ड्रीम प्रोजेक्ट में लापरवाही:9 महीने बाद भी अधूरा है भवन, आत्मानंद में स्टूडेंट्स को नहीं मिल रही है बैठने की जगह

रायगढ़2 महीने पहले
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  • 3 करोड़ मिलने के बाद भी पीडब्ल्यूडी ने तैयार नहीं किया इंग्लिश मीडियम स्कूल भवन

आत्मानंद इंग्लिश मीडियम स्कूल सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है लेकिन नटवर स्कूल में बन रहे इस स्कूल का निर्माण पूरा नहीं हो सका है। सालभर पहले तीन करोड़ रुपए दिए गए, स्कूल भवन पहले से बना हुआ है लेकिन 9 महीने बाद भी पीडब्ल्यूडी स्कूल का जीर्णोद्धार नहीं कर सका है। हिंदी और इंग्लिश मीडियम स्कूल की पढ़ाई इस वजह से प्रभावित हो रही है।

नटवर स्कूल में बन रहे आत्मानंद स्कूल के लिए अक्टूबर 2020 में पीडब्ल्यूडी को रुपए मिले थे। जनवरी में काम शुरू किया गया जुलाई के आखिर में पूरा होना था लेकिन सितंबर के आखिर तक स्कूल बनाया नहीं जा सका है। पीडब्ल्यूडी अफसर इसके लिए कोरोना और साइट क्लियर नहीं होने को इसकी वजह बता रहे हैं। स्कूल बिल्डिंग तैयार नहीं होने की वजह से वहां अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम के स्कूल बच्चों को भी पढ़ाई कराने के लिए परेशानी हो रही है। 50 फीसदी स्टूडेंट्स स्कूलों में आना है लेकिन उसके बाद क्लास रूम में इतने ज्यादा स्टूडेंट्स हो गए हैं कि एक क्लास रूम में सारे स्टूडेंट्स नहीं बैठाया जा पा रहा है। सीएम से शुभारंभ करने की तैयारी है, लैब के साथ स्कूल के क्लासरूम, पार्किंग एरिया जैसे काम नहीं हुए हैं। लेटलतीफी पर कलेक्टर भीम सिंह नाराजगी जता चुके हैं। शासन से कार्रवाई की अनुशंसा करने तक की बात कह चुके हैं लेकिन जिला मुख्यालय का स्कूल ही तैयार नहीं हो सका है। स्कूल भवन हों, अस्पताल या सड़कें, पीडब्ल्यूडी की लेटलतीफी के कारण लोग परेशान हैं।

769 विद्यार्थी और कक्षाएं सिर्फ 10, डिस्टेंसिंग नहीं
नटवर हिन्दी माध्यम स्कूल के नौवीं से बारहवीं तक कक्षाओं में 769 स्टूडेंट्स हैं। 10 क्लासरूम हैं। कोरोना के कारण दूसरे स्कूलों में डिस्टेंसिंग का पालन हो रहा है लेकिन यहां एक बैंच पर 3-3 स्टूडेंट्स बैठ रहे हैं। प्राचार्य विनोद राठिया ने बताया कि 11वीं आर्ट्स में 147 स्टूडेंट्स हैं। अधिक स्टूडेंट्स होने के कारण छात्र और छात्राओं को अलग-अलग दिन यानि आल्टरनेट दिनों में बुलाना पड़ता है। दो क्लास रूम में एक क्लास के स्टूडेंट्स को बैठाते थे लेकिन अब जगह नहीं होने के कारण एक ही कक्षा में बैठाना पड़ता है।

पांच साल बाद भी नहीं बना सके अस्पताल भवन
मेडिकल कॉलेज की नई हॉस्पिटल बिल्डिंग का काम अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इसमें मार्च 2010 काम शुरू हुआ था, शुरुआत में इसकी लागत 106.35 करोड़ रुपए थी। फिर लागत बढ़ोतरी होने के बाद इसे 282.50 करोड रुपए हो गई थी। 2013 में मेडिकल कॉलेज भवन का निर्माण पूरा हो गया लेकिन से अस्पातल भवन अब तक तैयार नहीं है। 2014 के सत्र में जब मेडिकल कॉलेज शुरू हुआ तो अस्पताल के लिए जिला चिकित्सालय का अधिग्रहण किया गया। तीन साल के भीतर अस्पताल तैयार होने और अस्पताल के वहां शिफ्ट होने की बात कही गई थी लेकिन पीडब्ल्यूडी पांच साल बाद भी मेडिकल कॉलेज भवन में अस्पताल तैयार नहीं कर सका । सेंट्रल एसी और गैस पाइपलाइन काम हो चुका है, अब सिविल वर्क बाकी है।

भवन में भरा है सामान इसलिए हो रही है देर
काम जल्दी करने के लिए साइट क्लियर होनी चाहिए । क्लास रूम में फर्नीचर भरे हुए हैं ऐसे काम करने में परेशानी हो रही है, हम बार-बार पत्र लिख कर सामान हटाने के लिए कह रहे हैं लेकिन सामान हटाए नहीं जा रहे हैं।''
-आरके खामरा, ईई, पीडब्ल्यूडी

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