यज्ञ की पूर्णाहुति:आज मंदिर से निकलेगा भगवान बालाजी का रथ

जशपुर2 महीने पहले
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भगवान बालाजी मंदिर में पूर्णाहुति के बाद मंत्र पढ़ते राजपुरोहित - Dainik Bhaskar
भगवान बालाजी मंदिर में पूर्णाहुति के बाद मंत्र पढ़ते राजपुरोहित
  • विशालकाय रावण के पुतले का दहन नहीं होगा, सिर्फ पारंपरिक तौर पर कृत्रिम लंका जलाई जाएगी, भगवान के रथ से उड़ाएंगे नीलकंठ पक्षी
  • ग्राउंड की क्षमता के अनुसार 50% को ग्राउंड में प्रवेश दी जाएगी

विश्वकल्याण के लिए नवरात्र के प्रथम दिन से भगवान बालाजी मंदिर में वैदिक विधि और मां काली मंदिर में तांत्रिक विधि से चल रहा यज्ञ बुधवार को नवमी के दिन पूरा हुआ। दोनों ही स्थानों पर बुधवार को पूर्णाहुति दी गई। नवमी के दिन मां काली मंदिर में महामौर हुआ। इस बार काेरोना गाइडलाइन को ध्यान में रखते हुए औपचारिक तौर पर महामौर की परंपरा निभाई गई। आसपास के गांव से लोग नहीं पहुंचे थे।

दशहरा पर्व यहां एक विशेष अनुष्ठान जशपुर में सैकड़ों साल से हो रहा है। नवरात्र के अवसर पर समूचा शहर वैदिक मंत्र से गूंजता रहा। नवरात्र प्रतिपदा से लेकर नवमी तक शहर के मां काली मंदिर व बालाजी मंदिर में शुरू हुआ यज्ञ विश्व कल्याण के लिए किया गया। वैदिक, तांत्रिक व राजसी विधि से देवी अनुष्ठान में राजपरिवार के सदस्य, पुरहितगणों, मिर्धा व कोटवार की अहम भूमिका होती है।

धूमधाम से निकलेगा भगवान बालाजी का रथ

भगवान बालाजी मंदिर के भगवान का रथ शुक्रवार को निकाला जाएगा। इस बार श्रद्धालु सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रथ खींच सकते हैं। चार से पांच रथ निकलेंगे। पीछे तीनों पंडालों में मां दुर्गा की झांकी होगी। रथ दोपहर 3 बजे भगवान बालाजी मंदिर से रवाना होगा। रैनीडांड़ में कृत्रिम लंका बनाई है।

इसमें बनी रावण, मेघनाथ, कुंभकर्ण व अहिरावण की प्रतिमा को हनुमान आग लगाएंगे। रावण दहन के बाद यहीं पर अपराजिता पूजा होगी। इस बार रणजीता ग्राउंड में शानदार आतिशबाजी के बाद विशालकाय रावण के पुतले का दहन कार्यक्रम नहीं होगा।

राजा उड़ाएंगे नीलकंठ

अपराजिता पूजा के बाद दशहरा का अंतिम कार्यक्रम के रूप में रणजीता मैदान में भगवान के रथ से नीलकंठ पक्षी को उड़ाया जाएगा। यह विशेष बैगा के द्वारा यहां के बालाजी मंदिर में लाया जाता है। दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी को देखना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि रावण वध के समय रावण ने हनुमान के वास्तविक रूप में पहचान लिया था और हनुमान ने शिव के नीलकंठ रूप में दर्शन दिए थे।

इससे रावण को मुक्ति मिली थी। यहा मान्यता है कि यदि नीलकंठ पूर्व और उत्तर की ओर उड़ता है तो पूरे विश्व के लिए यह वर्ष शुभ होता है, वह नीलकंठ यदि अन्य दिशाओं की ओर उड़ता है तो प्राकृतिक आपदा आती है।

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