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भास्कर सरोकार:कोमड़ाे जलाशय का उपयोग नहीं:मात्र 4 किमी दूर लबालब डेम लेकिन शहर में पानी की कमी

जशपुर6 महीने पहले
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  • डेम को पर्यटन स्थल के रूप मेंं विकसित करते तो शहरवासियों को मिल जाती पिकनिक की जगह

शहर का सबसे पुराना डेम कोमड़ो वर्तमान में किसी काम का साबित नहीं हो रहा है। डेम में पर्याप्त पानी है, लेकिन इससे न तो किसानों के खेतों को पानी मिल रहा और ना ही जलाशय के पानी का दूसरा कोई उपयोग हो पा रहा है। डेम का निर्माण 60 के दशक में किया गया था। कोमड़ो डेम शहर से सिर्फ 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस डेम से जो नहर निकाली गई है वह टूट-फूट चुकी है। पहले नहर बेलमहादेव पहाड़ के पीछे से फतेहपुर होते हुए टिकैतगंज तक बनाई गई थी। टिकैतगंज के पास जो बारहमासी पानी का जमाव देखा जाता है, वह उसी डेम की नहर से रिसकर पहुंचा पानी है। यह बात शहर के बहुत कम लोग ही जानते है। सिंचाई विभाग में कोमड़ो डेम मरगा व्यवपर्तन योजना के नाम से संचालित है। इस डेम से निकली नहर वर्तमान में कई जगहों से टूटी है और कई जगह तो गायब हो गई है। नहर का अधिकांश हिस्सा जंगल क्षेत्र से गुजरता है, जिसके दोनों ओर खेत नहीं हैं। मुरूम युक्त जमीन होने पानी कुछ दूर बहकर सूख जाता है।

नहर का दोबारा निर्माण कराने की जरूरत
सिंचाई विभाग द्वारा तिवारी नाले से निकली दोनों नहरों के जीर्णोद्धार का काम शुरू कराया है। इससे शहर के आधे हिस्से का भू-जलस्तर सुधरेगा। पर यदि कोमड़ो से निकली नहर को बना देते तो पूरे शहर का जलस्तर सुधर जाता और गर्मी में कुएं नहीं सूखते।

1.20 रु मजदूरी में डेम में किया था काम
मरगा व्यवपर्तन को देखने जब भास्कर टीम कोमड़ो पहुंची तो यहां डेम में काम कर चुके एक मजदूर से टीम की मुलाकात हुई हुई। मांदूड़ सिंह ने बताया कि उसने डेम के निर्माण में मजदूरी की थी। उस वक्त मजदूरों को 1 रुपए 20 पैसे मजदूरी दिया जाता था।

नौकाविहार की सुविधा मिले तो शहर के लिए बेहतर
डेम शहर के सबसे नजदीक है। ऐसे में यदि डेम में नौकाविहार की शुरुआत की जाए तो शहरवासी यहां पहुंचने लगेंगे। डेम तक पहुंचने के लिए बस एक किलोमीटर की सड़क खराब है। पिकनिक स्पॉट के रूप में डेवलप कर दिया जाए तो शहरवासियों को नौकाविहार का लुत्फ उठाने के लिए कुनकुरी के मयाली नेचर कैंप जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

घोघर पर बना है डेम, अब विलुप्त हो रही है नदी
मरगा व्यवपर्तन का निर्माण घोघर नदी में किया गया है। जिस वक्त डेम बना, उस वक्त घोघर नदी हुआ करती थी। इसकी गिनती अब नाले में की जाती है। मांदूड़ सिंह ने बताया कि पहले बरसात के दिनों में नदी भर जाती थी तो कोमड़ो के ग्रामीण जशपुर नहीं पहुंच पाते थे। अब यह पतले नाले के रूप में बह रही है और नाले के दोनों ओर खेती हो रही है। बहुत से लोगनदी के बारे में नहीं जानते। अब कोेंबड़ो नाला के नाम से इसे लोग जानते हैं।

बजट में भेजा है प्रस्ताव
"मरगा व्यवपर्तन से निकले नहर की लंबाई बहुत ज्यादा है। नहर की जमीन मुरूम युक्त है जो जंगल के रास्तों से गुजरती है। इसलिए नहर में पानी छोड़े जाने के बावजूद यह पानी सूख जाता है। नए बजट में मरगा व्यवपर्तन के लिए प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया है। प्रस्ताव में डेम के जीर्णोद्धार, नहर की सीसी लाइनिंग व मरम्मत शामिल है। यदि मंजूरी मिलती है तो डेम व नहर दोनों सुधर जाएंगे।''
-डीआर दर्रो, ईई, जल संसाधन विभाग

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