परेशानी से जूझ रहे हैं प्रभारी:तीन महीनों बाद भी खरीदी  केंद्रों में पड़ा है हजारों क्विंटल धान

सक्ती6 महीने पहले
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खरीदी केंद्र में ऐसे रखा है धान । - Dainik Bhaskar
खरीदी केंद्र में ऐसे रखा है धान ।
  • सेंटरों में प्रबंधकों की परेशानी देखने नहीं पहुंच रहे कोई अफसर, बारिश और सूखत से नुकसान की आशंका

धान खरीदी के कार्य को पूर्ण हुए तीन माह बीत जाने के बाद भी खरीदी केंद्रों में रखे धान का उठाव नहीं पाया है। धान खरीदी कार्य के दौरान अधिकारियों से लेकर नेता प्रतिदिन दौरे पर जाते और कमियों पर फटकार लगाना दिशा निर्देश देना आम बात थी लेकिन अब आलम यह है कि इन केंद्रों में झांकने वाला एक अधिकारी नहीं है। जिसका खामियाजा धान खरीदी केंद्र के प्रभारियों को भुगतना पड़ रहा है। खरीदी के 72 घंटों के अंदर धान का उठाव करने का दावा किया गया था। लेकिन तीन माह बाद भी उठाव नहीं हो पाया है।

प्रभारियों पर आर्थिक बोझ, धान खा रहे चूहे

प्रभारियों ने बताया कि शासन से जितना पैसा प्राप्त नहीं होता है उससे अधिक राशि देखरेख में खर्च हो रही है। तीन माह बाद भी उन्हें खरीदी केंद्रों की रखवाली करनी पड़ रही है। उठाव नहीं होने के कारण सक्ती क्षेत्र में लाखों का धान खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। लगातार देखरेख करने के लिए दिन रात चैकीदार की व्यवस्था की गई है जिसका खर्च अलग से बढ़ गया है। धान की बोरियों को अब चूहे कुतरने लगे हैं। ’

प्रभारियों के सामने यह है चुनौती

समिति प्रभारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कि वे शासन द्वारा खरीदे गए धान की रखवाली करें या किसानों को केसीसी बांटे या फिर धान की फसल के लिए बीज ,खाद का वितरण करें। प्रभारियों के सामने भारी परेशानी एवं आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर कोरोना का डर भी समिति प्रभारियों को सता रहा है। 17 परसेंट नमी में धान को लिया गया अब सूखकर कर 8 में आ गया है।

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