शहर में शांतिपूर्ण रूप से मना त्योहार:घर-घर जले दीप, जगमगाया शहर धन की देवी मां लक्ष्मी की हुई पूजा

जशपुर25 दिन पहले
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शहर सहित जिले भर में दीपावली का पर्व बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। मां लक्ष्मी को अपने घर बुलाने के लिए लोगों ने अपने घरों को आकर्षक तरीके से सजाया था। दोपहर से ही दुकान व घरों में मां लक्ष्मी की पूजा शुरू हो गई। घरों के अलावा व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में भी मां लक्ष्मी और गणेश की पूजा की गई। ऐसी मान्यता है कि दीपावली के दिन मां लक्ष्मी की विधिवत पूजा करने से साल भर उनकी कृपा भक्तों पर बनी रहती है और मां लक्ष्मी लोगों को धन से परिपूर्ण करती है।

पूजन के बाद दीप पूजन का कार्यक्रम घरों में हुआ। दीपक की पूजा कर लोगों ने अपने घरों के सामने उसे सजाया। घर के हर कमरे में घी के दीपक जगमगा रहे थे। पूजा के बाद लोगों ने मिठाईयां बांटकर खुशी का इजहार किया। दीपावली के लिए घरों को सजाने का कार्य माह भर पहले से ही शुरू कर दिया गया था। लोग अपने घरों की सफाई दीवारों की पुताई व दरवाजे खिड़कियों को पेंट से चमकाने में लगे थे।

दीपावली एक ऐसा मौका जब मां लक्ष्मी लोगों के घरों में प्रवेश करती है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि मां लक्ष्मी सफाई पसंद है और जहां भाईचारा, प्रेम के साथ निवास करते हुए लोग सफाई से रहते हैं, वहां मां लक्ष्मी का वास होता है। मां लक्ष्मी को दीपावली की रात अपने घर बुलाने के लिए लोगों ने तरह-तरह से तैयारियां कर रखी थी।

घरों को दीपमालाओं से सजाने के अलावा लोगों ने अपने घरों के आंगन को रंग-बिरंगी रंगोलियों से सजाया था। शहर में लोगों के घरों के सामने एक से बढ़कर एक रंगोली देखने को मिली। लोगों के घर हरियाली का प्रतीकात्मक रंगोली, शुभ चिन्ह स्वास्तिक, ऊँ लिखी हुई रंगोली, ढोल व नगाड़े की आकृति के रंगोली सहित कई कलाकृतियां रंगोली में देखने को मिली।

गांव में मन रहा सोहरई
दीपावली के दूसरे दिन से ग्रामीण क्षेत्रों में सोहरई पर्व की धूम मचनी शुरू हो गई है। गांवों में यह त्यौहार तीन दिनों तक चलेगा। आदिवासी दीपावली अपनी अनूठी परंपरा के अनुसार मनाते हैं। दीपावली पर्व को आदिवासी सोहरई पर्व के रूप में मनाते हैं। यहां मां लक्ष्मी की पूजा की विधि भी थोड़ी अलग है। मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए वनवासी बंधु मुर्गे की बलि देते हैं। वनवासियों में सोहरई का त्यौहार तीन दिनों तक मनता हैं। पर्व की खुशी में मदिरापान व सामूहिक नृत्य गान का आयोजन भी गांव-गांव में होता है।
बालाजी मंदिर में हुई अन्नकूट की पूजा
गोवर्धन पूजा के मौके पर भगवान बालाजी मंदिर में अन्नकूट की पूजा हुई। यहां आयोजित कार्यक्रम में प्रसाद ग्रहण करने के लिए लोगों की भीड़ जुटी। बालाजी मंदिर में सैकड़ों लोगों ने अन्नकूट का प्रसाद ग्रहण किया।

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