पीपीई किट वगैरह पड़े रहते हैं खुले में
- अभी तक मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए दर का निर्धारण नहीं हो पाया है, चंूकि यह अनिवार्य सेवा है, इसलिए अभी व्यवस्था के तहत काम कराया जा रहा है। दर निर्धारित नहीं होने के कारण भुगतान में भी समस्या आती है।
सवाल -अब तक निर्धारण क्यों नहीं हो पाया है
- सरकार ने पहले दर की थी, जिसमे सामंजस्य नहीं बना। इसके बाद संभाग के कमिश्नर को अधिकृत किया है, दर निर्धारण हमारे बस में नहीं है।

होम आइसोलेशन मरीज ज्यादा इसलिए वहां भी सफाई नहीं
होम आइसोलेशन में रहने वालों को भी कोविड के प्रोटोकाल का पालन करना है, नियमानुसार घरों से संबंधित क्षेत्र के नगरीय निकायों को वेस्ट मटेरियल को उठाना है, पर यह नहीं हो रहा है। होम आइसोलेशन में रहने वालों की संख्या कोविड केयर सेंटर में भर्ती मरीजों से 7 गुना अधिक है। राज्य कंट्राेल एंड कमांड सेंटर के डेटा के अनुसार हजार से ज्यादा मरीज होम आइसोलेशन में हैं। डॉक्टर्स के अनुसार होम आइसोलेशन में रहने वाले सभी को कोविड पॉजिटिव मरीज माना जाता है। इसलिए वे बर्तन, कपड़ा आदि का उपयोग स्वयं करते हैं और ये वाशेबल है, इसलिए वहां से कोई वेस्ट मटेरियल निकलने की संभावना कम है।

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