अब तक 114 आए डेंगू की चपेट में:नए मरीज हो रहे गंभीर, देनी पड़ रही प्लेटलेट्स; 4 साल पहले आई सेपरेटर मशीन अब तक शुरू नहीं

रायगढ़2 महीने पहले
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शहर साथ ही अब ग्रामीण इलाकों से भी डेंगू मरीज मिल रहे हैं। अब तक शहर से 87 और जिले में 114 मरीज चुके हैं। अब मिल रहे मरीजों में कुछ के रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या तेजी से गिरने के कारण उन्हें अस्पताल में भर्ती कराकर प्लेटलेट्स चढ़ानी पड़ रही है।

ब्लड बैंक के ब्लड सेपरेटर मशीन से भी हर रोज मरीजों के परिजन 15 से 20 यूनिट प्लेटलेट ले जा रहे हैं। प्राइवेट ब्लड बैंक संचालकों का कहना है कि प्लेटलेट ज्यादा लगने की वजह से ब्लड डोनेशन भी ज्यादा कराना पड़ रहा है। अभी शहर में अधिकांश बड़े प्राइवेट और सरकारी हॉस्पिटल मरीज भर्ती है। ब्लड बैंक और ग्रुप्स से जुड़े सदस्यों का कहना है कि उनके पास हर रोज प्लेटलेट उपलब्ध कराने के लिए फोन आ रहे हैं।

ब्लड डोनेट कराने वाले ग्रुप्स के सदस्यों से अधिक से अधिक रक्तदान करने के लिए कहा जा रहा है। सेपरेटर मशीन से प्लाज्मा और प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं। संजीवनी नर्सिंग होम के ब्लड बैंक के प्रभारी पंकज कश्यप ने बताया शुक्रवार को ही 20 यूनिट डोनेशन हुआ है। इसके अलावा देर शाम तक 10 यूनिट के लिए प्लेटलेट के लिए डिमांड आ चुकी थी। अशर्फी देवी हॉस्पिटल में तीन मरीज इसके अलावा अंकुर हॉस्पिटल में डेढ़ साल के बच्चे की रिपोर्ट डेंगू पॉजिटिव आने के बाद शुक्रवार को उन्हें प्लेटलेट्स चढ़ाई गई।

मेडिकल कॉलेज के डेंगू प्रभारी डॉ जितेन्द्र नायक ने बताया कि केजीएच हॉस्पिटल में मरीज ज्यादा नहीं आ रहे हैं। डेंगू के मरीज ज्यादातर निजी अस्पताल में जा रहे हैं। ठंड में मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है, ऐसे में अभी थोड़ा सतर्क रहने की ज़रूरत है, हालांकि अभी हर रोज टेस्ट कराने के लिए कहा जा रहा है। ब्लड डोनेशन ग्रुप्स से जुड़े विमल अग्रवाल ने बताया कि दो दिनों में केजीएच, केजीएच, मेट्रो बालाजी, मिशन हॉस्पिटल, अशर्फी देवी अस्पताल और संजीवनी नर्सिंग होम में भी मरीजों के लिए ब्लड डोनेट कराना पड़ रहा है।

150 पचास यूनिट से कम होने की दशा में मरीजों को प्लेटलेट चढ़ाना जरूरी हो जाता है। मेडिकल कॉलेज में ब्लड कंपोनेंट मशीन चार साल पहले मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल में आ करके रखी हुई है। लेकिन अभी तक यह शुरू नहीं हो पाई है। इस वजह से मरीजों को निजी हॉस्पिटलों और ब्लड डोनेशन सेंटरों में जाकर पहले रक्तदान करना पड़ता है फिर प्लेटलेट्स का इंतजाम करना पड़ रहा है। निजी सेंटरों में मरीज के परिजन को अधिक फीस देनी पड़ रही है।

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