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मौसम सुहाना:2 घंटे मूसलाधार बारिश, तापमान में 3 डिग्री की गिरावट; नजारा भी मानसून जैसा

जशपुरनगर14 दिन पहले
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प्री मानसून की बारिश सोमवार को जमकर हुई। जिले के पाट इलाकों में दोपहर दो बजे से बारिश शुरू हो गई थी। वहीं शहर में दोपहर 3:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक तेज बारिश हुई। बारिश के बीच आसमानी गर्जना भी खूब हुई। हालांकि शहरी इलाके में इससे कोई नुकसान नहीं हुआ।

इस बारिश के बाद लोगों को गर्मी से पूरी तरह से राहत मिल गई है। शहर का मौसम सुहाना हो गया है। सोमवार को अधिकतम तामपान का पारा 31 डिग्री तक गिर गया। तेज मूसलाधार बारिश के बाद हर तरफ बरसात जैसा नजारा देखने को मिला। शहर के मेन रोड पर जगह-जगह पानी जमा था। इसके अलावा कोतवाली से रेस्ट हाउस जाने वाली सड़क पानी में डूब गई थी। डीएफओ कार्यालय से कलेक्टोरेट जाने वाली गली में पुल के नाली के पुल के नीचे का मिट्‌टी बह जाने से यह मार्ग अवरूद्ध हो गया। मुख्य सड़क पर जगह-जगह पेड़ों की टहनियां टूटकर गिरी हुई नजर आई। शहर के सभी नालों में पर्याप्त पानी भर गया।

कई जगहों पर जाम नालियों से पानी ओवरफ्लो होकर सड़क पर बह रहा था। इन अव्यवस्थाओं का लोगों पर असर नहीं पड़ा क्योंकि लॉकडाउन के कारण अभी सभी लोग अपने-अपने घरों पर हैं। जिले की बगीचा स्थिति डोंड़की नदी, ईब नदी व बांकी नदी में भी पानी उतर आया है। शहर के मुख्य तालाब में फिर से पानी भर गया है। खेतों में पानी जमा हो चुका है। शहरवासियों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है। अब कमरे का बाहर का तापमान हल्का ठंडा है और कमरे के भीतर भी पंखे से काम चल जा रहा है।

आम के लिए फायदेमंद यह बारिश
उद्यानिकी के अधिकारियों के मुताबिक सोमवार काे हुई बारिश आम के लिए काफी फायदेमंद है। अब आम का ग्रोथ तेजी से होगा और देसी आम बरसात से पहले बाजार में अाने शुरू हो जाएंगे। सब्जियों को किसी तरह से केाई नुकसान नहीं पहुंचा है। यदि आगे और बारिश होती है या फिर ओले गिरते हैं तो टमाटर, लौकी, बैगन सहित अन्य सब्जियों को नुकसान हो सकता है।

यह बारिश कहलाती है काल बैशाखी
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस बारिश को काल बैशाखी के नाम से भी जाना जाता है। बैशाख में होने वाली इस बारिश में बारिश के साथ-साथ आंधी व वज्रपात की घटनाएं होती है। कुछ समय तक होने वाली यह बारिश तबाही लेकर आती है। जशपुर जिले में भी वज्रपात से तीन लोगों की मौत की घटना सोमवार को हुई। काल बैशाखी का असर अप्रैल से अंत से मई के पहले सप्ताह तक रहता है। मुख्य रूप से यह ओडिसा, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम सहित पूर्वात्तर भारत के राज्यों के साथ-साथ बांग्लादेश के कई राज्यों को प्रभावित करता है। काल बैशाखी में कई बार हवाओं की रफ्तार इतनी तेज होती है जान माल को भी भारी नुकसान पहुंचता है। इसे प्री मानसून की बारिश भी कहा जाता है।

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