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विश्व हाथी दिवस विशेष:हाथी सुरक्षित रहें इसलिए ट्रैक पर बनाए ओवर और अंडर पास

रायगढ़एक महीने पहले
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  • धरमजयगढ़ वन मंडल के छाल रेंज अंतर्गत 25 किमी लंबी रेल लाइन में 6 जगह पैसेज, दावा: देश में पहली बार

जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में रेलवे ने हाथियों के लिए रेल ट्रैक पर ओवर और अंडर पास बनवाए हैं, दावा है कि देश में ऐसी व्यवस्था वाली पहली रेल लाइन है। वन मंडल के छाल रेंज के बीच करीब 25 किमी लंबी रेल लाइन एक साल पहले बिछाई है। इस लाइन के बीच हाथियों का मूवमेंट नियमित होता है। इसलिए 10 साल की रिपोर्ट के आधार पर फॉरेस्ट ने रेलवे को 6 जगहों पर गुजरते वक्त हाथियों के साथ रेल हादसे की आंशका जताई थी। जिसके बाद रेलवे ने इस्टीमेट में उनके आवागमन के लिए अंडर और ओवर पास के लिए ब्रिज बनवाए हैं। ईस्ट रेल कॉरीडोर बनाने रेलवे खरसिया से धरमजयगढ़ के बीच 132 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछा रहा है। बाद में इसे धरमजयगढ़ से कोरबा तक जोड़ा जाएगा। यह पूरा प्रोजेक्ट 4741 करोड़ रुपए का है। रेलवे ने अबतक लगभग धरमजयगढ़ तक रेल लाइन बिछा ली है। कारीछापर तक मालगाड़ियों का परिवहन भी शुरू हो चुका है। रेलवे जल्द ही कारीछापर के आगे ट्रायल कर कोयला परिवहन पहले चरण में शुरू करेगा। इस बीच धरमजयगढ़ और कोरबा वन मंडल के कई हाथी प्रभावित क्षेत्र आ रहे हैं। इन क्षेत्रों से हाथियों का मूवमेंट लगातार होता रहता है। ऐसे में हाथियों के साथ कोई अनहोनी न हो इसलिए इस पूरे प्रोजेक्ट में यह व्यवस्था की गई है। धरमजयगढ़ कोरबा के बीच बिछाई जाने वाली रेल लाइन पर भी हाथी के रास्ते में रेलवे इसी तरह अंडर और ओवर पास बनाएगा। कोंध्रा, लोटान और नवापारा में ओवर पास और पंडरीपानी और आमागांव में अंडर पास बनाए गए हैं।

एनएच 44 पर भी वन्यप्राणियों लिए अंडरपास
इसी तरह देश में पहली बार श्रीनगर से कन्याकुमारी को जोड़ने वाली नेशनल हाइवे 44 पर वन्यप्राणियों के कॉरीडोर के नजदीक फारेस्ट क्षेत्र में अंडर पास बनाया गया है। इस हाइवे में महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश के वन्यप्राणियों के मार्ग में यह व्यवस्था की गई है।

हाइट कम इसलिए 21 सौ स्थाई कनेक्शन को अनुमति नहीं
इधर विद्युत मंडल ने भी सुरक्षा की दृष्टि से धरमजयगढ़ क्षेत्र में बांस और बल्ली के सहारे कम हाइट पर कनेक्शन ले जाने वाले 21 सौ कनेक्शनों को अनुमति नहीं दे रही है। चीफ इंजीनियर सीएस सिंह ने इसके लिए राज्य शासन से कनेक्शनों के लिए अतिरिक्त पोल की मांग की है। ताकि इन कनेक्शनों की उंचाई न्यूनतम 16 फीट से अधिक हो और क्षेत्र में करंट से होने वाली हाथियों के साथ दुर्घटनाओं को कम किया जा सके।
सुरक्षा की दृष्टि से बेहद जरूरी
अबतक किसी भी रेलवे लाइन में इस तरह की व्यवस्था नहीं है। यह इंडिया का पहला रेल लाइन है, जहां एलिफेंट के लिए ओव्हर और अंडर पास की व्यवस्था की गई है। यह हाथियों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी और फायदेमंद है। मणिवासगन एस, डीएफओ धरमजयगढ़

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