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लापरवाही:अनुमति नहीं फिर भी हाई रिस्क वाले मरीजों को दी जा रही होम आइसोलेशन की सुविधा

जशपुर2 महीने पहले
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  • हॉस्पिटल के 1130 बेड में से 1048 बेड पड़े हैं खाली

कोरोना संक्रमित मरीज अस्पताल में भर्ती होने के बजाए घर पर रहना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। यही वजह है कि अभी अस्पताल के बेड में जितने मरीज नहीं हैं, उससे कहीं अधिक मरीज होम आइसोलेशन में हैं। जिले में काेराेना मरीजों के उपचार के लिए ईसीटीसी, केयर सेंटर डोंड़काचौरा के साथ आठ ब्लाकों में 11 आइसोलेशन सेंटर खुले हैं। जिसमें कुल बेड की संख्या 1130 है। पर वर्तमान में सिर्फ 82 बेड पर मरीज भर्ती हैं। 1048 बेड अभी भी खाली पड़े हैं। वहीं 105 मरीज होम आइसोलेशन में रह रहे हैं। बड़ी बात है कि कोरोना पॉजिटिव आने के बाद मरीज की पहली प्राथमिकता होम आइसोलेशन की होती है। कुछ हाई रिस्क वाले मरीज भी खुद की जिम्मेदारी लेकर फार्म पर दस्तखत कर होम आइसोलेशन में जा रहे हैं पर अस्पताल में भर्ती नहीं हो रहे हैं। नियमानुसार हाई रिस्क वाले मरीज जिन्हें शुगर, दमा सहित अन्य बीमारियां हैं उन्हें होम आइसोलेशन नहीं करना है। यदि वे होम आइसोलेशन का लाभ लेना चाहें तो उन्हें इसके लिए खुद जिम्मेदारी लेनी पड़ती है और एक फार्म पर दस्तखत कर यह कहना होता है कि यदि उन्हें कुछ होता है तो इसके जिम्मेदार वह स्वयं होंगे। अस्पताल जाने से बचने के लिए लोग इस फार्म पर भी आसानी से दस्तखत कर रहे हैं। कुछ मरीज जिनके घर में कमरों की कमी है वह होम आइसोलेशन के लिए कमरा खाली करा रहे हैं। यही वजह है कि जिले के 7 आइसोलेशन सेंटरों में अभी एक भी मरीज भर्ती नहीं हैं। जो आइसोलेशन सेंटर पूरी तरह से खाली हो चुके हैं उनमें प्रयास हॉस्टल जशपुर, बालक छात्रावास सलियाटोली, आरएमएसए कांसाबेल, डीएवी बगीचा, कन्या आश्रम बगीचा, बालिका छात्रावास लोदाम और आईटीआई तपकरा शामिल है।

27 मरीजों को करना पड़ा है अस्पताल में शिफ्ट
होम आइसोलेशन में रह रहे मरीज विभाग की निगरानी में हैं। प्रतिदिन इन्हें अपनी रिपोर्ट भेजनी पड़ रही है। वहीं किसी समस्या पर सहायता के लिए फोन कॉल पर टीम उपलब्ध है। होम आइसोलेशन में रहते हुए हालत बिगड़ने की दशा में अबतक 27 मरीजों को अस्पताल शिफ्ट किया गया है। जिले में अबतक 689 मरीज होम आइसोलेशन का लाभ ले चुके हैं। जिसमें से 557 लोग घर पर रहकर रिकवर हुए हैं।

एक्सपर्ट से जानिए घर पर रहना कितना सही
जिला सर्विलेंस ऑफिसर डॉ.आरएस पैंकरा ने बताया कि ऐसे कोरोना मरीज जिनमें कोई लक्षण नहीं है वह होम आइसोलेशन का लाभ लें। पर जिन्हें काेराेना के कारण बुखार व अन्य परेशानियां हो रही है वह होम आइसोलेशन में ना रहें तो बेहतर हैं। हाई रिस्क वाले मरीज मतलब जिन्हें डायबिटीज, हाई बीपी, दमा या अन्य कोई परेशानी है उन्हें भी होम आइसोलेशन में नहीं रहना चाहिए। बुजुर्गों काे होम आइसोलेशन का लाभ नहीं दिया जा रहा है। पर विशेष परिस्थिति जैसे बुजुर्ग खुद से चल फिर पाने में असमर्थ है या देखने में सक्षम नहीं है तो परिजन के रिस्क पर उन्हें होम आइसोलेशन दिया जा रहा है। अस्पताल से दूर गांव में जो मरीज मिल रहे हैं उनका हाेम आइसोलेशन में रहना भी सही नहीं हैं। ज्यादा अच्छा है कि मरीज डॉक्टरों की सलाह से निर्णय लें। यदि डॉक्टर अस्पताल में भर्ती होने की सलाह देते हैं तो उन्हें अस्पताल में भर्ती होना चाहिए।

7 नए कोरोना संक्रमित मिले
गुरुवार को जिले में 7 नए कोरोना मरीजों की पहचान हुई है, जिसमें पत्थलगांव, मनोरा व जशपुर में 2-2 और कुनकुरी से 1 केस है। इसके अलावा 14 कोविड मरीज स्वस्थ हुए हैं। बुधवार को जिले में 1504 लोगों की काेराेना जांच की गई थी। जिसमें रेपिड एंटीजन टेस्ट में 1155, ट्रू-नॉट से 7 और आरटीपीसीआर जांच के लिए 342 सैंपल लिए गए थे। जिले में अबतक 71282 लोगों की जांच हो चुकी है।

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