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जागरुकता:सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए मुस्लिम समाज ने दो बार की नमाज अदा

जशपुर10 दिन पहले
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जिले में शनिवार को कुर्बानी के पर्व बकरीद पर घरों में कुर्बानी दी गई। साथ ही मुबारकबाद का दौर दिन भर चलता रहा। शहर सहित पूरे अंचल में बकरीद अकीदत के साथ मनाई गई। सुबह शहर के जामा मस्जिद में बकरीद की विशेष नमाज पढ़ी गई। पर्व को लेकर मुस्लिम धर्मावलंबियों में सुबह से उत्साह नजर आ रहा था। इनमें बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। लोग सुबह नए नए कपड़े पहनकर ईदगाह पहुंचने लगे थे। इस बार कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए मस्जिद में दो बार बकरीद की नमाज अदा कराई। नमाज में अमन, चैन और शांति की दुआ की गई। नमाज पहले मौलाना मंसूर ने तकरीर में संदेश देते हुए कहा कि इस्लाम भाई चारे का संदेश देते है। आपसी प्रेमभाव से मानवत की सेवा करना हर मुसलमान का कर्तव्य है। उन्होंने त्याग और कुर्बानी के महत्व को बताते हुए कहा कि मुस्लिम धर्म में त्याग का बहुत महत्व है। इस्लाम अल्लाह के वास्ते अपना सब कुछ त्याग करना सिखाता है। नमाज के बाद लोग एक दूसरे बकरीद की मुबारकबाद देने लगे। इसके बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने अपने घरों में कुर्बानी दी। बकरीद को कुर्बानी का पर्व कहा जात है। कुर्बानी का अर्थ परिवार, समाज और देश रक्षा के लिए सदा तत्पर रहकर अपना सब कुछ कुर्बान करना है। शहर के अलावा कुनकुरी, लोधमा, आस्ता, सन्ना, सांईटांगरटोली, मनोरा, डडगांव सहित आसपास के गांवों में भी कुर्बानी का पर्व अकीदत के साथ मनाया गया। यहां बकरे की कुर्बानी दी जाती है। कुर्बानी के बाद गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा गया। पहला हिस्सा परिवार के लिए। दूसरा हिस्सा दोस्तों और रिश्तेदारों के लिए लिए और तीसरा हिस्सा गरीबों के लिए रखा गया।

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