परेशानी:धान का अब तक उठाव नहीं, सूखने से घट रहा वजन, प्रति गाड़ी 7 क्विंटल का नुकसान

कोतबा9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
जशपुर की खरीदी केंद्र में जाम धान। - Dainik Bhaskar
जशपुर की खरीदी केंद्र में जाम धान।
  • न मिलर्स मान रहे,ना ही प्रशासन, धान का उठाव नहीं होने से समिति प्रबंधक को नुकसान

धान खरीदी के डेढ़ माह बाद भी धान का उठाव नहीं होने से समिति प्रबंधन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। समिति की मानें तो धान खरीदी के 72 घंटे में धान उठाव किए जाने का प्रावधान है। लेकिन लंबे समय बाद धान के उठाव नही होने से अब प्रति गाड़ियों में 6 से 7 क्विंटल धान की कमी आ रही है। जिस सुखती को मिलर्स मान रहें है न प्रशासन। जिसकी सम्पूर्ण जवाबदेही समिति को ठहराया जा रहा है।

बताया जा रहा है कि जिन मिलर्स का डीओ जारी हुआ है वे उस धान को नही ंउठाना चाह रहें है। उन्हें सूखे और अच्छे बोरे का धान ही उठाव करना है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष कोतबा धान खरीदी केंद्र में 81 हजार क्विंटल के लगभग खरीदी किया गया था। लेकिन अभी भी 24 हजार क्विंटल धान का उठाव नही हुआ है।

समिति के अध्यक्ष सुखल पैंकरा ने बताया कि प्रशासन द्वारा शुरुआती दिनों में नए बारदाने उपलब्ध कराए गए। जिनका कुछ मात्रा में उठाव हुआ है। बाद में मिलर्स और शासकीय उचित मूल्य के दुकानों से मिले बारदाने बेहद घटिया और फटे टूटे थे ।

बाउंड्रीवाल होने के कारण नहीं उठाया गया धान
जिले के जिन खरीदी केंद्रों में बाउंड्रीवाल की व्यवस्था है उन खरीदी केंद्रों को सबसे आखरी समय में प्रशासन द्वारा उठाया गया है। इसके साथ ही जो खरीदी केंद्र पत्थलगांव या मिलों के आसपास है उनके पास के खरीदी केंद्रों के धान का उठाव किया गया है।

जल्द होगा उठाव
धान का उठाव जारी है। डीओ कट चुके हैं। जल्द ही सभी खरीदी केन्द्रों से उठाव पूरा कर लिया जाएगा।’’
सीपी सिंह, डीएमओ, जशपुर

बेमौसम बारिश से प्रबंधक चिंतित

बेमौसम बारिश की मार और धान उठाव की सुस्त गति से धान उपार्जन केंद्रों के प्रबंधक परेशान हैं। खुले आसमान के नीचे पड़ा धान कभी धान सूखत का डर की मार झेल रहा है। शनिवार को हुई कई घंटों की बारिश से उपार्जन केंद्र के प्रबंधकों को धान के भीगने से बचाने की चिंता सताने लगी है।

सरकार और मिलर दोनों ही ना तो सूखत के अंतर को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं और ना ही भीगे हुए धान को वापस लेने के लिए तैयार हैं। विपणन वर्ष 2021-22 में गिरदावरी और बारदाने की किल्लत से जूझने के बाद इन दिनों आसमान में मंडराते हुए काले बादल, प्रबंधकों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो रहे है।

तिरपाल और प्लास्टिक की पन्नी की खरीदी तो समिति प्रबंधक कर लेते हैं, लेकिन शेड और चबूतरा निर्माण की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। कांसाबेल समिति के प्रबंधक लक्ष्मी साय ने बताया कि समिति में अब भी 30 हजार क्विंटल से अधिक धान रखा हुआ है। बारिश से इसके बचाव के लिए सिर्फ समिति द्वारा खरीद गया पन्नी ही एक मात्र सहारा है। तेज आंधी आने की स्थिति में यह भी काम नहीं करता है।

खबरें और भी हैं...