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कंपोस्ट खाद:किसानों को बेची जाएगी 20 हजार क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट

रायगढ़एक महीने पहले
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  • ढाई एकड़ में डाली जाएगी तीन क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट

सोसाइटी अब गौठानों में तैयार केंचुआ खाद यानि वर्मी कम्पोस्ट किसानों को बेचेंगी। धान, दहलहन, तिलहन जैसी फसलों के लिए इसका इस्तेमाल होगा। गौठानों में तैयार 20 हजार क्विंटल कंपोस्ट खाद सोसाइटियों में किसानों को बेचने की तैयारी है। सोसाइटियों को साढ़े 3 हजार क्विंटल कंपोस्ट खाद भेजी जा चुकी है। कृषि विभाग चाहता है कि जिले में रासायनिक खाद का उपयोग 30-35 फीसदी घटाया जाए। इसके बाद केंचुआ खाद का उपयोग हो।

केंचुआ खाद किसानों को 10 रुपए किलो के भाव से बेची जा रही है। ढाई एकड़ में 3 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट लगेगी। सभी सोसाइटियों में कंपोस्ट कम्पोस्ट रखवाई गई है। कृषि विभाग के उपसंचालक ललित मोहन भगत ने बताया कि जिले के गौठानों से निकलने वाली कंपोस्ट खाद को ओडिशा और झारखंड में निर्यात करने की तैयारी दो माह पहले की गई थी। लेकिन दोनों राज्यों से अभी तक कोई डिमांड नहीं आई है, अब रणनीति में बदलाव करते हुए गौठानों से निकलने वाले कंपोस्ट खाद को अब किसानों को बेचे जाने की तैयारी की गई है।

बेहतर होगा उत्पादन
कृषि विशेषज्ञ डॉ एके सिंह ने बताया कि ऑर्गेनिक कंटेंट बढ़ता है, भूमि कार्बनिक तत्वों से नापा जाता है, मिट्‌टी की गुणवत्ता बेहतर होती है। एक किलो यूरिया का इस्तेमाल यदि किसान खेत में करता है तो उसमें 46 फीसदी नाइट्रोजन की मात्रा रहती है, लेकिन कंपोस्ट खाद में तीन फीसदी नाइट्रोजन होता है। लंबे समय तक उत्पादन देने की स्थिति बनेगी। रासायनिक और भौतिक दशा इस्तेमाल कम होने से मिट्‌टी पर भी असर पड़ेगा और प्रोडक्ट्स की क्वालिटी भी सुधारेगी।

फैक्ट फाइल

  • जिले में 222 गौठानों में 20 हजार 163 क्विंटल का उत्पादन हुआ है।
  • अभी तक 11 हजार 332 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बिक भी चुकी है
  • अभी 3 लाख 77 हजार 128 क्विंटल गोबर की खरीदी हो चुकी है, जिसमें अब उसमें खाद बनाया जा रहा है। जिले में 110 सोसाइटी है।
  • (लॉकडाउन होने की वजह से सारंगढ़, बरमकेला जैसे इलाकों में गोबर खरीदी कम हो रही है, इसका असर आने वाले समय में वर्मी कंपोस्ट बनाने पर भी होगा)
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