उच्च शिक्षा:बीए के स्टूडेंट्स पढ़ेंगे गोबर खरीदी

रायगढ़एक महीने पहले
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कॉलेजों में इस साल नया सिलेबस लागू हो जाएगा। नई शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार और यूजीसी से 30 फीसदी तक बदलाव करने के निर्देश दिए गए थे। हर विषय के लिए अलग-अलग विश्वविद्यालयों को जिम्मेदारी दी गई थी और केंद्रीय अध्ययन मंडल का गठन किया गया था। इन मंडलों ने अपने सिलेबस में बदलाव करने की पूरा खाका बना कर उसे राज्य सरकार के पास भेज दिया है। वहां से उसकी मंजूरी मिलने के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा, इसी साल लागू किया जाएगा। जो कमेटियां बदलाव करने के लिए बनाई गई थी, उसमें स्थानीय कॉलेजों के प्रोफेसर शामिल थे।

अकाउंटिंग में बदलाव नहीं
कॉमर्स में भी कॉस्ट अकाउंटिंग, अकाउंटिंग जैसे सब्जेक्ट्स में बदलाव नहीं किया गया है। इसमें कुछ ज्यादा बदलाव होने की उम्मीद नहीं थी, लेकिन कॉमर्स में इकोनॉमिक्स, बिजनेस इनवायरमेंट के अलावा एंटरप्रेन्योरशिप में आसपास वातावरण को देखते हुए इसमें औद्योगिकरण को देखते हुए नए बिजनेस शुरुआत में संभावनाओं के बारे में बताया गया।

राजनीतिशास्त्र की 'प्रो. प्रीति बाला बैस ने बताया कि इसी तरह बदलाव करने की तैयारियां की गई है, इसमें ग्रेजुएशन के स्टूडेंट्स के लिए कई तरह की सामान्य जानकारियां जोड़ी नहीं गई थी। इसमें पंचायती राज व्यवस्था के कार्यों के अलावा नगरीय निकायों, राज्य और स्थानीय निकायों के कामकाज जैसी जानकारियों के अलावा उनके कानून सिलेबस में नहीं जोड़ा गया, नए सिलेबस में उसे अपडेट किया गया है।

मिनरल रिसोर्जेज होगा शामिल
साइंस और गणित के स्ट्रीम में बदलाव नहीं होगा, कुछ वर्षों पहले ही बदलाव किया जा चुका है। प्रोफेसरों ने नई शिक्षा नीति में ग्रेजुएशन 4 साल का होने की बात कही। पहला सर्टिफिकेट कोर्स होगा, वहीं दूसरे साल डिप्लोमा और तीसरे साल में अंडर ग्रेजुएशन विथ डिग्री और चौथे साल में डिग्री विथ रिसर्च होगा, इसकी भी सिफारिश कर दी है।

गर्ल्स कॉलेज के प्राचार्य कैलाश कछवाहा ने बताया कि मेंटल स्टडी में बदलाव करने की जिम्मेदारी दी गई थी। जिसमें राज्य के ज्योग्राफी के अलावा लोकल मिनरल रिसोर्सेस के अलावा क्लाइमेट और वर्तमान के फिजिकल कंडिशन के बारे में बताया जाएगा। एनर्जी रिर्सोसेस के बारे में भी ग्रेजुएशन स्टूडेंट्स को बताया जाएगा।

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