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जिले के उद्योगों की उपलब्धि:यूएई, चीन समेत पड़ोसी देशों में निर्यात किया 4 लाख टन स्टील

रायगढ़एक महीने पहले
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  • कोरोना महामारी के बीच जिले के उद्योगों से रिकार्ड एक्सपोर्ट, अब 4.29 लाख टन निर्यात का लक्ष्य

कोरोना महामारी के बीच एक अच्छी खबर यह है कि अप्रैल 2020 से मार्च 2021 तक स्टील उद्योगों ने जिले में तैयारी स्टील प्रोडक्ट्स न केवल पड़ोसी राज्य बल्कि चीन और यूएई तक निर्यात किए हैं। जिले से स्पंज आयरन, पैलेट्स, स्ट्रक्चरल स्टील और रेलपांत समेत 4 लाख टन स्टील प्रोडक्ट्स का निर्यात किया गया है।

उद्योग विभाग के अफसर कहते हैं, 3 लाख 90 हजार टन स्टील और आयरन के प्रोडक्ट्स के निर्यात का लक्ष्य रखा गया था। लॉकडाउन होने के बावजूद पिछले वित्तीय वर्ष में उद्योगों ने टारगेट से ज्यादा 4 लाख टन प्रोडक्ट्स का निर्यात कर दिया है। सबसे ज्यादा निर्यात जेएसपीएल ने किया है। जेएसपीएल में तैयार रेलपांत ईरान, बंगलादेश, नेपाल, कोरिया भेजे गए हैं। आयरन ओर में 20 और उससे जुड़े प्रोडक्ट्स में 30 फीसदी तक कस्टम ड्यूटी लगती है, यह राजस्व केंद्र सरकार को मिलता है। अफसर कहते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में इंड सिनर्जी भी निर्यात करने वाले उद्योगों में शामिल होगा।

वित्तीय वर्ष 2021-22 में 4 लाख 29 हजार टन निर्यात का लक्ष्य रखा गया है। बिलासपुर के चार्टर्ड अकांउटेंट रजत अग्रवाल ने बताया कि विदेशी निर्यात वाले आइटम पर जीएसटी में राहत दी जाती है । कच्चा या तैयार माल जिसकी देश में प्रचुरता न हो और उसको निर्यात किया जाए तो ऐसे एक्सपोर्ट पर केंद्र सरकार कस्टम ड्यूटी लगाती है ताकि उसका निर्यात सीमित हो। आयरन ओर पर 20 फीसदी और रेलपांत, स्ट्रक्चर स्टील, सरिया या ऐसे दूसरे स्टील प्रोडक्ट पर 30 प्रतिशत तक कस्टम ड्यटी होती है। कस्टम ड्यूटी केंद्र सरकार को मिलती है। यदि कोई उत्पाद 40 हजार रुपए टन के भाव से एक्सपोर्ट किया गया हो तो उसमें 8 हजार कस्टम ड्यूटी केंद्र को देनी होती है।

जिले को इन उद्योगों से यह लाभ
राज्य सरकार को कच्चे माल पर रायल्टी और अलग-अलग टैक्स के जरिए उद्योगों से आय होती है। सीएसआर के रूप में बड़ी राशि जिले को मिलती है। वहीं जिले में रोजगार का एक बड़ा साधन ये उद्योग हैं। जिले के बड़े उद्योग जेएसपीएल में लगभग 8 हजार कर्मचारी स्टील और पावर जेनरेशन से जुड़े हैं। वहीं एमएसपी और जेएसडब्ल्यू में लगभग 2500-2500 कर्मचारी हैं। इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट और उद्योगों से जुड़े दूसरे काम रोजगार पैदा करते हैं। इन कर्मचारियों द्वारा रियल इस्टेट, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजमर्रा के खर्च से जिले के बाजार की अर्थव्यवस्था टिकी है।

निर्यात संवर्धन समिति करती है मॉनिटरिंग
दो साल पहले केंद्र सरकार ने हर जिले में उद्योग विभाग के माध्यम से निर्यात संवर्धन समिति बनाई थी। समिति का जिम्मा मॉनिटरिंग करने का था। कलेक्टर की अध्यक्षता में इसकी कमेटी बनाई गई है। डायरेक्टर जनरल फॉरेन ट्रेड को भी इस कमेटी में रखा गया है।

हर साल बढ़ता है निर्यात
सरकार के आदेश पर उद्योगों से होने वाले निर्यात की जानकारी रखते हैं। हमारे जिले स्टील और आइरन प्रोडक्ट्स जुड़े देशों में निर्यात हो रहा है। कोरोना की बंदिशों के बावजूद पिछले साल उत्पादन ज्यादा हुआ था। इसे देखते हुए आने वाले साल में 10 फीसदी ग्रोथ के साथ इसकी क्षमता बढ़ाई है। इनकी क्वालिटी अच्छी रहती है इसलिए दूसरे देशों में डिमांड बढ़ती है।''
-संजीव सुखदेवे, जीएम, डीआईसी

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