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कोरोना कहर:21 दिन में सबसे ज्यादा 285 मौतें ज्यादातर 41 से 60 साल के मरीज

रायगढ़एक महीने पहले
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  • जिले में 954 संक्रमित, 8 मौतें लेकिन संक्रमण दर में मामूली कमी
  • गंभीर बीमारी या वैक्सीन लेने में लापरवाही है कोरोना संक्रमितों की मौत की बड़ी वजह

गुरुवार को जिले में 954 कोरोना संक्रमित मिले, 8 कोरोना पीड़ितों की मौत हुई है। 3821 लोगों की जांच में 25 फीसदी की संक्रमण दर से मरीज मिलने से स्वास्थ्य विभाग ने थोड़ी राहत महसूस की है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी बुलेटिन में 1223 संक्रमित अस्पताल में भर्ती बताए गए हैं। जिले के 35 लोग रायपुर और बिलासपुर के अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।

954 संक्रमितों में शहर में 177, लोइंग से 127 लोग पॉजिटिव पाए गए हैं। लगातार बढ़ रहे मरीजों को देखते हुए केआईटी की पुराने बिल्डिंग में बन रहे कोविड सेंटर को भी खोलने की तैयारी शुक्रवार से की गई है। 100 ऑक्सीजन बेड तैयार किए गए हैं। गुरुवार को नगर निगम कार्यालय के सामने एक व्यापारी के 25 साल के बेटे की कोरोना से मौत हो गई। युवक का कुछ दिन से निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था। अप्रैल से अब तक बड़ी संख्या में युवाओं की मौत हुई है।

जिले में पिछले 20 दिनों में कोरोना संक्रमण से 285 लोगों की मौत हुई है। मरने वालों में 41 से 60 साल के लोग सबसे अधिक हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इनमें ज्यादातर लोग या तो हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित थे या फिर इन्हें वैक्सीन के एक या दो डोज नहीं लगे थे। कुछ मामलों में लापरवाही की भी बात कही जा रही है। इलाज में देर की वजह से भी कुछ लोगों की जान गई है।

टीका लेने वाले फ्रंटलाइन वर्कर्स में 0.1% संक्रमित हुए
इसी हफ्ते 114 लोगों की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। इस हफ्ते सारे रिकार्ड टूटे हैं। 22 से 28 अप्रैल के बीच 96 लोगों की मौत और उससे पहले 15 से 21 अप्रैल के बीच 75 लोगों की जान गई। केआईटी कोविड सेंटर के प्रभारी फिजिशियन डॉ डी प्रशांत ने बताया कि लोगों को वैक्सीनेशन को लेकर गंभीरता बरतनी होगी।

अभी भी 41-60 वर्ष के उम्र के लोग वैक्सीन की दोनों डोज नहीं लगवाई है। एक डोज लगाने वाले लापरवाही बरत रहे हैं। राजस्व, पुलिस कर्मी और फ्रंटलाइन वर्कर्स में 70 हजार लोगों को वैक्सीन लग चुकी है। वैक्सीन लगने के बाद 70 लोगों को ही कोरोना हुआ है, हार्ट अटैक या दूसरी गंभीर बीमारियों के कारण दो-तीन संक्रमितों की जान गई है। दोनों डोज लगवाने के 15 दिन बाद एंटीबॉडी बनती है। कोविड होने के बाद गांव में ट्रीटमेंट कर रहे हैं, इससे मुश्किल बढ़ी है।

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