अस्पताल में स्कैम:जिम्मेदारों ने ऐसे मचाई 12 करोड़ की लूट जैसे सरकारी नहीं उनका हो रुपया

जशपुर2 महीने पहले
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  • सिर्फ इतनी सजा; कार्रवाई के नाम पर सिर्फ निलंबन, शुरू हुई राजनीति, की गई एफआईआर कराने की मांग

स्वास्थ्य विभाग में हुए घोटाले में कानूनी कार्यवाही की मांग करते हुए नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार का एकमात्र लक्ष्य कोरोना के उपचार के नाम पर नियमों को ताक में रखकर सरकारी अस्पतालों में दवाईयां व कोविड उपचार के लिए सामग्री खरीदना रहा है। जिला सरकारी अस्पताल में करीब 12 करोड़ रुपए के चिकित्सा सामग्री घोटाले का मामला सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि जशपुर सरकारी चिकित्सालय में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए केवल मात्र कुछ लोगों पर निलंबन की कार्यवाही की गई है जो केवल दिखावा है, प्रदेश की सरकार जरा भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधा के संकल्प के साथ काम कर रही होगी तो प्रदेश के सभी अस्पतालों में हुए घोटाले की जांच के लिए कमेटी बनाकर बिन्दुवार जांच करें एवं दोषियों पर सख्त कार्यवाही करें।

नियम विरुद्ध चिकित्सा सामग्री के खरीदी बिक्री के लिए एक गिरोह काम कर रहा है। नेता प्रतिपक्ष कौशिक ने कहा कि जशपुर सरकारी चिकित्सालय में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए केवल मात्र कुछ लोगों पर निलंबन की कार्यवाही की गई है। यह केवल दिखावा है। भास्कर न्यूज जशपुरनगर में स्वास्थ्य विभाग का महाघोटाला सामने आया है। कोरोना से जब पूरा प्रदेश कराह रहा था, तो उस वक्त स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी किस तरह से सरकारी खजाना लूट रहे थे। सिविल सर्जन और आरएमओ ने मिलकर इस घोटाले अंजाम दिया कि लोग अचंभित रह जाए, 1 करोड़ की स्टेशनरी, 9 करोड़ की दवाई ना जाने आसमान निगल गया, सिविल सर्जन और आरएमओ ने करोड़ों ऐसे लूट लिए, मानों सरकारी नहीं, उनकी प्राइवेट प्रापर्टी हो। अब जबकि जांच हुआ तो घोटाले ने जांच टीम का दिमाग घूमा दिया।

2 साल में खरीदी 9 करोड़ की दवा
ना निविदा मंगवाया और ना ही अधिकारियों की अनुमति ली, सिविल सर्जन और अधिकारी-कर्मचारियों ने किस तरह से सालों तक मनमर्जी की दुकान चलाई, इसका उदाहरण दवा खरीदी है । 5 सदस्यीय जांच टीम ने पाया कि रायपुर, रायगढ़, जशपुर सहित कई जिलों से दवा और मास्क, गलब्स की इतनी खरीदी कर ली गई, जितने का अधिकार विभाग को था ही नहीं। राज्य सरकार ने जिलों में सिविल सर्जन को दवाईयों के लिए 1 लाख और अन्य सामिग्री के लिए 50 हजार की खरीदी का ही अधिकार दिया है, लेकिन अफसरों ने नियमों को जूते की नोंक पर रख दिया। घोटाले की हद का पता इसी बात से लगता है कि 80 लाख 53 हजार रुपये की दवा की खरीदी की गयी, जबकि राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन के लिए जेनरिक दवाओं के खरीदी का निर्देश दिया है। सिविल सर्जन और उनके घोटालेबाज टीम ने इस नियम को ठेंगा दिखाते हुए 80 लाख से ज्यादा की गैर जेनरिक दवा खरीद ली।

