राम वन गमन परिपथ परियोजना:रामझरना में बढ़ेंगी सुविधाएं, गार्डन होगा हरा-भरा

रायगढ़2 महीने पहले
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रामझरना का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर भीम सिंह। - Dainik Bhaskar
रामझरना का निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर भीम सिंह।

रामझरना जिले के पर्यटन मानचित्र में एक प्रमुख नाम है और यह शासन की राम वन गमन परिपथ परियोजना में भी शामिल है। इसको देखते हुए रामझरना में पर्यटन व जन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा, उक्त बातें कलेक्टर भीम सिंह ने आज रामझरना के निरीक्षण के दौरान कही। कलेक्टर सिंह ने रामझरना के बारे में वन विभाग के अधिकारियों से जानकारी ली।

बताया गया कि यहां कुंड से जल की अविरल धारा बहती रहती है, जिसको लेकर प्राचीन मान्यताएं भी हैं। दूर दूर से पर्यटक यहां आते हैं। कलेक्टर पर्यटकों के लिए मौजूद सुविधाओं की भी जानकारी ली। उन्होंने रामझरना से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों के लेख को व्यवस्थित रूप से लगाने के निर्देश दिए। जिससे आने वाले पर्यटक यहां के बारे में जान सके। इसके साथ ही उन्होंने मुख्य कुंड के समीप रंग-रोगन करने तथा पर्यटकों के बैठने के लिए बेंच लगाने के निर्देश दिए। स्वच्छ पेयजल तथा शौचालय की व्यवस्था करने के लिए निर्देशित किया। बच्चों के लिए झूला लगाने तथा गार्डन को विकसित करने की बात कही। यहां बनाए गए स्वीमिंग टेंक तथा चेजिंग रूम का भी निरीक्षण किया तथा यहां जरूरी मरम्मत करने के निर्देश दिए। इन सब कार्यों के लिए उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों को जल्द प्रस्ताव तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिससे कि कार्याे को स्वीकृति प्रदान कर जल्द काम शुरू किए जा सके। इस दौरान एसडीएम खरसिया अभिषेक गुप्ता, तहसीलदार हितेश साव, रेंजर डनसेना सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

टीपाखोल में केज कल्चर से मछली पालन को भी देखा
कलेक्टर भीम सिंह आज टीपाखोल जलाशय में किए जा रहे केज कल्चर मछली पालन के निरीक्षण में पहुंचे। कलेक्टर श्री सिंह आज रॉफ्ट के माध्यम से टीपाखोल जलाशय के बीच पहुंचे। जहां केज कल्चर के माध्यम से मछली पालन किया जा रहा है। कलेक्टर ने यहां किए जा रहे कार्यों के संबंध में जानकारी ली। बताया गया कि यहां रायपुर के एक हितग्राही द्वारा केज कल्चर मछली पालन किया जा रहा है। यहां 24 केज में मछली पालन हो रहा है। फ्लोटिंग रॉफ्ट तथा नेट के माध्यम से केज का निर्माण किया गया है। प्रत्येक केज में 3 से 4 हजार मछली के फिंगरलिंग डाले गए है। जिसमें से हर केज में साल भर में 3 से 4 टन मछली का उत्पादन होता है।

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