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असुविधा:ढूढ़हूकोना में सड़क नहीं, पीने के लिए ढोढ़ी का पानी, बच्चों ने आज तक नहीं देखा बल्ब

जशपुर8 महीने पहले
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  • यहां आकर लगता ही नहीं हम 21 वीं सदी में पहुंच गए हैं

जिले में अभी भी ऐसे गांव हैं जो 20 वीं सदी में छूट गए हैं। बगीचा विकासखंड के ग्राम पंचायत ढ़ोढ़रअंबा अंतर्गत ढूढ़हूकोना ऐसे ही गांव में से एक है। यह गांव अति पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवाओं का गांव है। इस गांव में कई दशक से राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र पहाड़ी कोरवा जनजाति के लोग रह रहे हैं, पर आज तक यह गांव विकास से कोसों दूर है। गांव तक पहुंचने के लिए ना तो सड़क है और ही इस गांव वालों को पीने का साफ पानी मिल पाया है। गांव में बिजली भी नहीं है। आलम यह है कि गांव के बच्चों ने तो आज तक बिजली का जलता हुआ बल्ब तक नहीं देखा है। इस गांव पर आने के बाद ऐसा बिल्कुल लगता ही नहीं कि हम टेक्नोलॉजी के युग में पहुंच गए हैं। रात के उजाले के लिए आज भी ग्रामीण ढिबरी और लालटेन जलाते हैं। गांव में अति पिछड़ी जनजाति पहाड़ी कोरवाओं के 26 मकान, नागवंशी परिवार का 1 मकान और 1 उरांव जाति का परिवार निवास करता है। गांव की कुल जनसंख्या 180 है। शायद कम जनसंख्या की वजह से इस गांव के विकास की ओर अबतक किसी का ध्यान नहीं गया। बुनियादी सुविधाओं के अभाव में यहां जिंदगी इतनी भयावह है यहां छोटी सी बीमारी से भी व्यक्ति की मौत हो जाना आम बात है। ग्रामीणों ने ऐसे परिवेश में खुद को ढाल रखा है। ग्रामीण राजू राम का कहना है कि इस गांव में जब कोई बीमार पड़ता है उसे अस्पताल ले जाने के लिए चारपाई और 8 से 10 लोगों की जरूरत पड़ती है। तीन किलोमीटर तक मरीज को कंधे पर चारपाई में डालने के बाद ही उसे सड़क तक लाया जा सकता है। इसलिए छोटी मोटी बीमारियों पर मरीज को अस्पताल लेकर ही नहीं जाते।

जनप्रतिनिधि वाकिफ हैं समस्या से
ऐसा नहीं है कि क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को इस गांव की समस्याओं व पिछड़ेपन के बारे में कुछ नहीं पता है। ग्रामीण लरंग राम, सहादूर आदि ने बताया कि हर चुनाव में नेता बाइक पर बैठकर गांव तक पहुंच जाते हैं। इस गांव का सत प्रतिशत वोट भी पड़ता है। चुनाव के वक्त सभी वादे करते हैं पर चुनाव खत्म होते ही उनकी ओर कोई ध्यान नहीं देता।

पानी के लिए ना हैंडपंप ना कुआं- इस गांव में पीने के पानी की कोई सुविधा नहीं है। ग्रामीण खेतों मेें बने ढोढी का पानी ही हर मौसम में पीते हैं। ग्रामीणों की मांग के बावजूद इस गांव में ना तो हैंडपंप खोदा जा सका है और ना ही कुआं बनवाया गया है।

चारपहिया नहीं घुसती यहां
इस गांव तक पहुंचने के लिए सिर्फ दोपहिया वाहन से जाना होता है। बरसात के दिनों में दोपहिया वाहन से भी जाना मुश्किल होता है। स्कूल की पढ़ाई के लिए बच्चों को नजदीकी गांव जाना पड़ता है। गांव में आंगनबाड़ी केन्द्र खुला है।

गांव में विकास के किए जा रहे प्रयास
"इस गांव तक पहुंचने के लिए लगभग तीन किलोमीटर की सड़क बनानी है। सड़क पर चार पुलिया भी है। किसी भी मद से इस गांव तक सड़क बनाने के लिए स्वीकृति मिल जाए यह कोशिश की जा रही है।''
-विनोद कुमार सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत बगीचा।

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