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फिर पलायन:गोवा, कर्नाटक व महाराष्ट्र से आई एसी बसों से मेहमानों की तरह ले जाए जा रहे कामगार

जशपुरएक महीने पहले
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  • संक्रमण के डर से नहीं लॉकडाउन में काम बंद होने की वजह से घर लौटे थे श्रमिक

लॉकडाउन के दौरान जिले में जितने भी प्रवासी मजदूरों की वापसी हुई थी, उन्होंने अब फिर दूसरे प्रदेश जाना शुरू कर दिया है। फैक्ट्री मालिकों को भी लेबरों की जरूरत पड़ रही है, इसलिए वे लेबरों को लेने के लिए एसी बसें भेज रहे हैं। इन दिनों फरसाबहार व कुनकुरी विकासखंड के विभिन्न गांव में गोवा, महाराष्ट्र व कर्नाटक से बसें आ रही हैं और रातों रात लेबरों को लेकर चली जा रही है। जिस बड़ी संख्या में जिले में लेबर लौटे थे, उसी संख्या मेें अब वापसी भी हाे रही है। एक अनुमान के मुताबिक अकेले कुनकुरी और फरसाबहार ब्लाक से ही 8 से 10 हजार मजदूर वापस लौट चुके हैं। कोरोना संक्रमण के कारण हुए लॉकडाउन की वजह से वापस लौटे मजदूरोें को अपने गांव में कोई काम नहीं मिल पाया। ना तो सरकारी योजनाओं के तहत कोई काम हुआ और ना ही गांव में मजदूर किसी व्यवसाय से जुड़ सके। मनरेगा के तहत भी काम बरसात के कारण शुरू नहीं हो पाया। लगभग दो से तीन महीने तक मजदूर गांव में ही बैठे रहे और अब जैसे ही उन्हें उनकी संस्थाओं से बुलावा आ रहा है, वापस लौटने में मजदूरों को कोई झिझक नहीं हो रही है। कोरोना का संक्रमण अभी खत्म नहीं हुआ है। सिर्फ लॉकडाउन में छूट मिली है। इसके बावजूद पलायन जारी है। इससे साफ होता है कि मजदूरों की वापसी शहर में संक्रमित होने के डर से नहीं हुई थी, बल्कि लॉकडाउन की वजह से काम बंद हो गए थे, पैसे नहीं मिल रहे थे, इसलिए उन्हें मजबूरी में वापस लौटना पड़ा था। यहां काम नहीं मिला तो वे दूसरे प्रदेश जा रहे हैं।

लेबरों के लिए बनाई कई योजनाएं पर नहीं मिल रहा लाभ

  • मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक मृत्यु एवं दिव्यांग सहायता योजना
  • नौनिहाल छात्रवृत्ति याेजना
  • मेधावी छात्र-छात्रा शिक्षा प्रोत्साहन योजना
  • भगिनी प्रसूता सहायता योजना
  • मुख्यमंत्री साइकिल सहायता योजना
  • मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना
  • सुरक्षा उपकरण योजना
  • मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना
  • मुख्यमंत्री ई-रिक्शा सहायता योजना

रात्रिकालीन बसों में भी अभी लेबर अधिक
अभी भी शहर के बस स्टैंड से ज्यादा संख्या में बसें नहीं चल रही है। बस कर्मचारियों के मुताबिक सिर्फ 10 प्रतिशत बसोें का संचालन ही शुरू हो पाया है। दिन में बसें गिनती में हैं। अधिक संख्या में रात्रिकालीन बसें चल रही है। रात्रिकालीन बसों में भी यात्रियों में सबसे अधिक मजदूर हैं। कुछ बस संचालक गांव-गांव में चारपहिया भेजकर लेबरों को बस स्टैंड तक पहुंचने की सुविधा भी दे रहे हैं। ताकि बस संचालकों को सवारी मिल सके। इसके अलावा झारखंड के मजदूरों का भी पलायन शुरू हुआ है। झारखंड से भी चारपहिया वाहनों में लेबर पहुंच रहे हैं और जशपुर से छूटने वाली रात्रिकालीन बसों में यात्रा कर रहे हैं।

बसें कम चल रहीं प्राइवेट गाड़ी बुुककर जा रहे
बसों का संचालन कम हो रहा है तो लेबर प्राइवेट गाड़ियां बुक कर जा रहे हैं। अधिकांश लेकर प्राइवेट चारपहिया गाड़ियों में रायगढ़ और ओडिशा के झारसुगुड़ा तक जा रहे हैं। यहां से लेबर फ्लाइट से दूसरे राज्यों में लौट रहे हैं। लेबरों के लौटने का सिलसिला चाेरी छिपे चल रहा है। ओडिशा सीमा पुलिस का कहना है कि जो भी गाड़ियां बार्डर से गुजर रही है, सबके पास कागजात हैं, इसलिए उन्हें रोका नहीं जा रहा है।

13 हजार लेबर लौटे सिर्फ 225 ने कराया पंजीयन
सरकारी रिकार्ड के मुताबिक जिले भर में लॉकडाउन के दौरान 13 हजार 302 लेबर दूसरे राज्यों से वापस लौटे हैं। श्रम पदाधिकारी आजाद पात्रे ने बताया कि यह संख्या बाहर से आकर क्वारेंटाइन सेंटर में रहने वाले मजदूरों की है। श्रम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रवासी मजदूरों में से अबतक सिर्फ 225 लेबरों में विभाग में नया पंजीयन कराया है। जिले में कुल पंजीकृत मजदूरों की संख्या 40 हजार 335 है।

सभी को दिया जाएगा मनरेगा के तहत मिलेगा काम
''लॉकडाउन के दौरान जितने भी प्रवासी मजदूर लौटे हैं, सभी को मनरेगा योजना के तहत सौ दिनों का रोजगार दिया जाएगा। अभी बरसात में काम शुरू नहीं हो पाया था, पर अब जल्द कई तरह के काम योजना के तहत शुरू किए जाएंगे।''
-केएस मंडावी, सीईओ, जिला पंचायत।

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