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गज राज:गांवों के भीतर अब कटहल खाने पहुंच रहे हाथी

जशपुरनगर18 दिन पहले
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गांव के भीतर हाथीी। - Dainik Bhaskar
गांव के भीतर हाथीी।
  • तपकरा और बादलखोल अभयारण्य के निकट सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं ग्रामीण, कर रहे रतजगा

जिले में लम्बे समय से तपकरा वन परिक्षेत्र और नारायणपुर बादलखोल अभयारण्य में वन और पानी की व्यवस्था की वजह से हाथी मौजूद है। हाथियों की मौजूदगी की वजह से इंसान और हाथियों को टकराव भी होता रहता है। इन दिनों गांवों पेड़ों पर लगे कटहल पक गए है, जिसे खाने के लिए हाथी गांव के अंदर घुस रहे हैं। वन विभाग ग्रामीणों को हाथियों की मौजूदगी की जानकारी देने के साथ-साथ कटहल को तोड़ लेने की समझाइश दे रही है।

बीते 16 महीने के दौरान ही हाथियों के हमले से कम 15 लोगों की जानें जा चुकी है। 2020 से मई 2021 के बीच जिले में तीन हाथियों की मौत भी हो चुकी है। जिले में मौजूद कटहल के पेड़ हाथियों को आकर्षित करते है । कटहल के पेड़ के नजदीक जाने से लोगो को खतरा बना रहता हैं। पड़ोसी राज्य झारखंड के पालमू और सारण्डा और ओडिशा में लौह अयस्क आधारित खदान व उद्योगों के विकसित होने से प्राकृतिक आवास गवां चुके हाथी को मनोरा, बादलखो, फरसाबहार तहसील के घने जंगल, जलाशय और नदियों की उपलब्धता भा गई।

वनविभाग के अनुसार इस वक्त तपकरा वनपरिक्षेत्र में 9 हाथी है। इनमें टीकलीपारा के सतपुरिया जंगल में 4,गारीघाट में 3 और जमुना व तपकरा में एक एक हाथी शामिल हैं। तुमला थाना क्षेत्र के टीकलीपारा गांव में इन दिनों इन हाथियों का आंतक चरम सीमा पर है। सतपुरिया जंगल हाथियों का पसंदीदा जगह बन चुका है। इन दिनों यहां तीन हाथियों ने डेरा जमाया हुआ है।

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