एनटीपीसी जमीन अधिग्रहण:480 से अधिक मामलों पर कोर्ट में सिविल सूट दर्ज

रायगढ़2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक

साल 2013 में एनटीपीसी लारा प्रोजेक्ट के लिए हुए भूमि अधिग्रहण में धांधली का मामला उजागर हुआ था। बड़ी संख्या में लोगों ने सर्वे और धारा 4 के प्रकाशन के बाद जमीन की खरीद-बिक्री और खाता बंटवारा कराया था। इन मामलों में मुआवजा और बोनस के करोड़ों रुपए बंटे थे। वहीं पुनर्वास के लिए कई लोग आज भी दावा कर रहे हैं।

अब एनटीपीसी की पहल पर राज्य शासन ने जिला न्यायालय में सिविल सूट फाइल किया है। कुल लगभग 1200 प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। इनमें 480 से अधिक मामले दर्ज हो चुके हैं। अगले एक-दो दिनों में अवैध तरीके से जमीन खरीद-बिक्री या बंटवारा करने वालों को नोटिस भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक लगभग सात साल से एनटीपीसी जमीन अधिग्रहण का मामला एनटीपीसी के साथ ही शासन और प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है।

यह गड़बड़ी तब सामने आई थी जब छोटे-छोटे भूखंडों के मुआवजे बंटने लगे। कुछ लोगों ने बोनस ले लिया। हद तो यह थी कि तब के तहसीलदार, एसडीएम और निचले कर्मचारियों के साथ मिलकर भूमाफिया ने जमीन का बंटवारा परिवार के बाहर गैरकानूनी वारिसों के नाम कर दिया। कई लोगों ने परिवार के भीतर ही दूसरे सदस्यों को जमीन बेचने की रजिस्ट्री कर अलग खाता बनवाया। एनटीपीसी के लिए जमीन अधिग्रहण होना था।

तत्कालीन कलेक्टर अमित कटारिया ने राजस्व अफसरों को निर्देश दिए कि सालों से जिन परिवारों में खातों का बंटवारा नहीं हुआ है या मृत्यु के बाद भी नामांतरण नहीं हुआ हो ऐसे लोगों के लिए शिविर लगाकर वैध नामांतरण किए जाएं। तब के राजस्व अधिकारियों ने इसका भरपूर फायदा उठाया और एनटीपीसी को भूमाफिया ने 300 करोड़ रुपए से अधिक की चपत लगाई। इसके बाद कलेक्टर बने मुकेश बंसल ने इस धांधली पर रोक लगाई। अवैध तरीके से बंटवारा या छोटे टुकड़ों की रजिस्ट्री करने वालों से रिकवरी हुई। अब अरसे बाद शासन ने इन मामलों पर सिविल सूट किया है।

पहले परिवारों में बंदरबांट करने वाले नपेंगे
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पहले चरण में ऐसे लोगों को कोर्ट से नोटिस भेजा जाएगा जिन्होंने परिवार के भीतर ही अवैध तरीके से जमीन का बंटवारा या रजिस्ट्री कर दी। इस सिविल सूट में सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश को आधार बनाया गया है जिसमें यह कहा गया है कि किसी भी सार्वजनिक प्रयोजन से संबंधित सर्वे के बाद उस क्षेत्र में खरीदी जाने वाली जमीन सरकार को नुकसान पहुंचाने के लिए होती है। इसका उद्देश्य बेजा बोनस या पुनर्वास पाना होता है।

एक एकड़ के हुए थे 20 से अधिक टुकड़े
एनटीपीसी के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन में बड़े किसानों से एक-दो एकड़ जमीन खरीदी गई। एक एकड़ खेत के 20-20 टुकड़े तक हुए। दो-तीन डिसमिल के टुकड़ों में जमीन बेची गई। हद तो तब हुई जब दो डिसमिल जमीन खरीदने वाले दो-तीन लोगों ने एक-एक डिसमिल के टुकड़े करा लिए। इस बात की चर्चा थी कि एक एकड़ से एक डिसमिल तक के जमीन मालिकों को जमीन की कीमत के साथ 5-5 लाख रुपए का बोनस देगा। कई पात्र भूमि स्वामियों को अब तक मुआवजा, बोनस या पुनर्वास नहीं मिल सका है।

खबरें और भी हैं...