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काढ़े से परेशानी:डाॅक्टर्स बोले, उम्र के हिसाब दी जाती है काढ़े की मात्रा

जशपुर13 दिन पहले
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  • इम्यूनिटी बढ़ाने के बजाय लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा मसाले, विटामिन और काढ़े का ओवरडोज़

कोरोना से जंग जीतने के लिए इन दिनों हर कोई अपनी इम्युनिटी सिस्टम मजबूत करने में जुटा है। कोई योग के जरिए तो कोई प्राणायाम के जरिए। कई लोग ऐसे भी हैं, जो अपने खान-पान में बदलाव के जरिए इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने में लगे हैं। कोई दिन में एक बार तो कई लोग इस काढ़े को दो बार भी पीते हैं। जबकि आयुर्वेदिक डॉक्टर्स के अनुसार कि अश्वगंधा, काली मिर्च, पुदीना, तुलसी, लोंग, लहसुन, हींग जैसे मसालों से बना काढ़ा ज्यादा मात्रा में लेने से मानव शरीर के लिए नुकसानदेह भी साबित हो रहा है। दरअसल, लोगों को इन चीजों का सही अनुपात न मालूम होने के कारण वे सही मात्रा वाला काढ़ा नहीं बना पा रहे जो सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। इम्युनिटी बढ़ाने वाली ऐसी औषधि और मसाले जरूरत से ज्यादा और गलत अनुपात में लेने से आपकी इम्युनिटी बढ़े न बढ़े लेकिन शरीर में दूसरी समस्याएं जरूर जन्म ले रही हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक वर्तमान में दालचीनी, गिलोय, काली मिर्च जैसी चीजों का ओवरडोज पेट दर्द, सीने में जलन का कारण बन रहा है। इतना ही नहीं ऐसे काढ़े लीवर को भी डैमेज कर रहे है, इसीलिए इस तरह के काढ़ा बनाने से पहले आप किसी जानकार से सलाह लें तभी इसका सेवन करें।

अति नहीं अच्छी, काढ़ा में सही मात्रा जरूरी
आयुर्वेदिक डॉ. एचएम गुप्ता ने बताया कि सोशल मीडिया पर काढ़ा बनाने के वीडियो और मैसेज वायरल हो रहे हैं। लोग डॉक्टर से राय लिए बिना इसे देखकर काढ़ा बना रहे हैं, जो गलत है। हर इंसान की प्रकृति अलग होती है। उम्र के साथ दवा की मात्रा भी बदलती है। काढ़े में डालने वाले हर एक इंग्रीडिएंट्स की सही मात्रा का होना बेहद जरूरी है। काढ़ा बनाने के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।

ओवरडोज से हुई स्किन प्रॉब्लम
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने 25 साल की सृष्टि मिश्रा पिछले दो माह से काली मिर्च, अजवाइन, दालचीनी, लौंग जैसे मसालों का काढ़ा पी रही थीं। अचानक 15 दिन पहले चेहरे पर कील-मुंहासे होने लगे। कुछ दिन में ठीक होने के बजाए और बढ़ गए। स्किन स्पेशलिस्ट ने बताया कि ज्यादा गर्म तासीर के मसालों का साइड इफैक्ट है। उन्हें कुछ दिन काढ़ा न पीने की सलाह दी।

काढ़े से एसिडिटी और गले में जलन
कोटा निवासी सुनील मिश्रा कोरोना के डर से दिन में तीन बार अदरक, काली मिर्च, दालचीनी का काढ़ा पीने लगे। सुबह नींबू-शहद का पानी भी रहे थे। उन्हें एसिडिटी और गले में जलन होने लगी। डॉक्टर ने फूड हिस्ट्री पूछी तो पता चला कि बेहिसाब मसालों के कारण ऐसा हुआ है। डॉक्टर ने उन्हें काढ़ा बनाने की सही मात्रा समझाई और सिर्फ एक बार पीने की सलाह दी।

चक्कर और कमजोरी का खतरा
आयुर्वेद चिकित्सक डॉ. एलआर भगत के अनुसार मसाले, जड़ी-बूटी की ज्यादा खुराक नुकसानदायक है। काढ़े में डलने वाले मसाले साफ, सूखे हों। फंगस लगी जड़ी-बूटी से डायरिया या पेट की प्रॉब्लम हो सकती है। इम्युनिटी बढ़ाने व बीपी कंट्रोल रखने के लिए दालचीनी, गिलोय को कारगर है, पर ज्यादा मात्रा में लेने से चक्कर, बेहोशी, कमजोरी जैसे समस्या हो सकती है।

गलत दवा व ज्यादा खुराक से साइड इफैक्ट का खतरा
"हल्दी, अदरक, काली मिर्च जैसे मसाले बहुत गर्म होते हैं। इनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, लेकिन ओवरडोज से बीमारियों का खतरा भी होता है। लोगों ने आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन भी बढ़ा दिया है। इन दवाओं की सही खुराक और कंपोनेंट पता होना भी जरूरी है। गलत दवा और ज्यादा खुराक लेने से साइड इफैक्ट होने का खतरा होता है।''
-डॉ. अभिलाषा द्रिवेदी

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