पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कोरेानाकाल में ऐसी है हमारी व्यवस्था:जिले में है मात्र दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट, नौ सीएचसी में बच्चों का इलाज करने के लिए नहीं है एक भी डॉक्टर

जांजगीर18 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
जिला अस्पताल का चाइल्ड वार्ड। - Dainik Bhaskar
जिला अस्पताल का चाइल्ड वार्ड।
  • जिले भर में बच्चों के लिए 6 प्राइवेट अस्पताल, 0-5 साल के नौनिहाल हैं 1,96,145

जिले में अभी कोरोना का कहर कम हुआ है, फिर भी एक्टिव केस अभी भी 3000 से अधिक हैं। दूसरी लहर के खत्म होने के बाद अब यह आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर भी आ सकती है। और तीसरी लहर सर्वाधिक प्रभाव बच्चों पर डाल सकती है। हालांकि जिले के डॉक्टर्स इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखते हैं। उनका कहना है कि यदि तीसरी लहर आई भी तो यह जरूरी नहीं कि वह केवल बच्चों को ही प्रभावित करेगी। इससे बड़े भी प्रभावित हो सकते हैं। जिला अस्पताल में केवल दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं। इसके अलावा जिले के नौ सीएचसी में कहीं भी बच्चों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं हैं।

फिलहाल बड़ों के इलाज के लिए तो जिले में पिछले साल भर में अपने स्तर पर व्यवस्था की जा रही है। लेकिन बच्चों के भी संक्रमित होने की आशंका के बीच हमारे जिले में पर्याप्त व्यवस्था का दावा विभागीय अधिकारी कर रहे हैं, पर सच्चाई यह है कि 17 लाख से अधिक आबादी वाले जिला में शून्य से लेकर 5 साल तक के बच्चों की संख्या 1 लाख 96 हजार 145 है। लेकिन व्यवस्था के नाम पर सरकारी अस्पताल में केवल दो चाइल्ड स्पेशलिस्ट हैं व छह प्राइवेट डॉक्टर ही हैैं। कोरोना की तीसरी लहर बच्चों के लिए नुकसानदायक होगी इसकी आशंका है। इसीलिए नवजात शिशु से लेकर पांच साल तक के बच्चों के वैक्सीनेशन पर फोकस किया जा रहा है। क्योंकि वैक्सीनेशन से बच्चों में इम्यूनिटि बढ़ेगी व बीमारी से लड़ने की क्षमता भी होगी। निमोनिया से भी बच्चों को खतरा रहता है, इसलिए इससे भी बचाने के लिए न्यूमोकोल की 35 00 डोज जिले में आ गई है। संभवत: मंगलवार के टीकाकरण से इसकी शुरुआत हो सकती है।

एक नजर में जानिए, बच्चों के कितने डॉक्टर जिले मेें

  • जिला अस्पताल में डॉ. हरीश पटेल, डॉ. विजय श्रीवास्तव
  • प्राइवेट अस्पताल में जांजगीर डॉ. आरके प्रसाद, डॉ. पीके नरुला, चांपा में डॉ. आरएस सोनी, डॉ. नरेश देवांगन, बलौदा में डॉ. डीके जैन,सक्ती में डॉ. राजेश अग्रवाल
  • डीएच में एसएनसीयू वार्ड जिला अस्पताल में नवजात शिशुओं के लिए एक एसएनसीयू वार्ड बनाया गया है। इस वार्ड में शारीरिक रूप से कमजोर नवजात शिशुओं को रखा जाता है। यहां लगभग दर्जन भर से अधिक बेबी वार्मर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर व अन्य सुविधाएं हैं। यहां भी दो वार्ड बनाए गए हैं, एक साइड में काेराेना संक्रमित महिलाओं से पैदा हुए बच्चों को रखा जाता है दूसरी ओर नान कोविड बच्चे रखे जा रहे हैं।

सीधी बात; डॉ. हरीश पटेल, शिशु रोग विशेषज्ञ
विदेश में बड़ों को टीका लग गया है, इसलिए बच्चों पर डर, हमारे यहां तो बड़ों को ही नहीं लगा

कोराेना की तीसरी लहर बच्चों को प्रभावित करेगी ऐसा कहा जा रहा है, ऐसा होगा क्या
कोरोना की तीसरी लहर आएगी कि नहीं यह कह पाना कठिन है। लेकिन यदि आती है तो यह केवल बच्चों को प्रभावित करेगी ऐसा नहीं है। इससे बड़े भी प्रभावित होंगे।

बड़ों पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा
देखिए, विदेशों में बड़ों को टीके लगाए जा चुके हैं, वहां बच्चे टीका से बच गए हैं, इसलिए उन देशों में बच्चों को प्रभावित करने की आशंका है, हमारे देश में तो बड़ों को ही टीका नहीं लग पाया है तो इससे केवल बच्चे संक्रमित होंगे ऐसा नहीं है। इसलिए बड़ों को वैक्सीनेशन जरूर कराना चाहिए।

बच्चे कैसे प्रभावित नहीं होंगे
कमजोर बच्चों को बीमारी जल्दी जकड़ती है। 5से 25 आयु वर्ग के बच्चों में वैसे भी इम्यूनिटि अच्छी होती है, वे मजबूत होते हैं, यदि कोविड हुआ भी तो वे बड़ों की तुलना में जल्दी स्वस्थ हो जाएंगे।

यदि ऐसे बच्चों को भर्ती करने की नौबत आई तो क्या होगा
जिले में कोविड केयर सेंटर बनाए गए हैं। इसलिए बेड, ऑक्सीजन बेड, कंसंट्रेटर, वेंटिलेटर की कमी नहीं होगी। बस मशीनों में लगने वाले मास्क को बच्चों के हिसाब से बदलना पड़ेगा। बाकी कोविड के इलाज के लिए तो अन्य डॉक्टर्स को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है।

डॉ. हरीश पटेल के अनुसार जंक फूड खाने से बच्चों में बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, इसलिए इससे बचाएं। बच्चों को जहां तक संभव हो घर का बना हुआ खाना व नाश्ता खिलाएं। दाल, चावल, रोटी, हरी सब्जियां अधिक खिलाएं। इनसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, विटामिन मिलेगा। पनीर, दूध, अंडा, फल भी खिलाएं।

खबरें और भी हैं...