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किसान परेशान:बिचौलिए 1 रुपए किलो के भाव से खरीद रहे हैं इसलिए किसान फेंक रहे टमाटर

रायगढ़एक महीने पहले
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  • गर्मी में सब्जियां महंगी फिर भी टमाटर उत्पादक परेशान, सड़ने के लिए खेतों में ही छोड़ दिए

गर्मी के दिनों में सब्जियों के दाम बढ़ रहे हैं लेकिन किसान उत्पादक किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। उत्पादन की लागत जितनी भी कीमत नहीं मिलने के कारण किसान परेशान हैं। कोचियों को सस्ते में टमाटर देना पड़ रहा है। किसानों से टमाटर 70 पैसे से एक रुपए किलो के भाव से खरीदा जा रहा है वहीं बाजार में इसके भाव 10 रुपए किलो तक हैं। ग्रामीण इलाकों में कई जगह तो किसानों ने फसल खेत में ही सड़ने के लिए छोड़ दी है। जशपुर जिले के साथ ही रायगढ़ के लैलूंगा इलाके में टमाटर उत्पादक किसान परेशान हैं। इस वक्त उन्हें टमाटर के लिए प्रति किलो 1 रुपए से भी कम दाम मिल रहा है। जो लागत से बेहद कम है। इसलिए उन्हें नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ किसान किसी भी रेट पर फसल बेचने के लिए तैयार हैं वहीं कुछ किसानों ने टमाटर खेत में ही सड़ने के लिए छोेड़ दिए हैं। बेमौसम बारिश ने फसल खराब की- किसानों के अनुसार इस बार बेमौसम बारिश से फसल खराब सबसे ज्यादा हुई है। दरअसल टमाटर की फसल की तुड़ाई 7-8 बार होती है। ऐसे में उनके उत्पादन लागत के बाद उन्हें भरपूर लाभ भी मिल जाता है। लेकिन बेमौसम बारिश के कारण फसल खराब हो जाती है। जनवरी के बाद ही टमाटर की फसल थोड़ी ठीक होती है। इसी वक्त सबसे ज्यादा मार्केट में दाम में गिरावट आती है। सभी ओर से टमाटर की आवक बढ़ जाने से दाम अचानक से गिर जाते हैं।

5 से 6 रुपए कमाते हैं बिचौलिए
बिचौलिए किसानों से टमाटर एक-दो रुपए में खरीदकर 6 रुपए तक के भाव पर बाजार में चिल्हर दुकानदारों को बेच देते हैं। किसानों से ज्यादा लाभ बिचौलिए उठाते हैं। वहीं बैंक के दबाव में कर्ज से परेशान किसान जहां एक ओर अब टमाटर की खेती करने से मुंह फेर रहे हैं। वहीं सरकार से किसी तरह का मुआवजा नहीं मिलने से निराश हैं। टमाटर के दाम नहीं बढ़ने से किसान काफी परेशान हैं। सालों से जशपुर में टमाटर के प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की बात कही जा रही है लेकिन रायगढ़ और जशपुर में पैदा होने वाले टमाटर में पानी की मात्रा ज्यादा होने के कारण टमाटर के उत्पाद बनाना मुश्किल है। कृषि के जानकार टमाटर की दूसरी प्रजाति की खेती के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित करते हैं लेकिन ज्यादातर किसान अब भी लोकल किस्म के टमाटर की ही खेती करते हैं।

यह है टमाटर की खेती का अर्थशास्त्र

  • प्रति एकड़ में उत्पादन-औसत 50 से 60 कैरेट- प्रति कैरेट 25 किलो (1250 से 1500 किलो)
  • प्रति एकड़ में उत्पादन में लगने वाला खर्च- 20 हजार रुपए तक (तोड़ाई और माल को बाजार तक पहुंचाने का खर्च अलग)
  • प्रति एकड़ में होने वाली कमाई- वर्तमान में बिचौलिए एक कैरेट के लिए सिर्फ 30 से 40 रुपए तक दे रहे हैं।

कोचिए तय करते हैं रेट
भास्कर ने लैलूंगा क्षेत्र के किसान रामलाल नायक से बात की। उन्होंने बताया कि कोचिए टमाटर का रेट तय करते हैं। किसान की कभी भी मार्केट में सीधी पहुंच नहीं होती। किसान अपना माल किसी कोचिए के जरिए ही सब्जी मंडी या बाजार तक पहुंचाता। बिचौलिए कमीशन के रूप में मोटा मुनाफा कमाता है। मंडी या बाजार दूर होने के कारण कई किसान अपना माल बाजार जाकर बेच भी नहीं पाते।

किसान एक ही फसल पर निर्भर इसलिए नुकसान
"किसान टमाटर की सातवीं या आठवीं फसल तोड़ रहे हैं। इसलिए ओवरऑल उन्हें नुकसान कम होगा। हां यदि बारिश या अन्य कारणों से नुकसान हुआ है तब उसे नुकसान हो सकता है। फसल के दाम गिरने के पीछे सबसे बड़ा कारण यही है कि किसान एक फसल पर निर्भर हैं।''
-के दीवान, सहायक संचालक, उद्यानिकी विभाग रायगढ़

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