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हाथियों की दहशत:जंगल में घूम रहा 37 हाथियों का दल, अनहोनी के डर से रतजगा कर रहे हैं 10 गांवों के लोग

जशपुर6 दिन पहले
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  • दिन-रात रखवाली कर रहे, पर खेतों में लगी फसलों को हाथियों से बचा नहीं पा रहे ग्रामीण

तपकरा वन परिक्षेत्र में इन दिनों 37 हाथियों का दल घूम रहा है। ग्रामीणों की परेशानी अब बढ़ गई है क्योंकि दल के सभी हाथी अलग-अलग दिशाओं में घूम रहे हैं। रोजाना किसानों की धान की फसल को नुकसान पहुंच रहा है। वहीं हाथियों के डर से ग्रामीणों की रात की नींद उड़ी हुई है। वर्तमान में करीब दस गांव ऐसे हैं जहां हाथियों को बस्ती में घुसने से रोकने के लिए ग्रामीणों को रातभर जगकर पहरेदारी करनी पड़ रही है।

शुक्रवार-शनिवार की रात को विदुरपुर के पास गोतमी और झारखंडी हाथियों के दल का मिलन गारीघाट के जंगल में हुआ था। पर शनिवार-रविवार की रात को इस दल के सभी हाथी अलग-अलग दिशाओं में निकल गए। कुछ हाथी पहले से भी इलाके के जंगल में भटक रहे थे। वन विभाग ने जब अलग-अलग इलाकों में घूम रहे हाथियों की गिनती की तो पता चला कि कुल 37 हाथी एक ही इलाके में हैं पर सभी एक साथ नहीं बल्कि दो-तीन का दल बनाकर घूम रहे हैं। वनकर्मियों का काम चौबीस घंटे का हो गया है। रातभर वन कर्मी हाथियों की लेाकेशन ट्रेस करने में जुटे हुए हैं वहीं दिन में फसल नुकसान का मुआवजा प्रकरण बनाने गांव-गांव घूम रहे हैं। रोजाना हाथियों द्वारा कई खेतों में लगी धान की फसल को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ग्राम टिकलीपारा के ग्रामीण संजय राम का कहना है कि पहले हाथियों के चलने से धान के पौधे नष्ट होते थे। पर अब हाथी इस धान के नन्हे पौधों को खाते हुए भी देखे जाते हैं। इसलिए जंगल से हाथियों का बाहर निकलने का सिलसिला नहीं थम रहा है।

दिन में भी सुनाई दे रही हाथियों की चिंघाड़
इन दिनों भेलवां, टिकलीपारा सहित अन्य प्रभावित गांव में दिन में भी हाथियों की चिंघाड़ सुनाई दे जा रही है। ग्रामीण दिनरात खौफजदा हैं। वन विभाग द्वारा रोजाना गांव में मुनादी कर किसी को भी जंगल ना जाने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा गांव में महुआ शराब बनाने की सख्त मनाही है। क्योंकि महुए की गंध हाथियों को आकर्षित करती है।

इन गांव के ग्रामीण ज्यादा परेशान
हाथियों की मौजूदगी के कारण ग्राम भेलवां, टिकलीपारा, कोनपारा, तुमला, पुराइनबंद, भेजरीढ़ाप, सरकरा, विदुरपुर, गारीघाट, समडमा के ग्रामीण काफी परेशान हैं। हाथी गांव में घुसकर मकान ना तोड़े और लोगों की जान ना जाए इसके लिए इसलिए ग्रामीणों को रातभर जगकर गांव की पहरेदारी करनी पड़ रही है। राेजाना शाम होने से पहले ही ग्रामीणों का हाथी भगाओ दल तैयार हो जाता है। ग्रामीण हाथ में मशाल, टार्च व जलती टायर लेकर गांव की सीमा के बाहर खड़े हो जाते हैं। हाथियों की चिंघाड़ सुनते ही ग्रामीणों में खलबली मच जाती है। पुराइनबंद के ग्रामीण महेश का कहना है कि ग्रामीण मौजूदा हालात में घरों में चैन से नहीं सो रहे हैं। जहां तक प्रयास हो रहा है सुरक्षित स्थानों पर कई परिवार के लोग एक साथ मिलकर रात बिता रहे हैं।

500 मोबाइल पर लगातार लोकेशन की सूचना
हाथियों के सभी दल पर वन विभाग की निगरानी बनी हुई है। विभाग द्वारा वाट्सएप के माध्यम से 5 ग्रुप बनाए गए हैं। इन ग्रुप में लगातार हाथियों का लोकेशन डाला जा रहा है। जिसके माध्यम से लगभग 500 लोगों तक तत्काल सूचना पहुंच रही है। कहीं भी हाथी बस्ती के करीब होता है वनकर्मी तत्काल पहुंचते हैं। फसल नुकसान का आंकलन कर तत्काल मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है। दल अभी इसी इलाके के जंगल में बना रह सकता है।
-अभिनव केशरवानी, रेंजर, तपकरा।

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