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मदर्स डे आज:अपने बच्चों से वीडियो कॉल पर लाड, अभी मरीजों की सेवा है प्राथमिकता

रायगढ़एक महीने पहले
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बेटा संक्रमित हुआ तो खुद क्वारेंटाइन थी: डॉ. जया। - Dainik Bhaskar
बेटा संक्रमित हुआ तो खुद क्वारेंटाइन थी: डॉ. जया।

रविवार को मदर्स डे है। कोरोना संक्रमण के बीच डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ माताओं पर दोहरी जिम्मेदारी है। पिछले साल मार्च से नवंबर तक इन्होंने न केवल संक्रमितों की सेवा की बल्कि खुद को सेहतमंद रखते हुए परिवार को सुरक्षित रखा। इस साल चुनौती और ज्यादा है, प्रोफेशन और फैमिली में सामंजस्य सालभर से इनके लिए चुनौती बना हुआ है।

कोविड सेंटर हों या सिविल अस्पताल हर जगह खतरा और जिम्मेदारी है। इसमें लगीं ज्यादातर महिला प्रोफेशनल ड्यूटी के बाद लंबे आइसोलेशन के कारण बच्चों से दूर रहती हैं। भास्कर ऐसी सेवाभावी मातृ शक्तियों को मदर्स डे पर नमन करता है। जिले के सरकारी और निजी कोविड सेंटरों में महिला डॉक्टरों और नर्स के अलावा बड़ी संख्या में ऐसी महिला कर्मचारी हैं जिनके बच्चे छोटे हैं लेकिन कोई वैक्सीन ड्राइव में लगा है तो कोई कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में, लॉकडाउन में जब सभी लोग घरों में है तो ये महिलाएं परिवार से दूर लोगों की सेवा कर रही हैं।

बेटा संक्रमित हुआ तो खुद क्वारेंटाइन थी: डॉ. जया
ईएनटी सर्जन और मेडिकल कॉलेज की एसोसिएट प्रो. डॉ. जया साहू एक बेटे और बेटी की मां हैं। पति डॉ. त्रिभुवन साहू भी गायनेकोलॉजिस्ट और मेडिकल कॉलेज में ही एपी हैं । पहले अस्पताल की ड्यूटी फिर हफ्तेभर का आइसोलेशन चुनौती पूर्ण है। पति बुरला मेडिकल कॉलेज में एग्जाम कराने गए थे। अचानक 14 साल का बेटा संक्रमित हो गया। डॉ. जया खुद आइसोलेशन में थीं। पति डॉ. साहू को शहर लौटना पड़ा। बच्ची को संभाला। दूर रहते हुए डॉ. जया बच्चों की काउंसिलिंग करती रहीं। वे कहती हैं लगभग एक साल से काम और परिवार में सामंजस्य बनाए रखना चुनौतीपूर्ण लेकिन लोगों की सेवा के लिए यह जरूरी है।

बच्चों को नाना-नानी के पास छोड़ा वीडियो कॉल से बात: डॉ ज्योति

मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी डिपार्टमेंट की डॉ. ज्योति चौधरी बताती हैं कि उनके तीन साल के दो जुड़वा बच्चे हैं। दोनों बच्चों को नाना और नानी के पास में छोड़ कर कोविड आइसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करती हैं। यहां कोविड लक्षण वाले मरीजों को भर्ती किया जाता है। इनमें अधिकांश लोग संक्रमित मिलते हैं। हमेशा संक्रमित होने का डर लगा रहता है 10 दिन की ड्यूटी के बाद चार से पांच दिन के लिए आइसोलेशन में जाना होता है और आरटीपीसीआर टेस्ट कराना होता है, इस तरह 15 दिनों तक बच्चों और घर से दूर रहना होता है। बच्चे मिलने की जिद्द करते हैं और मुझे याद करते है तो मम्मी-पापा वीडियो कॉलिंग कर उनसे बात कराते हैं।

सालभर से कोरोना प्रकोप, ड्यूटी लगती है तो 17 दिनों तक दूर रहती हैं बेटे से: सिस्टर अंजलि

एमसीएच में पदस्थ सिस्टर अंजलि रोजी ने बताया कि उनका तीन साल का बेटा है। उसे वे मम्मी-पापा के पास छोड़कर आती हैं। कोरोना संक्रमित का इलाज करते हुए वे खुद कोरोना संक्रमण में ना आए जाए, यह तनाव हमेशा रहता है। पहली लहर में वे संक्रमित हो चुकी हैं। बच्चे से 17 दिन तक दूर रहती है। पिछले एक साल कोविड ड्यूटी करनी पड़ रही है। अभी भी हफ्तेभर से बच्चे और घर से दूर होकर कोविड ड्यूटी कर रही है। कई बार मरीजों की हालत देखकर लगता है कि यह महामारी जल्द खत्म हो।

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