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महंगाई की मार:23% तक महंगी होगी पढ़ाई, पिछले साल की बाकी फीस भी किस्तों में देंगे पैरेंट्स

रायगढ़16 दिन पहले
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स्कूल खुलने से स्टूडेंट्स खुश हैं लेकिन चौतरफा महंगाई के साथ ही नए सत्र में पढ़ाई महंगी होने को लेकर पालक चिंतित हैं। नए सत्र में 8 प्रतिशत फीस बढ़ोतरी और किताब व स्टेशनरी के दाम 15 फीसदी तक बढ़ने से पढ़ाई लगभग 23 फीसदी महंगी होगी। कोरोनाकाल में 15-20 फीसदी तक पेमेंट डिफॉल्ट हुआ है। यानि नौकरी या व्यापार प्रभावित होने के कारण पालक फीस जमा नहीं कर पाए हैं। कुछ स्कूलों ने इसमें राहत भी दी है। परीक्षा नजदीक आने और नए सत्र के एडमिशन का समय आने के साथ ही पालक फीस को लेकर परेशान हैं। डीजल-पेट्रोल और खाद्यान्न महंगे होने पर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं पढ़ाई पर बढ़े बजट के कारण भी पालकों में चिंता है। कोरोना संक्रमण काल में स्कूलों ने ट्यूशन फीस ही ली लेकिन ऐसी पालकों की बड़ी संख्या है जो इसका भुगतान भी नहीं कर पाए हैं। भास्कर ने पांच बड़े स्कूल प्रबंधन से बात की, पांच प्रतिशत स्टूडेंट्स के पैरेंट्स ऐसे हैं जो फीस की एक किस्त भी जमा नहीं कर पाए। फीस डिफॉल्ट करने वाले ज्यादातर पैरेंट्स अब स्कूलों में आवेदन देकर पुराने बकाए को 8-10 किस्तों में जमा करने की सुविधा मांग रहे हैं।

डीपीएस ने ज्यादा फीस ली थी, लौटानी पड़ी-15 फरवरी को डीईओ ने डीपीएस स्कूल के प्राचार्य को पत्र लिख एक छात्र अंश जैन से ली गई अधिक फीस लौटाने का आदेश दिया है। इसमें हाई कोर्ट के आदेश का हवाला दिया गया है। कोरोना काल में 2019-20 में तय फीस (सिर्फ ट्यूशन फीस) जितनी ही फीस ली जानी थी।अंश के पिता पवन जैन ने कलेक्टर भीम सिंह और डीईओ से की गई शिकायत में बताया था कि स्कूल प्रबंधन उनके बच्चे से तय से ज्यादा फीस ली थी।

फीस तय करने संकुल स्तर पर बनी थी समितियां
प्राइवेट स्कूलों में फीस निर्धारण के लिए हर संकुल स्तर पर कमेटी बनाई गई थी। शासन ने भी नए सत्र में 8 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने की इजाजत दी है। इस साल पुस्तकें 15 फीसदी महंगी होंगी। एनसीईआरटी के साथ ही प्राइवेट पब्लिशर्स दाम बढ़ा रहे हैं। इससे पिछले सत्र में कोरोना की परेशानी झेलने वाले पालकों पर इस बार 23 प्रतिशत तक अधिक भार पड़ेगा।

क्यूआर कोड की वजह से दाम बढ़े
बुक स्टोर संचालक ईश्वर पंजाबी बताते हैं कि एनसीईआरटी किताबें क्यूआर कोड सिस्टम में होती जा रही हैं । स्टूडेंट्स मोबाइल से ऑनलाइन स्कैन कर बुक स्टडी कर सकते हैं। इसकी वजह से ही एनसीईआरटी पुस्तकों में 8 से 10 फीसदी तक दाम बढ़े हैं। प्राइवेट पब्लिशर्स इस साल 15 फीसदी तक दाम बढ़ाएंगे। ये पब्लिशर्स छठी से बारहवीं तक की किताबें बनाते हैं। जिस किताब की कीमत 270 रुपए थी अब वह 310 रुपए की है।

जिन लोगों को ज्यादा परेशानी थी उन्हें राहत दी
"लॉकडाउन और कोरोना संक्रमण की वजह से हमने पैरेंट्स को थोड़ी राहत दी थी। छह फीसदी पैरेंट्स फीस जमा नहीं कर पाए। 120 ने हमसे मिलकर फीस देने में असमर्थता जाहिर कर राहत मांगी, उन्हें राहत दी गई है। निम्न आय वर्ग के लोगों में जिन लोगों को बहुत ज्यादा दिक्कत रही उन्हें 50 फीसदी तक छूट दी गई। नियमित ऑनलाइन क्लासेज लगाई गईं। फीस के लिए किसी पर दबाव नहीं डाला।’’
-आरके त्रिवेदी, प्रिंसिपल, ओपीजेएस

मजबूरी में कई लोगों ने स्कूल से टीसी ली
"नए सत्र की शुरुआत में तीन, चार स्टूडेंट्स ने टीसी ले ली है। कुछ स्टूडेंट्स के पालकों ने असमर्थता जताई। किसी पर संस्थान की तरफ से कोई दबाव नहीं बनाया गया है। नियमित रूप से ऑनलाइन पढ़ाई कराई गई, फीस की वजह से किसी को रोका नहीं गया। कई पालकों को 40-50 फीसदी तक राहत दी गई है । जिन्होंने बाद में फीस देने के लिए कहा, उन्हें राहत दी गई है।''
-सीपी देवांगन, एक्टिंग डायरेक्टर, एसपीएस

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