अंधविश्वास से गई जान / गाज से झुलसे दो की इलाज से पहले मौत

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  • परिजन ने तुरंत इलाज कराने के बजाए अंधविश्वास में पड़कर घायलों को गोबर के ढेर में दबाया था

दैनिक भास्कर

Jun 30, 2020, 04:00 AM IST

जशपुर. रविवार को बागबहार में आकाशीय बिजली की चपेट में आने से घायल तीन ग्रामीणों में से दो की मौत हो गई है। गाज की चपेट में आने के बाद परिजन ने एक युवक और युवती को अस्पताल ले जाने के बजाए उन्हें गोबर के गढ्ढ़े में दबा दिया था। 
मिली जानकारी के अनुसार रविवार की शाम को गाज की चपेट में आकर हुए घायलों को पहले फरसाबहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, पर यहां पर कोरोना संक्रमण के कारण हॉस्पिटल सील होने से उन्हें तुरंत इलाज नहीं मिल पाया। ग्रामीणों उन्हें फिर रायगढ़ जिले के लैलूंगा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायलों को लेकर पहुंचे। यहां तीन घायलों में से दो को मृत बताया। यह भी बताया जा रहा है कि अस्पताल आने से लगभग एक घंटा पहले ही दम तोड़ चुके थे। गाज की चपेट में आने के बाद घायलों को यदि तत्काल प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती तो उनकी जिंदगी बचाई जा सकती थी। मृतकों में सुनील पिता मोहर साय (22) और चंपा रॉउत (20) के नाम शामिल हैं। राजू तिर्की गंभीर रुप से घायल हो गया है, उसका इलाज चल रहा है। दोनों मृतकों के शव को सोमवार सुबह पीएम के बाद परिजनों को सौंपा गया। जानकारी के मुताबिक रविवार को घटना दो स्थानों पर हुई थी, जिसमे युवती बागबहार के झार पार में आकाशीय बिजली की शिकार हुई। दूसरी घटना बागबहार के मंदिर तालाब के पास बरगद के पेड़ के पास हुई। युवती अपनी मां के साथ मूंगफली लगा रही थी। 

गाज से झुलसे व्यक्ति को गोबर से कोई लाभ नहीं होता
अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष डॉ.दिनेश मिश्रा ने बताया कि आकाशीय बिजली की प्रक्रिया कुछ सेकंड के लिए होती है, लेकिन इसमें इतने ज्यादा बोल्ट का करंट होता है कि आदमी की जान लेने के लिए काफी है। गाज की चपेट में आने से शरीर के कई हिस्सों में करंट का झटका पहुंचता है। कई बार चपेट में आने वाले व्यक्ति की हार्ट फेल भी हो जाता है। करंट के चपेट में आने से शरीर में पानी एवं अन्य मिनरल की कमी हो जाती है, जिसके कारण मौत भी हो जाती है। इसलिए ऐसी अवस्था में तत्काल पीड़ित को अस्पताल ले जाना चाहिए। डॉ. मिश्रा ने बताया कि गोबर में गाड़ने की परंपरा बहुत पुरानी है, लेकिन तब मेडिकल सुविधा का अभाव था, लेकिन अब ऐसा खतरनाक है।  गोबर में दबाने से पीड़ित व्यक्ति को किसी प्रकार का कोई लाभ नहीं पंहुचता है।

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