पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

चाय की खेती का विस्तार:अब एक हजार एकड़ में होगी चाय की खेती जमीन देखने मनोरा पहुंची अफसरों की टीम

जशपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
मौके पर पहुंचकर जमीन का जायजा लेते कलेक्टर महादेव कावरे व अन्य अफसर। - Dainik Bhaskar
मौके पर पहुंचकर जमीन का जायजा लेते कलेक्टर महादेव कावरे व अन्य अफसर।
  • सोगड़ा, ओरडीह, आस्ता, अम्बाकोना, धरधरी व गोरियाटोली में लग सकता है बागान

कलेक्टर महादेव कावरे ने मनोरा विकासखंड में नए चाय बागान तैयार करने के लिए उपयुक्त जमीन का निरीक्षण किया। इस अवसर पर एसडीएम ज्योति बबली बैरागी कुजूर, जनपद सीईओ अनिल तिवारी, तहसीलदार सहित अन्य राजस्व अमला उपस्थित थे।

कलेक्टर ने मनोरा के सोगड़ा, ओरडीह, आस्ता अम्बाकोना, धरधरी एवं गोरियाटोली में चाय बागान के लिए उपयुक्त घास मैदान, राजस्व भूमि, छोटे-बड़े झाड़ के जंगल, पहाड़ चट्टान मद के जमीन का अवलोकन किया। उन्होंने चिन्हांकित सभी जमीनों का वनविभाग के साथ समन्वय कर सर्वे कार्य पूर्ण कराए जाने के निर्देश दिए एवं चिन्हांकित जमीन का नक्शा-खसरा के साथ प्रस्ताव प्रस्तुत करने कहा। उल्लेखनीय है कि जशपुर में चाय की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सारूडीह चाय बागान के तर्ज पर ही जिले में लगभग एक हजार एकड़ जमीन का चिन्हांकन कर बागान तैयार करने का लक्ष्य गया। जिसमें चाय की खेती के लिए उपयुक्त स्थानों में जशपुर मनोरा एवं बगीचा क्षेत्र में राजस्व जमीन का चिन्हांकन किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के ग्राम सारूडीह का चाय बागान पर्यटकों के आकर्षक का केंद्र बन गया है।

इस बागान को देखने के लिए पर्यटक पहुंच रहे हैं। केवल दस रुपए की फीस में चाय के बागान में अद्भुत नजारे नजर आ रहे हैं। उन्हें दार्जिलिंग, ऊटी और असम में होने का अहसास करवाता है। महिला समूह को विगत नौ माह के अंदर 50 हजार रूपये की अधिक की आमदनी हो गई है। महिला समूह को पर्यटकों के आने से काफी ज्यादा लाभ प्राप्त हो रहा है। जिले में तैयार किये जा रहे का चाय बागान पर्वत और जंगलों से लगा हुआ है। आमतौर पर यह जमीन अनुपयोगी चाय के बागान बन जाने से आसपास न सिर्फ हरियाली होगी। जिससे पर्यावरण संरक्षण होगा बल्कि जिले का वाटर लेबल भी वृक्षारोपण से ठीक होगा साथ ही पर्यटकों के आने से दूसरे व्यवसाय से जुड़े लोगों की आय में इजाफा होगा। चाय के बागान से पानी और मृदा का संरक्षण काफी तेजी से हुआ है।

चाय बागान में मसाले की खेती की योजना है। जिससे किसानों को अतिरिक्त आमदनी होगी। प्रयोग के तौर पर छोटी इलाइची, बड़ी इलायची,काली मिर्च, नरियल,जंगली तुलसी, की खेती चाय बागान के बीच मे किया जा रहा है। इसके लिए सरुडीह चाय बागान में वन एवं उद्यानिकी विभाग के सहयोग से लगभग 40 लाख चाय-काफी के पौधे एवं 50 हजार मसाले के पौधे तैयार किए जाएंगे। कलेक्टर ने चाय-कॉफी एवं मसालों की खेती को प्रोत्साहन के लिए शासन के विभिन्न योजनाओं का अभिसरण के माध्यम से कार्य करने के निर्देश दिए साथ ही इच्छुक प्रगतिशील किसानों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की बात कही। जिले के चाय बागानों से इस समय एक हजार किलो चाय तैयार की जा रही है। सोगड़ा और बालाछापर स्थित प्रोसेसिंग यूनिट में ग्रीन टी, सीटीसी चाय की पत्ती तैयार की जा रही है। बालाछापर प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार हो रही चाय की पत्ती को ऑनलाइन प्लेटफार्म सहित वनविभाग के मार्ट के माध्यम से देशभर में बेचा जा रहा है। विभाग ने इसे एक हजार एकड़ में विस्तार करने की योजना बनाई है। इसकी कार्ययोजना बनकर तैयार है। इसके लिए निजी पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने के साथ ही शासकीय भूमि उपलब्ध कराने की रणनीति बनाई गई है।

वन विभाग ने भी किराए पर ली है जमीन
वन विभाग के माध्यम से ग्राम पंचायत सारूडीह के ढरूआकोना में 11 किसानों की जमीनं किराए में लेकर 10 एकड़ में चाय के पौधे लगाए गए। इसमें भी सफल रहने के बाद जिले के इस पहले सरकारी चाय बागान को 20 एकड़ तक विस्तारित किया जा चुका है। इसके अलावा बालाछापर, घुटरी, कांटाबेल, झोलंगा में भी चाय बागान तैयार हो चुके हैं। डीएफओ एसके जाधव ने बताया कि कलेक्टर महादेव कावरे के साथ चर्चा कर बागान विस्तार के लिए आगामी पांच साल का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए निवेशकों को शासकीय दर पर सरकारी जमीन उपलब्ध कराई जा रही है। वर्तमान में 600 एकड़ जमीन का चिन्हांकन कर लिया गया है। साथ ही जो किसान पारंपरिक फसल छोड़कर चाय बागान से जुड़ना चाहते हैं उन्हें मनरेगा और कृषि से जुड़ी अन्य योजनाओं के माध्यम से सहायता दी जाएगी।

बनाया गया टी बोर्ड
इसके लिए जिला स्तरीय टी बोर्ड का गठन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। कलेक्टर पदेन अध्यक्ष और डीएफओ को सचिव बनाया गया है। जिला पंचायत सीईओ जशपुर, मनोरा और बगीचा के एसडीएम के साथ किसानों को भी शामिल किया गया है।

खबरें और भी हैं...