त्योहार / 1 जुलाई से चातुर्मास, श्राद्ध पक्ष के बाद देरी से आएंगे सारे त्योहार

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दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

जशपुर. सनातन संस्कृति में एकादशी तिथि को मोक्षदायिनी और पुण्यफल देने वाली माना जाता है। एकादशी तिथि में ऐसी ही तिथि देवशयनी एकादशी है।  मान्यता है कि इस भगवान श्रीहरि  शयन के लिए प्रस्थान करते हैं और चार महीनों तक शयन करते हैं। भगवान विष्णु के शयन की इस अवधि को चातुर्मास भी कहा जाता है। यह तिथि हर साल आषाढ़ माह में शुक्ल पक्ष की एकादशी को आती है। इस वर्ष यह तिथि 1 जुलाई को है। वैष्णव संप्रदाय में इस तिथि का खास महत्व है। इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन के लिए प्रस्थान कर जाते हैं। इस दिन भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा का विशेष महत्व है।
जुलाई को देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो रहे हैं। चातुर्मास मतलब वो चार महीने जब शुभ काम वर्जित होते हैं, त्योहारों का सीजन होता है। देवशयनी एकादशी से देवप्रबोधिनी एकादशी के बीच के समय को चातुर्मास कहते हैं। इस बार अधिक मास के कारण चातुर्मास चार की बजाय पांच महीने का होगा। श्राद्ध पक्ष के बाद आने वाले सारे त्योहार लगभग 20 से 25 दिन देरी से आएंगे।

160 साल बाद लीप ईयर और अधिक मास एक ही साल में
पं. हरिशंकर मिश्रा के अनुसार, 19 साल पहले 2001 में आश्विन माह का अधिकमास आया था। अंग्रेजी कैलेंडर का लीप ईयर और आश्विन के अधिकमास का योग 160 साल बाद बन रहा है। इससे पहले 1860 में ऐसा अधिकमास आया था, जब उसी साल लीप ईयर भी था।

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