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बालाजी मंंदिर में जन्मे प्रभु:पहली बार पालना झुलाने के लिए नहीं लगी भक्तों की भीड़

जशपुरएक महीने पहले
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  • भगवान बालाजी मंदिर में सिर्फ राजपरिवार के सदस्य व राजपुरोहितों की उपस्थिति में मना कृष्ण जन्मोत्सव

श्री कृष्ण जन्माष्टमी के माैके पर मंगलवार-बुधवार की मध्यरात्रि को भगवान बालाजी मंदिर में श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव कार्यक्रम हुआ। भक्तों की मांग पर भगवान का पालना बालाजी मंदिर प्रांगण में लगाया गया पर कोरोना संक्रमण को ध्यान में रखते हुए मंदिर में भक्तों की भीड़ नहीं जुटने दी गई। यह पहला मौका था जब भगवान के जन्म के तुरंत बाद उन्हें पालने में झुलाने के लिए भक्त नहीं थे। भगवान के जन्मोत्सव के मौके पर मंगलवार-बुधवार की रात को सिर्फ राजपरिवार के सदस्य व राजपुराहित मंदिर में उपस्थित थे। रात 12 बजे से पहले भगवान बालाजी मंदिर के गर्भगृह का पट बंद कर दिया और रात 12 बजते ही मंदिर का पट खोला गया और भगवान की प्रतिमा को बाहर निकालकर यहां सजे छोटे से पालने में रखा गया। पालने में भगवान का विधिवत श्रृंगार करने के बाद उनकी पूजा की गई। जिस स्थान पर पालना सजाया गया था उसे घेर दिया गया था, ताकि भगवान को पालने में झूलाने के लिए भक्तों की भीड़ एक जगह पर जमा ना हो। वैसे शहर के श्रद्धालुओं ने भी अपनी जागरूकता का परिचय दिया। जो श्रद्धालु जन्मोत्सव के मौके पर आधी रात को मंदिर पहुंचते थे और भगवान के जन्म के बाद उनकी पूजा करते थे, वे मंगलवार की शाम को ही मंदिर पहुंच गए। शाम 5 बजे से श्रद्धालुओं के मंदिर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था।

घर-घर हुई पूजा, आधी रात को बजे शंख व घंट
मंदिर में भीड़ नहीं जुटी तो भगवान के जन्म पर आधी रात को शहर के हर कोने से शंख व घंट बजने लगे। लोगों ने अपने-अपने घरों में भगवान का जन्मोत्सव मनाया। इसके लिए इस वर्ष लड्‌डूगोपाल की पालने वाले मूर्तियां खूब बिकीं थी। मंगलवार-बुधवार की रात 12 बजे कई घरेां में शंख व घंट बजने की आवाजें आईं। इसके बाद आरती की गूंज भी शहर के हर कोने से सुनाई पड़ी।

पुजारियों ने श्रद्धालुओं को नहीं बांटा प्रसाद
कोरोना संक्रमण के कारण पहली बार लड्‌डूगोपाल के जन्म के खुशी में प्रसाद का वितरण नहीं किया गया। इन दिनों शहर के मंदिरों से प्रसाद का वितरण बंद है। मंदिरों के पुजारी श्रद्धालुओं को टीका भी नहीं लगा रहे हैं। शहर के सभी मंदिरों में ऐसी सावधानी बरती जा रही है।

दिनभर सुरक्षा घेरे में पालने में झूलते रहे भगवान कृष्ण
रात में जन्मोत्सव के बाद बुधवार काे दिनभर भगवान कृष्ण को मंदिर प्रांगण के पालने में रखा गया। पालना के चारों ओर घेराबंदी कर दी गई थी। इसलिए श्रद्धालुओं ने दूर से ही उनके दर्शन किए। किसी को भी भगवान का पालना झुलाने का मौका नहीं मिल सका।

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