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कोरोना का मानसिक स्वास्थ्य पर असर:बुजुर्ग और महिलाओं में भी बढ़ रहा चिड़चिड़ापन, आदत में शामिल हो रही साफ-सफाई और दूसरों से दूरियां

रायगढ़एक महीने पहले
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  • घर में माहौल बिगड़ा तनाव ने बढ़ाए झगड़े, मनोरोग चिकित्सकों के यहां बढ़े मरीज

‘हाथ धो लो, नहीं तो कोरोना हो जाएगा, घर से बाहर आने पर नहाने की जिद, रूक-रूक कर साफ सफाई करना कामकाजी महिलाओं, बच्चाें के साथ वृद्धजनाें की आदत में शुमार हाे रहा है। ऐसा न करने तथा इसे राेकने पर उनके स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ रहा है। जिले में इस तरह के 10 फीसदी मरीज मनाेराेग चिकित्सक के यहां पहुंच रहे है। इस तरह की बीमारी काे ओसीडी (ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर) कहते हैं। रायगढ़ मेडिकल कालेज के मनाेराेग विशेषज्ञ डा. रमेश कुमार अजगल्ले ने बताया कि इस समय उनके पास ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (ओसीडी) का शिकार हाेकर 10 फीसदी तक मरीज पहुंच रहे है। इस तरह के मरीजाें के कारण घराें में लड़ाई झगड़े भी हाे रहे है। ओपीडी में पहुंचने वाले ऐसे मरीजाें में लगातार सफाई करने की लत के साथ चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। इसके कारण घर में वाद विवाद भी हाे रहा है। इतना हीं नहीं ऐसे मरीज साफ सफाई के कारण लाेगाें से दूरियां बना कर चलते है। ऐसे मरीजाें काे एक निश्चित समय में साफ सफाई करने तथा काेराेना काे लेकर दी गई गाइड लाइन का ही पालन करना चाहिए। नहीं ताे यह आदत मानसिक तनाव उत्पन्न कर सकती है।

अक्सर लगता है कोई काम अधूरा छूट गया
लॉकडाउन अवधि में ज्यादा समय से घर पर रहे लाेग और बीमारी के खाैफ के चलते बार बार हाथ धाेना, जूते, चप्पल, कपड़े बिस्तर, किचन, घर की साफ सफाई काे दिन भर करते रहने ओसीडी के दायरे में आता है। ऐसे करने वाले लाेगाें के दिमाग में यह घर कर जाता है कि उनका काेई काम अधूरा,(छूट) गया है। जिसे करने के लिए वह बार बार आतुर रहते है। जिसे मना करने या फिर समय से न कर पाने पर चिड़चिड़ापन आने लगता है।
बच्चाें काे आगे चलकर परेशानी हाे सकती है
काेराेना काल में घर पर बच्चाें काे साफ सफाई के लिए बताया जा रहा है, जिसे डाॅक्टर अच्छी बात मान रहे है, लेकिन किसी काम काे बार बार करने की लत ओसीडी के दायरे में आ जाएगी। इससे कुछ दिन बाद स्कूल खुलने तथा बच्चाें के अन्य जगहाें पर आने जाने में परेशानी उत्पन्न कर सकती है। हालांकि बच्चाें काे जिस माहाैल में ढाला जाता है वह उसी माहाैल में ढल जाते है। उनके परिवर्तन जल्दी लाया जा सकता है।
24 से 45 साल के बीच की महिलाएं ज्यादा प्रभावित
घर पर रहने वाले उम्र दराज लाेग पहले भी फुर्सत के समय में घर की साफ सफाई के साथ तमाम घरेलू काम किया करते थे, लेकिन काेराेना काल में उनकी दिनचर्या बदल गई है। अब फुर्सत के समय में एक ही काम काे बार बार करने से उनमें चिड़चिड़ापन आ गया है। विशेषज्ञ कहते है जब किसी काम काे बार बार करने से मना करने पर राेकने पर व्यक्ति एरिटेट हाे जाता है। इस तरह की समस्या 25-45 वर्ष के घरेलू महिलाओं में निकल कर तेजी सामने आ रही है।

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