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कोरोना का डर:5 महीने बाद खुले आंगनबाड़ी केंद्र पर दिनभर खाली ही रहे

जशपुर2 महीने पहले
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  • पालकों ने कहा: संक्रमण काल में हम बच्चों की जान को जोखिम में नहीं डालेंगे

करीब 5 महीने बाद शासन के निर्देश पर सोमवार को आंगनबाड़ी केंद्र खुले, लेकिन पहले दिन आंगनबाड़ी केंद्रों में बच्चों की चहल-पहल नहीं देखी गई। अधिकांश केंद्र सुनसान रहे। बच्चों को लेने के लिए कार्यकर्ताएं घर-घर भी गई, पर अभिभावकों ने यह कह कर बच्चों को सेंटर भेजने से मना कर दिया कि अभी कोरोना का संक्रमण काफी ज्यादा बढ़ा हुआ है। अभी बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र भेजकर उनकी जान को जोखिम में नहीं डाल सकते हैं। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में भी आंगनबाड़ी केंद्रों की यही स्थिति रही।

बच्चों को गोद में लेकर आए, रेडी टू ईट लिया और चले गए
शहर के सन्ना रोड के आंगनबाड़ी केंद्र में कुछ अभिभावक बच्चों को गोद में लेकर आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को गोद से उतारा ही नहीं। बच्चों के लिए रेडी टू इट का पैकेट लिया और चलते बने। केंद्र की कार्यकर्ता ने बताया कि सुबह से वह और सहायिका घर-घर जाकर बच्चों को केंद्र लाने के लिए अभिभावकों से कह रहे थे इसलिए कुछ लोग बच्चों को गोद में उठाकर केंद्र पहुंचे थे पर उन्होंने बच्चों को केंद्र में बैठने नहीं दिया।

बच्चों के बस का नहीं हर वक्त मास्क लगाए रखना
अभिभावकों का कहना है कि भले ही आंगनबाड़ी केंद्रों में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जाएगा और बच्चों को मास्क लगाकर भेजना है, पर वर्तमान में यह बातें व्यवहारिक नहीं हैं। अभिभावक नरेश दास, चमन राम, किशोर खलखो ने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 5 साल तक के बच्चे जाते हैं। यह हर वक्त मास्क लगाकर बैठे यह कैसे संभव होगा। बच्चे तो मास्क को भी खिलौना समझ कर खेलेंगे।

दिया जाएगा गर्म भोजन
शासन के निर्देश पर आंगनबाड़ी केंद्र पूर्व निर्धारित समय पर खुलेंगे। बच्चों को केंद्रों में रेडी टू इट के अलावा गर्म भोजन देने की भी व्यवस्था पूरी कर ली है। इसके अलावा आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से शिशुवती व गर्भवती माताओं को भी योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा, पर इसका कुशल संचालन बच्चों की उपस्थिति पर निर्भर करता है। यदि बच्चे ही नहीं पहुंचेंगे तो गर्म भोजन किसके लिए तैयार किया जाएगा।

अभिभावकों से सहमति पत्र लेने में हो रही है परेशानी
कई केंद्रों में कार्यकर्ता विभागीय अधिकारियों के निर्देश पर पालकों से आंगनबाड़ी केंद्र के संचालन के लिए सहमति पत्र भी ले रही हैं। हालांकि इसमें भी उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कार्यकर्ताओं ने बताया कि 10 अभिभावकों से मिलने के बाद तीन से चार अभिभावक ही सहमति पत्र पर दस्तखत कर रहे हैं।

केंद्र खुले, उपस्थिति 1 प्रतिशत
"अभी सिर्फ केंद्र ही खुले हैं। बच्चों को केंद्र भेजे जाने के लिए अभिभावकों से संपर्क और उन्हें मोटिवेट करने का काम बीते तीन दिनों से चल रहा है। अभिभावकों पर किसी तरह का दबाव नहीं है। जब तक पालक खुद बच्चों को भेजने के लिए तैयार नहीं होते, बच्चों की उपस्थिति नगन्य ही रहेगी। पहले दिन 1 प्रतिशत ही उपस्थिति रही। केंद्र रोज खुलेंगे, चाहे बच्चे आएं या ना आएं।''
-अजय शर्मा, जिला कार्यक्रम अधिकारी, महिला एवं बाल विकास विभाग।

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