पलायन इफेक्ट:तमिलनाडु की फैक्ट्री में बंधक बने सरगुजा व जशपुर के 250 मजदूर

जशपुर10 दिन पहले
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  • बंधक मजदूरों ने श्रम मंत्री भगत को फोनकर मदद के लिए लगाई गुहार

रोजगार की तलाश में तमिलनाडु गए सरगुजा संभाग के करीब 250 मजदूरों को तमिलनाडु में एक फैक्ट्री मालिक द्वारा बंधक बना लिया गया है और उनसे बंधुआ मजदूर की तरह काम लिया जा रहा है। किसी तरह से मजदूरों ने खाद्यमंत्री अमरजीत भगत से फोन पर संपर्क कर उनसे मदद मांगी। जिसके बाद शासन स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है और श्रम विभाग द्वारा मजदूरों को वापस लाने की प्रक्रिया चल रही है।

जानकारी के अनुसार प्रदेश के खाद्य और श्रम मंत्री अमरजीत भगत को फोन पर शिकायत मिली थी कि सरगुजा और जशपुर जिले के 250 मजदूर तमिलनाडु में फंसे हुए हैं। फंसे हुए एक मजदूर ने मंत्री अमरजीत को फोन करके इसकी शिकायत की थी। शिकायत पर मंत्री ने श्रमायुक्त को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस मजदूर ने मंत्री से शिकायत की थी वह अपने बंधक बनने की जगह के संबंध में भी नही बता पा रहा था।

मंत्री ने प्रशासन के सहयोग से मजदूर का काल ट्रेस कर जानकारी निकाली तो यह तमिलनाडु के सेलम जिले की पाई गई है। पीड़ित मजदूर ने बताया कि ओडिशा के एक दलाल के माध्यम से वे सभी एक फैक्ट्री में काम करने पहुंचे थे। लेकिन फैक्ट्री मालिक ने उन्हें बंद करके रख लिया और बाहर आने जाने पर पाबंदी लगा रखी है। मजदूर ने खाने पीने की तकलीफ होने की जानकारी देते हुए सहायता की गुहार सरकार से लगाई है।

जारी है जिले से पलायन

जशपुर जिले में पलायन व मानव तस्करी एक बड़ी समस्या रही है। शुरू से क्षेत्र के भोले-भाले ग्रामीणों को महानगरों से आकर प्लेसमेंट के दलाल अच्छी जिंदगी का सपना दिखाकर महानगरों में ले जाते हैं और वहां उन्हें मजदूरी के छोटे-मोटे काम में लगा दिया जाता है। एक माह पहले ही कोतवाली पुलिस ने हरियाणा में एक युवती को बरगला कर ले जाने के मामले में झारखंड की एक महिला को गिरफ्तार किया था।

इसके अलावा रोजगारा के अवसरों की कमी की वजह से क्षेत्र के युवक-युवती खुद भी महानगरों की ओर रूख करते हैं। गोवा में मछली के कारोबार में फरसाबहार इलाके के सैकड़ों मजदूर हर साल पलायन करते हैं। कई बार तो समुद्री तूफान में फंस जाने की वजह से उनकी मौत हो जाती है और लाश तक घर नहीं आ पाती है।

जिले से पलायन करने वाले मजदूरों का रिकार्ड नहीं
कोरोनाकाल के दौरान मजदूरों को घर वापसी अभियान में दूसरे प्रदेश में काम करने गए श्रमिकों की जानकारी का अभाव बड़ी समस्या बनी थी। इस परेशानी को देखते हुए हर जिले में पलायन करने वाले मजदूरों का रिकार्ड गांव और जिला स्तर पर रखने के लिए कहा गया था।

पर उसका पालन अब नहीं हो रहा है। दूसरे प्रदेश में पलायन करने वाले मजदूरों का रिकार्ड न ही पंचायत और ना ही जिला स्तर पर अपडेट हो रहा है। लोग बिना जानकारी दिए ही दूसरे प्रदेश में राेजगार की तलाश में निकल जा रहे हैं।

कंपनी में 6 महीने से बने हुए हैं बंधक
खाद्य व श्रम मंत्री अमरजीत भगत के कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार बनाए गए श्रमिक अधिकांश छत्तीसगढ़ के और सभी सरगुजा और जशपुर के हैं। इनमें से कुछ मंत्री अमरजीत भगत के निर्वाचन क्षेत्र सीतापुर के तहत आने वाले बतौली के श्रमिक भी हैं। उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार बालाजी रबर इंडस्ट्रीज के मालिक द्वारा उन्हें पिछले 3-4 महीनों से बंधक बनाकर रखा गया है।

मामले में लगातार अपडेट ले रहे मंत्री अमरजीत

मंत्री अमरजीत भगत लगातार इस मामले में अपडेट ले रहे हैं, ताकि बंधकों को छुड़ाकर जल्द से जल्द वापस लाया जाए। हाल ही में ऐसी ही और घटना हुई थी, जब श्रमिकों को बंधक बनाए जाने की खबर मिली थी। कोरोना काल में भी ऐसे मंत्री अमरजीत भगत की पहल पर छत्तीसगढ़ से बाहर फंसे श्रमिकों वापस लाया गया था। इस मामले में भी वे अफसरों से लगातार उनकी स्थिति की जानकारी फोन के जरिए ले रहे हैं।

मजदूरों को वापस लाने की कार्रवाई चल रही

तमिलनाडु में बंधक बनाए गए मजदूरों को ढूंढ़ लिया गया है। सरगुजा श्रम विभाग के द्वारा श्रमिकों का एक दल वापसी के लिए निकल चुका है। इस दल में जशपुर जिले के दो मजदूर हैं। वहां फंसे मजदूरों में जशपुर जिले से करीब 14 मजदूर बताए जा रहे हैं।''
आजाद पात्रै, जिला श्रम पदाधिकारी।

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