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ईब नदी उफान पर:नदी के किनारे घोरा जनजाति के लोग एकत्र नहीं कर पा रहे सोने के कण

जशपुर3 महीने पहले
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  • बाढ़ का खतरा नहीं पर फिलहाल नदी में मछली पकड़ने पर प्रशासन ने लगाई रोक, कोतेबिरा नहीं जा पा रहे भक्त

जून महीने से ही हो रही अच्छी बारिश के कारण बीते 3 महीनों से ईब में पर्याप्त पानी है। जिले के पहाड़ी इलाकों में हो रही बारिश से बीते 3 दिनों से नदी उफान पर है। हालांकि इससे तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा नहीं है। इसके बावजूद सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए प्रशासन ने फिलहाल नदी में मछली पकड़ने और घोरा जनजाति के लोगों द्वारा सोना निकाले जाने के काम पर रोक लगाई है। ईब जिले की सबसे प्रमुख नदी है। इन दिनों उफनती उफनती हुई इस नदी के विशाल रूप को जिले के प्रमुख शिवालय कोतेबिरा धाम से देखा जा सकता है।

रास्ते में पड़ती है नदी इसलिए मंदिर नहीं जा पा रहे श्रद्धालु
कोतेबिरा धाम में आस्था का प्रमुख केन्द्र कपाटद्वार है। कपाटद्वार नदी के किनारे पहाड़ के नीचे है। वर्तमान में लोग जिस रास्ते से कोतेबिरा धाम का मंदिर जाते हैं, उस रास्ते में नदी पार कर कपाटद्वार जाना पड़ता है। इस साल पूरे सीजन नदी में इतना ज्यादा पानी रहा कि सुरक्षा के उपायों के साथ भी नदी पार कर पाना मुमकिन नहीं हो पाया। सावन में भी श्रद्धालु यहां नहीं पहुंच पाए थे। हालांकि कपाटद्वार जाने का एक और रास्ता है, पर इस रास्ते से जाने के लिए लोगों को करीब 15 किमी अतिरिक्त सफर करना पड़ता है। जब तक नदी में जलस्तर कम नहीं होता है कोटेबिरा धाम आया हुआ कोई भी कपाटद्वार तक नहीं पहुंच सकता है।

जानिए जिले की प्रमुख नदी ईब के बारे में

  • उद्गम स्थल - पंडरापाठ के पास रानीझूला।
  • बहाव की दिशा - दक्षिण से उत्तर।
  • छग में इसकी कुल लंबाई - 87 किमी।
  • सहायक नदियां - मैनी और डोंड़की।
  • नदी की कुल लंबाई - 252 किमी।
  • कहां मिलती है- ओडिशा के हीराकुंड से 10 किमी पहले महानदी में।

समाज को अधिक स्वर्ण कण मिलने की खुशी
ईब नदी को स्वर्ण नदी भी कहा जाता है क्योंकि इस नदी की रेत में सोने के कण मिलते हैं। फरसाबहार विकासखंड में निवासरत घोरा जनजाति के लोग कई पीढ़ियों से नदी की रेत से सोना निकालने का काम कर कर रहे हैं। नदी के उफान पर होने के बाद जब जलस्तर कम होता है, तो नदी अपने साथ बहुत सारी रेत छोड़ जाती है। इसलिए नदी में जलस्तर के बढ़ने से घोरा जनजाति के लोग खुश होते हैं और उनके घरों में उत्सव जैसा माहौल होता है। हालांकि कुछ इलाकों में अभी भी रेत से सोने का कण निकालने का काम जारी है, पर नदी के उफान पर होने की वजह से इसमें खतरा भी है।

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