सूखे जलाशय:केलो डेम में 57 व पुटका में सिर्फ 5 फीसदी जलभराव, शहर में बेकार बह रहा अमृत जल

रायगढ़10 दिन पहले
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इनसेट: अमृत मिशन का कनेक्शन। - Dainik Bhaskar
इनसेट: अमृत मिशन का कनेक्शन।

15 दिन की भीषण गर्मी से जिले के डेम में जलस्तर कम हो गया है। चक्रवाती मौसम के कारण मानसून भटक सकता है। ऐसा हुआ तो खरीफ फसल को शुरुआत में सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलेगा। अमृत मिशन के पाइप और कनेक्शन से पानी की बर्बादी परेशानी बढ़ा सकती है। अमृत मिशन के कनेक्शन मीटर और नॉब (टोंटी) चोरी होने के कारण लगभग हर मोहल्ले में हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह रहा है। पेयजल के लिए नगर निगम केलो नदी पर निर्भर है। खेतों और उद्योगों को केलो डेम से ही पानी जाता है। गर्मी के बचे हुए दिन और खरीफ फसल िसंचाई के लिए पानी चाहिए तो पानी की बर्बादी रोकनी होगी।

अमृत मिशन के काम में देर से पानी सप्लाई अब तक पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। योजना के मुताबिक कनेक्शन का टारगेट पूरा हो गया है लेकिन कुछ हिस्से में काम बाकी होने और मीटरिंग सही नहीं होने के कारण 24 घंटे सप्लाई शुरू नहीं हो सकी है। कुछ वार्डों में मीटर चोरी हो गई तो कहीं बदमाशों ने टोंटी उखाड़ दी है।

कनेक्शन और मीटर घर के बाहर लगाकर एजेंसी ने अपना काम पूरा कर दिया लेकिन इससे सुरक्षित तरीके से नहीं लगाने और कनेक्शन लेने वालों के जागरूक हुए बिना 100 फीसदी कनेक्शन और 24 घंटे पानी की मंशा पूरी नहीं होगी। अमृत मिशन का काम अभी पूरा ही नहीं हुआ है। ना ही निगम को हैंडओवर किया गया है।

120 दिन का पानी शेष
केलो परियोजना के ईई प्रकाश राव फुलेकर ने बताया कि डेम में अभी 120 दिन का पानी है। नगर निगम की डिमांड 32 एमएलडी पानी की है, हम अभी तक इसकी सप्लाई कर पा रहे हैं। रबी को सिंचाई के लिए पानी नहीं दिया जाना है। अभी पेयजल और उद्योगों को पानी दिया जाता है। मानसून में देरी या सूखे जैसी बात कहना जल्दीबाजी है लेकिन गर्मी के कारण जलाशय में जलस्तर पिछले सालों के मुकाबले इस साल गिरा है। पानी की बर्बादी रोकनी होगी।

धान बुआई के लिए पड़ती है 5 सेमी पानी की जरूरत: एक्सपर्ट
मौसम वैज्ञानिक एसके चंद्रा के अनुसार साइक्लोन की वजह से मानसून थोड़ा प्रभावित हो सकता है। यदि मानसून लेट से आता है तो किसानों को जलाशयों से पानी देना पड़ेगा। ऐसे में पानी की बर्बादी रोकने और उपाय के साथ तैयार रहना होगा। पिछली बार छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में मानसून लेट से आने की वजह से फसल का चक्र बदला था। किसानों काे धान बुआई के लिए 5 सेंटीमीटर पानी की आवश्यकता होती है। पानी कम होने पर बीज अंकुरित होते होते ही सूख जाते हैं।

हमने कनेक्शन दिया, पा नी को घर तक ले जाना लाेगों की जवाबदारी
मीटर चोरी होने की शिकायतों पर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। उपर से जैसे ही निर्देश आता है उसके मुताबिक मीटर लगाए जाएंगे और जहां तक पानी व्यर्थ होने की बात है लोगों की जवाबदारी है कि वे पानी को घर तक ले जाए।
नित्यानंद उपाध्याय, ईई, नगर निगम

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