ये ठीक नहीं:अप्रैल में मिले 15 हजार 616 में एक हजार संक्रमितों का पता नहीं, ये बांट रहे हैं वायरस

रायगढ़6 महीने पहले
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स्टिकर फाड़ बाहर निकलते हैं संक्रमित इसलिए घर पर अब ऐसा निशान। - Dainik Bhaskar
स्टिकर फाड़ बाहर निकलते हैं संक्रमित इसलिए घर पर अब ऐसा निशान।
  • संक्रमित पाए जाने पर आइसोलेशन, रोक-टोक न हो इसलिए सेंटरों में लिखवा रहे गलत पता

कोरोना संक्रमण जानलेवा हो चुका है। अप्रैल में ही लगभग 190 लोगों की कोरोना से मौत हो चुकी है। हर तरफ लोग बेड ढूंढ रहे हैं। कोई ऑक्सीजन नहीं मिलने से परेशान है तो किसी को रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिल पा रहा है। वहीं जिले में कुछ लोग ऐसे हैं जो आइसोलेशन में न जाना पड़े इसलिए अपने संक्रमित होने की बात छिपा रहे हैं।

अप्रैल में कुल 15 हजार 616 संक्रमित मिल चुके हैं लेकिन इनमें लगभग एक हजार संक्रमितों ने गलत पता लिखाया है। स्वास्थ्य विभाग इन्हें ढूंढ नहीं पा रहा है। ये लोग परिवार के साथ ही पड़ोसी और बाहर मिलने वालों की जान के दुश्मन बन रहे हैं।

बुधवार को जिले में 1085 पॉजिटिव मरीज मिले हैं। 24 घंटे में 10 लोगों ने जान गंवाई है। 18 मई 2020 से अब तक जिले में कोरोना संक्रमित लोगों की कुल संख्या 40 हजार 169 हो गई है। इनमें 29 हजार 953 लोगों ने कोरोना को हराया है लेकिन 521 लोगों की मौत हुई है। कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण के साथ मौत की रफ्तार तेज है। जिले में एक्टिव केस 9 हजार 695 है। अप्रैल से अब तक 5 हजार 690 लोगों ने रिकवरी की है। दो दिन से रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं मिलने के कारण कुछ लोग कलेक्टोरेट पहुंचे और अफसरों से इंजेक्शन उपलब्ध कराने की मांग की।

दो दिन बाद आज मिलेंगे 240 रेमडेसिविर इंजेक्शन

जिले में गंभीर मरीजों के लिए रेमडेसिविर की भारी किल्लत है। इसकी सप्लाई सीधे अस्पतालों में की जा रही है लेकिन पिछले दो दिनों से इंजेक्शन मिले नहीं हैं। असिस्टेंट ड्रग कंट्रोलर संजय राजपूत ने बताया कि राज्य स्तर पर इंजेक्शन को लेकर लगातार बातचीत चल रही है। गुरुवार सुबह जिले के लिए 240 इंजेक्शन मिलेंगे। ये इंजेक्शन प्राइवेट अस्पतालों को उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त इंजेक्शन उपलब्ध करा दिए गए हैं।

लोग घरों से निकल रहे, अस्पताल भी जा रहे हैं

शहरी स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रबंधक डॉ राकेश वर्मा ने बताया कि कोरोना संक्रमित लोग खुद और उनके परिजन प्रोटोकॉल का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ा है। संक्रमितों के घरों में स्टिकर लगाने से लोग उसे फाड़ रहे थे। अब मितानिनों के जरिए गेरू से लाल निशान लगाए जा रहे हैं ताकि लोग समझ सकें की फलां परिवार के सदस्यों से दूर रहना है या उन्हें बाहर देखकर लोग शिकायत कर सकें। ऐसे लोगों के खिलाफ एफआईआर कराने के आदेश हैं।

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