आस्था की परम्परा:शस्त्रपूजा से मां काली के अनुष्ठान की शुरुआत

जशपुर19 दिन पहले
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शस्त्रपूजा में शामिल राजपरिवार के सदस्य व राजपुरोहित। - Dainik Bhaskar
शस्त्रपूजा में शामिल राजपरिवार के सदस्य व राजपुरोहित।
  • देवी मंडपों में हुई कलश स्थापना, माता के मंदिरों में भक्तों की जुटी भीड़

नवरात्र के पहले ही दिन शहर सहित जिले भर के देवी मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटी। जशपुर में रियासतकालीन परंपरा के अनुरूप स्थानीय पक्कीडांड़ी के पास शस्त्र पूजा कर मां काली का विशेष अनुष्ठान शुरू किया। इस वर्ष अनुष्ठान में राजपरिवार से कुंवर यशप्रताप सिंह जूदेव अनुष्ठान में शामिल रहे। सुबह राजपुरोहित, आचार्य व पुस्तकाचार्य की अगुवाई में मां काली मंदिर से शस्त्र निकाला गया और पक्कीडांड़ी के पास विधि-विधान से पूजा कराई गई।

इस वर्ष शस्त्र पुजा में ढाेल व नगाड़े नहीं बजे। कुछ दिन पूर्व ही राजपरिवार में कुमार युद्धवीर सिंह जूदेव का निधन हुआ है। इस वजह से गाजे-बाजे का आयोजन नहीं हुआ। राजपरिवार से भी परिवार के बड़े सदस्यों ने भाग लिया है। परंपरा के निर्वहन करते हुए यश प्रताप ने पूजा की। राजपुरोहित व आचार्य सादगीपूर्वक अनुष्ठान के लिए निकले। हर साल मां काली मंदिर से गाजे-बाजे के साथ शस्त्र निकाला जाता था।

निर्वाण जाप और रक्षा कवच का पाठ शुरू
रियासतकाल में शस्त्रों का अहम स्थान होता था। नवरात्रि में राज परिवार द्वारा वैदिक एवं तांत्रिक विधि के साथ पूजा-अर्चना के साथ की जाती है। यह परंपरा आज भी कायम है। मां काली मंदिर में शस्त्र स्थापना के बाद ब्राह्मणों का समूह 9 दिन तक दुर्गा सप्तशती पाठ, निर्वाण जाप, रक्षा कवच आदि का पाठ करेगा। उसके बाद रोजाना सुबह-शाम विधि-विधान से तांत्रिक एवं वैदिक विधि से मां काली का पूजा हाेगी। मां काली मंदिर में तांत्रिक विधि से और बालाजी मंदिर में वैदिक रीति से अनुष्ठान किया
जाता है।

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