कागजों पर 57 लाख से ज्यादा की ड्रेस खरीदी
जशपुर जैसे छोटे जिले में स्वास्थ्य विभाग में दो साल में नर्सों व कर्मचारियों ने 57 लाख 14 हजार रूपये के ड्रेस पहनाए हैं। हद ता ये है कि ग्रामोद्योग और हथकरघा विकास विभाग से कपड़े की खरीदी का निर्देश है, लेकिन जशपुर के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने भंडार क्रय नियम की अनदेखी कर इन विभागों से खरीदी नहीं की। जिस मेसर्स कुमुद टेक्सटाईल से 11 लाख के कपड़े की खरीदी की गई, उस दुकान का पंजीयन भी नहीं है। जांच टीम ने इस खरीदी को नियम विरूद्ध खरीदी बताया है। ये खरीदी अक्टूबर 2019 से मार्च 2021 के बीच की गई है।

1.67 करोड़ की खरीदी स्टॉक में दर्ज ही नहीं
जशपुर के स्वास्थ्य विभाग की तरफ से 2019 के अप्रैल महीने से मार्च 2021 के बीच 1 करोड़ 67 लाख 5 हजार 700 रुपये की अलग-अलग सामिग्री खरीदी गई है, लेकिन उसका कोई भी विवरण स्टाक रजिस्टर में दर्ज नहीं है। जो सामग्री खरीदी उनमें मेडिकल, बिजली का समान, कंप्यूटर, सर्जिकल, स्टेशनरी, टायर सहित अन्य समान हैं, लेकिन ये खरीदी सिर्फ और सिर्फ कागजों पर हो गई। इन समानों की खरीदी और उपलब्धता का जिक्र रजिस्टरों में नहीं दर्शाया गया।

डेढ़ साल में 1 करोड़ की स्टेशनरी खरीदी
जशपुर के स्वास्थ्य विभाग ने हर महीने लगभग 6 लाख रूपये की सिर्फ स्टेशनरी का इस्तेमाल कर दिया। जांच टीम ने पाया कि 15 महीने में विभाग ने 97 लाख रुपये की स्टेशनरी खरीदी। हद तो तब हो गई करीब 1 करोड की खरीदी का हिसाब विभाग नहीं दे सका। इतने बड़े पैमाने पर कागजों की हुई खरीदी का हिसाब सिर्फ कागजों पर ही था, ना तो इसे स्टाक रजिस्टर में इंट्री किया गया और ना खरीदे समान के वितरण की जानकारी दी गई। जांच टीम ने जब खरीदी और उसके वितरण की जानकारी अफसरों से मांगी तो वो भी विभाग के पास नहीं था।

खर्च करने थे 25 हजार, 25 लाख किए खर्च
जशपुर के स्वास्थ्य विभाग में सिविल वर्क कराने के नाम पर भी बड़ा घोटाला हुआ है। विभाग को रिपयेरिंग वर्क के लिए सिर्फ 25 हजार रुपए तक ही काम कराने का अधिकार है, लेकिन सिविल सर्जन ने 21 लाख 2 हजार 635 रुपए का काम करवा लिया। हैरत की बात ये कि 21 लाख का काम सुनील कुमार मिश्रा के फर्म से 8 महीने के भीतर करवाए गए।

निर्धारित मूल्य से ज्यादा पर खरीदी
स्टेशनरी, दवा की हुई 88 लाख 39 हजार की खरीदी में भी बड़ी लारवाही मिली थी। स्टेशनरी की खरीदी से कलेक्टर की तरफ से निर्धारित कीमत से भी ज्यादा दर पर की गई। वहीं छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम की तरफ से टेंडर के जरिये खरीदी के निर्देश का भी उल्लंघन किया गया। टेंडर के बजाय सिविल सर्जन ने खुद ही खरीदी की।

37 लाख में फर्नीचर, कहां है पता नहीं
राज्य सरकार ने जिलों में खरीदी के लिए खुली निविदा जारी करने के सपष्ट निर्देश दे रखे हैं, लेकिन विभाग की तरफ से उस नियम की बिल्कुल भी परवाह नहीं की गई। बिना टेंडर बुलाए ही सिविल सर्जन ने 37 लाख 60 हजार रुपये की खरीदी कर ली। फर्नीचर खरीदा गया, लेकिन उसका क्या इस्तेमाल किया गया और कहां वितरित किया गया।

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